स्तनों में दूध बढ़ाने के उपाय – How to increase Breast milk Production in Hindi

स्तनों में दूध बढ़ाने के उपाय - How to increase Breast milk Production in Hindi

माँ के दूध को शिशु की रोग निरोधक क्षमता के लिए पहली रामबाण औषधि माना जाता हैं। नवजात के लिए मां का दूध औषधि व पौष्टिकता से पूर्ण होता है। जिन बच्चों को जन्म के पहले छह महीनों के दौरान सिर्फ़ माँ का दूध पिलाया जाता है उनके जीवित रहने की सम्भावना 14 गुना ज़्यादा होती है. जबकि जिन बच्चों को माँ का दूध नहीं पिलाया जाता है, पहले छह महीनों के दौरान उनके जीवन को 14 गुना ज़्यादा ख़तरा होता है. जन्म के बिल्कुल बाद से ही माँ का दूध पिलाना शुरू करने से शिशु की मौत का ख़तरा 45 प्रतिशत तक कम हो जाता है. माँ का दूध अच्छी तरह से मिलने से बच्चे में तेज़ी से सीखने की क्षमता बढ़ती है, साथ ही इससे बच्चे के मोटा होने का ख़तरा कम होता है और आगे चलकर जीवन में अनेक बीमारियों से भी सुरक्षा रहती है.

यह एक गंभीर विषय है अगर माँ अपने नवजात बच्चे के लिए भरपूर मात्रा में दुग्ध अपने स्तनों से उपलब्ध नहीं करवा पाती है तो बच्चे के पोषण में कमी आ सकती है. इसलिए प्रत्येक माता ये चाहती है की उसके सतनों से कम से कम इतना दूध जरूर निकले की उसका बच्चा अपना पेट भर पाये और उसको किसी भी प्रकार से पौषक तत्वों की कमी न हो. इसके लिए समझदार माता गर्भधारण करने के बाद से ही अपने खान पान पर ध्यान देने लगती है ताकि वो एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सके. अगर माता अपना दूध बच्चे को पिलाती है तो उसके बच्चे भी उसके प्यार को पाकर प्रसन्न हो जाते है बच्चा समझने लगता है की उसका भोजन उसकी माता के दूध पर ही निर्भर है इसलिए वो बच्चा अपनी माँ को देखते ही प्रसन्नचित हो जाता है.

जन्म के 1 घंटे तक शिशु में स्तनपान करने की बहुत इच्छा होती है। बाद में उसे नींद आने लगती है। इसलिए जन्म के बाद जितनी जल्दी माँ अपने बच्चे को दूध पिलाना शुरू कर दे उतना ही अच्छा है। आमतौर पर जन्म के 45 मिनट के अंदर स्वस्थ बच्चे को स्तनपान शुरू कर देना चाहिए।

स्तनों में दूध बढ़ाने के उपाय

  • शतावर का चूर्ण रोजाना 3 से 5 ग्राम गाय के दूध के साथ सेवन करने से माँ के दूध में वृद्धि होती है और जिन माताओं का दूध सुख जाता है या कम हो जाता है इसके सेवन से स्तनों में दूध उतर जाता है
  • तुलसी के सेवन करने से न केवल बीमारियां ठीक हो जाती है बल्कि यह स्तन क दूध को बढ़ाने में भी मददगार होता है। इसके अंदर विटामिन क की मात्र अधिक पायी जाती है। आप इसको सूप म या कच्चे शहद के साथ भी खा सकते है।
  • करेला में विटामिन और मिनरल अच्छी मात्रा में पाये जाते है। इससे स्तन का दूध बढ़ने की क्षमता बढ़ जाती है। करेला बनाते वक़्त हलके मसालों का उपयोग करना चाहिए, जिससे यह आसानी से हजम हो सके और आप स्वस्थ रह सके।
  • लहसुन खाने से भी दूध बढ़ाने की क्षमता बढ़ जाती है। कच्चा लहसुन खाने से जगह आप इसको मीट, करी, सब्जी या दाल में डाल कर पकाये। अगर आप लहसुन को रोज़ाना खाना शुरू करेगी तो यह आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा।
  • एक चम्मच सफेद जीरे का चूर्ण ले और इस चूर्ण मे एक चम्मच मिश्री को पीसकर मिलाकर रोजाना एक गिलास हल्के गर्म दूध के साथ पीने माँ के दूध में वृद्धि होती है इस चूर्ण का प्रयोग सुबह और शाम के समय प्रयोग करें | इसके आलावा सफेद जीरे में चावल मिलाकर इसकी खीर बनाकर खाने से माँ के दूध में वृद्धि होती है
  • शतावर का चूर्ण गर्भवती महिला यदि अपनी गर्भा अवस्था के समय में प्रयोग करें तो प्रसव होने के बाद माँ के दूध में कमी नहीं होगी | प्रसव होने के बाद भी महिलाओं को शतावर का चूर्ण का प्रयोग करते रहना चाहिए | इस चूर्ण को रोजाना 50 – 50 ग्राम की मात्रा में गाय या भैस के दूध के साथ सेवन करे |इसके रोजाना प्रयोग से माँ के दूध में कमी नहीं होती
  • एक कप पानी में एक चम्मच जीरा मिलाकर भिगो कर रख दे , एक घंटे बाद इसको छानकर पी ले , ऐसा करने से आपके स्तनों के दूध में वर्धि होगी.
  • मटर की सब्जी ज़्यादा खाए, कच्चे मटर खाने से भी दूध में वृद्धि होती हैं।
  • शिशु जन्म के बाद यदि स्त्री के स्तनों से दूध पर्याप्त ना निकले तो उसको उड़द की दाल खिलानी चाहिए।
  • जीरा भूनकर सुबह शाम मिश्री से साथ 1 चम्मच ले।
  • अरहर की दाल में यथेष्टि घी मिलाकर पिलाने से स्त्री के स्तनों में दूध की मात्रा बढ़ जाती हैं।
  • दूध में चने भिगो कर खिलाये।
  • नासपाती, अंगूर, चीकू, पपीता के सेवन से भी स्तनों में दूध की वृद्धि होती हैं।
  • रात को गेंहू भिगो कर रखे दे, सुबह उन्हें हाथो से अच्छी तरह मसल कर गुड के साथ खाए और ऊपर से वह पानी पी ले।

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