Friday, August 16, 2019

बॉडी बनाने के घरेलू उपाय-Home Remedies for Healthy body in Hindi,


बॉडी बनाने के घरेलू उपाय-Home Remedies for Healthy body in Hindi,


पर्सनालिटी तभी आकर्षक लगती है। जब उनका शरीर गठीला और मसल्स मजबूत हो। जिन लोगों की मसल्स मजबूत होती हैं उनका शरीर अपने आप शेप में दिखाई देता है। इसके लिए सिर्फ घंटों जिम में गुजरना ही काफी नहीं है, बल्कि सही डाइट प्लान भी जरूरी होता है।

खानपान पर यदि पूरी तरह से ध्यान दिया जाए तो मसल्स मजबूत होती हैं और शरीर आंतरिक रूप सेताकतवर बन जाता है। आइए आज जानते हैं हम कुछ ऐसी ही  चीजों के बारे में जिनके नियमित सेवन से मसल्स मजबूत हो जाती हैं।

मसल्स को मजबूत बनाने के लिए फल और सब्जियों का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। इनमें विटामिन, मिनरल्स और कई पोषक तत्व व प्रोटीन पाए जाते हैं, जो कि मसल्स को मजबूत बनाते हैं।

2. लो फैट डेयरी उत्पाद

कम फैट वाले डेयरी उत्पादों जैसे दूध, दही, छाछ आदि में प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है। इसीलिए पुरुषों को इनका नियमित सेवन करना चाहिए। एक कप दूध से लगभग 8 मि.ग्रा. कार्निटिन मिलता है। दूध से बनी चीजों में कैल्शियम, विटामिन-ए जैसे आवश्यक पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। इसके अलावा इनमें कार्बोहाइड्रेट और विटामिन डी भी अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं, जिससे मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।

3. ड्राय फ्रूट्स

ड्राय फ्रूट्स और नट्स दोनों में ही भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। पुरुषों को ड्रायफ्रूट्स का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। फिर चाहें तो इन्हें कच्चा खाएं या फिर भूनकर खाएं। इनमें फैट्स रेशे, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जिनसे मसल्स मजबूत होती हैं।

4. अंकुरित अनाज

अंकुरित अनाज पुरुषों की सेहत के लिए बहुत अच्छे होते हैं। यह पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। साथ ही, यह जिंक जैसे पोषक तत्वों का स्रोत हैं, जो पुरुषों में कमजोरी और नपुंसकता की समस्या कम करने में सहायक होते हैं व मसल्स को मजबूत बनाते हैं।

5. मूंगफली

मूंगफली में जिंक के साथ ही भरपूर मात्रा में वसीय अम्ल पाए जाते हैं। ये वसीय अम्ल पुरुषों के लिए फायदेमंद होते हैं। इसके सेवन से पुरुषों में कमजोरी की समस्या दूर हो जाती है।

6. लहसुन

लहसुन का सेवन भी पुरुषों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है। लहसुन में एंटी-बैक्टीरियल और एंटीवायरल तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। साथ ही, इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी मौजूद होते हैं। यह परिसंचरण तंत्र को भी स्वस्थ बनाता है।

7. ब्रॉकली

ब्रॉकली खाने के भी चमत्कारिक लाभ हैं। इसमें पाया जाने वाला आइसोथायोसाइनेट्स यकृत को उत्तेजित करता है। यह उन एन्जाइम्स के निर्माण में सहायता करता है, जो कैंसर उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं के प्रभाव को कम करते हैं। इसमें विटामिन-सी भी मौजूद होता है। इसीलिए इसे पुरुषों की सेहत के लिए बेहतरीन औषधि माना गया है। 

8. तुलसी टी

तुलसी टी का सेवन भी पुरुषों के लिए बहुत अच्छा होता है।तुलसी पत्ते में ओसियाम प्रचूर मात्रा में पाया जाता है। यह कैंसर होने से रोकता है।तुलसी टी रोजाना पीने से पेट, फेफड़ों व आंतों की बीमारियां दूर होती हैं।

9. आम और पपीता

आम और पपीता, दोनों में ही भरपूर मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है। आम में अमीनों अम्ल, विटामिन ए, सी और ई, नियासिन, बिटाकेरोटिन, आयरन, कैल्शियम और पोटैशियम पाया जाता है। वहीं, पपीता में पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी व सी के साथ ही एंटीआक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं। इन दोनों फलों के छिलकों में बायोफ्लैवेनॉइड्स पाया जाता है। इसीलिए यह फल पुरुषों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

10. शिमला मिर्च

शिमला मिर्च भी पुरुषों के लिए फायदेमंद होती है। कुछ शोधों के अनुसार लाल शिमला मिर्च में संतरे के रस के मुकाबले तीन गुना ज्यादा विटामिन सी पाया जाता है। वैज्ञानिकों की मानें तो फ्लैवोनॉइड्स के लिए लाल शिमला मिर्च प्रभावी विकल्प है। फ्लैवोनॉइड्स पुरुषों को सेहतमंद बनाता है।

11. टमाटर

टमाटर में लाइकोपीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। लाइकोपीन पौधों में पाया जाने वाला एक प्राकृतिक रासायनिक पदार्थ है। यह रासायनिक पदार्थ अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाना जाता है। यह प्रॉस्ट्रेट, फेफड़े और पेट के कैंसर को खत्म करता है। साथ ही, चेहरे की लालिमा और चमक भी बढ़ाता है

12.अनार

पुरुषों को अनार का जूस अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। रोजाना एक गिलास अनार का जूस पीने से पुरुषों को प्रोस्टेट की समस्या नहीं होती है।

13. रागी

रागी कैल्शियम का सबसे बढिय़ा स्रोत है। यह पुरुषों को ऑस्टियोपोरेसिस से बचाता है। साथ ही, यह जिंक तथा रेशे का भी अच्छा स्रोत है। इसके नियमित सेवन से डिसलिपिडीमिया, डायबिटीज और मोटापे से बचा जा
सकता है।

कद्दू भी पुरुषों के लिए लाभदायक होता है। इसमें रेशे, विटामिन, खनिज और कई स्वास्थ्यवर्धक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसके इन्ही गुणों के कारण इसके नियमित सेवन से ताउम्र स्किन जवां बनी रहती है।

15. सोया

सोया में मौजूद आइसोफ्लैवोन्स प्रॉस्ट्रेट की रक्षा करते हैं। यह प्रॉस्ट्रेट कैंसर के खतरे को कम करते हैं। रोजाना 25 ग्राम सोया प्रोटीन के सेवन से कोलेस्ट्रॉल स्तर को भी कम किया जा सकता है।


व्यायाम : आप यौगिक व्यायाम कीजिये. यौगिक व्यायाम का मतलब उस व्यायाम से है जिनमे आपकी एक से अधिक मांसपेशियाँ और एक से अधिक जोड़ उपयोग में आते हो. यौगिक व्यायाम को मांसपेशियों के लिए बहुत ही उपयुक्त माना गया है. साथ ही आपको सुबह सुबह जल्दी उठ कर खाली पेट भी व्यायाम करना चाहिए.

एंजाइम : ये आपके खाने को पचाने का कार्य करते है. शरीर का वजन बढ़ाने के लिए आप अधिक कैलरी लेने के लिए अच्छा आहार खाओगे और अधिक आहार लोगे ताकि आपकी मांसपेशियों में अधिक वृद्धि हो. ऐसी स्थिति में आपका पाचनतंत्र उस गति से काम नही कर पाता कि इतने सारे आहार को आप ग्रहण कर पाओ, किन्तु अगर आप एंजाइम को ले रहे हो तो ये आपके पाचनतंत्र की शक्ति को बढ़ाता है और आप जी भर कर आहार ग्रहण कर पाते हो.

Monday, August 12, 2019

सफ़ेद दाग का लक्षण और उपचार -White Spot on Skin Treatment in Hindi,

सफ़ेद दाग रोग ऐसा हैं कि जिसको एक बार हो जाए तो वो व्यक्ति हीनभावना से तो ग्रसित हो जाता हैं परंतु इलाज के नाम से बहुत ठगा जाता हैं। लोग बढ़ चढ़ कर सही करने का दावा तो करते हैं। परंतु हासिल कुछ नहीं होता। सफ़ेद दाग का उपचार कुछ सालो पहले आयुर्वेद में बहुत आसान था, जब कुछ भस्मों से इसका उपचार योग्य वैद कर दिया करते थे, आज कल भस्मो का सही मिश्रण, सही अनुपात व जानकारी ना होने के कारण इस रोग का सही उपचार नहीं हो पाता। आयुर्वेद में जो उपचार हैं वह थोड़े लम्बे हैं । इसलिए मरीज को धैर्यपूर्वक इसको लगातार जारी रखना पड़ता हैं। हम यहाँ आपको कुछ विशेष उपचार बता रहे हैं, जो बहुत से रोगियों पर सफलता से प्रयोग किया गए हैं।

सफ़ेद दाग  का उपचार Spots On The Skin,vitiligo cure,vitiligo causes,what causes vitiligo,

  • बावची का तेल और नीम का तेल सामान मात्रा में मिला कर रोग वाली जगह दिन में २ बार लगाना चाहिए और इसके साथ बावची का चूर्ण, तुलसी के पत्तों को सुखा कर बनाया गया चूर्ण और चोपचीनी का चूर्ण समान मात्रा में मिला कर हर रोज़ 3 ग्राम सुबह शाम सादा पानी के साथ ले। और ये चूर्ण लेने के दो घंटे पहले और बाद में कुछ ना खाए। साथ में रात को सोते समय एक चम्मच त्रिफला गुनगुने पाने के साथ ले।
  • सुबह खाली पेट गेंहू के जवारे का रस ज़रूर पिए। आपका ये चर्म रोग कुछ दिनों में गायब हो जायेगा। इसके साथ लौकी का जूस भी सुबह खाली पेट पिए, और इस जूस को बनाते समय इसमें 5-5 पत्ते तुलसी और पुदीने के भी डाल ले।
  • बावची एक ऐसी औषधि है, जिस से आजकल की आधुनिक सफ़ेद दाग की औषधियां भी बनायीं जाती हैं।
  • आठ लीटर पानी में आधा किलो हल्दी का पावडर मिलाकर तेज आंच पर उबालें। जब 4 लीटर के करीब रह जाय तब उतारकर ठंडा करलें । फ़िर इसमें आधा किलो सरसों का तेल मिलाकर पुन: आंच पर रखें। जब केवल तैलीय मिश्रण ही बचा रहे, इसको आंच से उतारकर बडी शीशी में भरले। यह दवा सफ़ेद दाग पर दिन में दो बार लगावें। 4-5 माह तक ईलाज चलाने पर आश्चर्यजनक अनुकूल परिणाम प्राप्त होते हैं।
  • बावची के बीज इस बीमारी की प्रभावी औषधि मानी गई है। 50 ग्राम बीज पानी में 3 दिन तक भिगोवें। पानी रोज बदलते रहें। बीजों को मसलकर छिलका उतारकर छाया में सूखा कर पीस कर पावडर बनालें। यह दवा डेढ ग्राम प्रतिदिन पाव भर दूध के साथ पियें। इसी चूर्ण को पानी में मिलकर पेस्ट बना लें। यह पेस्ट सफ़ेद दाग पर दिन में दो बार लगावें। अवश्य लाभ होगा। दो माह तक ईलाज चलावें।
  • बावची के बीज और ईमली के बीज बराबर मात्रा में लेकर चार दिन तक पानी में भिगोवें। बाद में बीजों को मसलकर छिलका उतारकर सूखा लें। पीसकर महीन पावडर बनावें। इस पावडर की थोडी सी मात्रा लेकर पानी के साथ पेस्ट बनावें। यह पेस्ट सफ़ेद दाग पर एक सप्ताह तक लगाते रहें। बहुत ही कारगर उपचार है।लेकिन यदि इस पेस्ट के इस्तेमाल करने से सफ़ेद दाग की जगह लाल हो जाय और उसमें से तरल द्रव निकलने लगे तो ईलाज कुछ रोज के लिये रोक देना उचित रहेगा।
  • लाल मिट्टी बरडे- ठरडे और पहाडियों के ढलान पर अक्सर मिल जाती है। लाल मिट्टी और अदरख का रस बराबर मात्रा में लेकर घोटकर पेस्ट बनालें। यह दवा प्रतिदिन सफ़ेद दाग के पेचेज पर लगावें। लाल मिट्टी में तांबे का अंश होता है जो चमडी के स्वाभाविक रंग को लौटाने में सहायता करता है और अदरख का रस सफ़ेद दाग की चमडी में खून का प्रवाह बढा देता है।
  • श्वेत कुष्ठ रोगी के लिये रात भर तांबे के पात्र में रखा पानी प्रात:काल पीना भी काफी फ़ायदेमंद होता है।
  • मूली के बीज करीब 30 ग्राम सिरके में घोटकर पेस्ट बनावें और दाग पर लगाते रहने से लाभ होता है।
  • एक मुट्ठी काले चने, 125 मिली पानी में डाल दे सुबह, उसमे 10 गरम त्रिफला चूर्ण डाल दे, 24 घंटे वो पड़ा रहे …ढक के रह दे … 24 घंटे बाद वो चने जितना खा सके चबाकर के खाये…. सफ़ेद दाग जल्दी मिटते है |
  • रोज बथुये की सब्जी खायें। बथुआ उबाल कर उसके पानी से सफेद दाग को धोयें। कच्चे बथुआ का रस दो कप निकाल कर आधा कप तिल का तेल मिलाकर धीमी आंच पर पकायें । जब सिर्फ तेल रह जाये तब उतार कर शीशी में भर लें। इसे लगातार लगाते रहें। ठीक होगा परंतु धैर्य की जरूरत है।
  • अखरोट खूब खायें। इसके खाने से शरीर के विषैले तत्वों का नाश होता है। अखरोट का पेड़ अपने आसपास की जमीन को काली कर देती है ये तो त्वचा है। अखरोट खाते रहिये लाभ होगा।
  • लहसुन के रस में हरड घिसकर लेप करें तथा लहसुन का सेवन भी करते रहने से दाग मिट जाता है।
  • तुलसी का तेल सफेद दाग पर लगायें।
  • नीम की पत्ती, फूल, निंबोली सबको सुखाकर पीस लें । प्रतिदिन एक चम्मच ताजा पानी के साथ लें। कोई भी कुष्ठ रोग का इलाज नीम से सर्व सुलभ है। सफेद दाग वाला व्यक्ति नीम तले जितना रहेगा उतना ही फायदा होगा नीम खायें, नीम लगायें ,नीम के नीचे सोये ,नीम को बिछाकर सोयें, पत्ते सूखने पर बदल दें।
  • पत्ते,निम्बोली, छाल किसी का भी रस लगायें व एक चम्मच पियें। इसकी पत्तियों को जलाकर पीस कर उसकी राख इसी नीम के तेल में मिलाकर घाव पर लेप करते रहें। नीम की पत्ती, निम्बोली ,फूल पीसकर चालीस दिन तक शरबत पियें तो सफेद दाग से मुक्ति मिल जायेगी। नीम की गोंद को नीम के ही रस में पीस कर मिलाकर पियें तो गलने वाला कुष्ठ रोग भी ठीक हो सकता है।
  • चेहरे के सफ़ेद दाग जल्दी ठीक हो जाते हैं। हाथ और पैरो के सफ़ेद दाग ठीक होने में ज्यादा समय लेते है। ईलाज की अवधि 6 माह से 2 वर्ष तक की हो सकती है।
  • मांस, मछ्ली अंडा, डालडा घी या वनस्पति तेल, लाल मिर्च, शराब, नशीली चीजे, अचार, खटाई, अरबी-भिन्डी, चावल आदि का परहेज करे। नमक कम खाएं।

एवोकाडो के फायदे,Avocado Health Benefits in Hindi,

एवोकैडो मूल रूप से अमेरिकी महाद्वीप से आया यह फल भारत में मखनफल के नाम से मिलता है । इस फल में विटामिन ई भरपूर मात्रा में होता है । एवोकैडो में एंटी-आॅक्सीडेंटस भी होते हैं जो त्वचा की सुरक्षा करती है । एवोकैडो आपकी स्किन की कोशिकाओं को दोबारा बनने में मदद करता है और इससे आपकी त्वचा को जवां और ताजा लुक मिलता है । एवोकैडो देवभूमि उत्तराखंड में बटरफ्रूट नाम से जाना जाता है । वास्तव में ये ऐसे वृक्ष हैं जिनके फल का गूदा मक्खन की तरह डबलरोटी में लगा कर खाया जाता है । यह पौधा वर्ष 1950 में मैक्सिको से लाया गया था जो कि बागेश्वर और जौलीकोट (नैनीताल) में लगाए गए । यह पौधा 3 से 6 हजार फीट की ऊंचाई पर लगता है और इसमें फल 5 से 6 साल में आते हैं । 

आइए जानते है ऐवकाडो से होने वाले कुछ स्वास्थ्य लाभ के बारे में, Health Benefits of Avocados

  • मखनफल (एवोकैडो) मूल रूप से अमेरिकी महाद्वीप से आया यह फल भारत में मखनफल के नाम से मिलता है । इस फल में विटामिन ई भरपूर मात्रा में होता है एवोकैडो में एंटी-आॅक्सीडेंटस भी होते हैं जो त्वचा की सुरक्षा करती है । एवोकैडो आपकी त्वचा की कोशिकाओं को दोबारा बनने में मदद करता है और इससे आपकी त्वचा को जंवा और ताजा लुक मिलता है ।
  • बेजोड़ है एवोकैडो - इसमें कुदरती एंटी इन्लैमटरी तत्व होते हैं, जो जलन कम करते हैं । इसमें विटामिंस और पोषक तत्व भी होते है। 1-2 एवोकैडो को काटकर बीच वाला हिस्सा (गूदा) मसल लें । इसमें थोड़ा आॅलिव आॅयल और ऐलोवेरा जेल मिलाकर लगाएं । तब तक लगा रहने दें जब तक कि इसका रंग बदल न जाए । फिर त्वचा को गीला करके गीली रूई से हलके से साफ करें । अब ठंडे पानी से धो लें ।
  • एवोकैडो यानि रूचिरा नामक पहाड़ी फल के सेवन से कामेच्छा बढ़ाने में मदद मिलती है । 
  • इसमें फोलिक एसिड, प्रोटीन, विटामिन बी 6 और पोटैशियम अच्छी मात्रा में है जो सेक्स पावन बढ़ाने और ऊर्जा देने में मददगार है । इसका नियमित सेवन महिलाओं में फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए भी फायदेमंद है ।
  • एवोकैडो यानि रूचिरा नामक पहाड़ी फल के सेवन से कामेच्छा बढ़ाने में मदद मिलती है इसमें फोलिक एसिड, प्रोटीन, विटामिन बी 6 और पोटैशियम अच्छी मात्रा में है जो सेक्स पावर बढ़ाने और ऊर्जा देने में मददगार है । इसका नियमित सेवन महिलाओं में फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए भी फायदेमंद है 
  • डायबिटीज और रक्तचाप से पीड़ित मरीजों के लिए भी यह बेहद लाभदायक है 
  • रूचिरा या मक्खन फल या एवोकैडो कैरिबियाई क्षेत्र से संबंधित एक फल है । अगर स्त्री हते में एक बार एक एवोकैडो खाती है तो उसके हार्मोंस संतुलित रहते हैं, गर्भपात नहीं होता और सर्विक्स कैंसर का भी खतरा नहीं होता है । 
  • एक एवोकैडो में 14000 से भी अधिक फोटोलिटिक केमिकल होेते हैं । इतने पौष्टिक तत्वों से पूर्ण होने के कारण यह शरीर की रोग प्रतिरोध क्षमता को भी बढ़ाने में मदद करता है । एवोकैडो 10 या 12 मीटर के रूप में उच्च तक पहुँच जाता है जो एक बारहमासी पौधा है । 
  • एवोकैडो फल, अंडाकार गोलाकार या अंडाकार लम्बी एक डूररूप् मांसल, नाशपाती के आकार है इसका रंग हल्के या गहरे हरे , बैंगनी या काला हो सकता है । एवोकैडो विटामिन ई, ए, बी1, बी3, डी और जैसे लोहा, फास्फोरस और मैग्नीशियम के साथ ही फोलिक एसिड, नियासिन और बायोटिन के रूप में एक हद तक कम सी, खनिज के लिए होता है । 

  • एवोकैडो का औषधीय मूल्य है इसका तेल निष्कर्णण, शैम्पू, और सौंदर्य प्रसाधन, क्रीम और त्वचा कलीन्जर के कच्चे माल में उपयोग किया जाता है । एवोकैडो पेड़ ठंड के प्रति संवेदनशील होता है । पेड़ों में फूल दिसम्बर से मार्च और सबसे ज्यादा फूल अगस्त से अक्टूबर में लगते हैं । फल नियमित रूप से गोल या नाशपाती के आकार रहे हैं । 
  • घरेलू उपाय जो गंजेपन को दूर भगाये - एवोकैडो और नारियल के दूध के इस्तेमाल से बालों का झड़ना बंद होता है और नए बाल आने लगते हैं । इसके लिए एवोकैडो, नारियल के दूध और नीबू के रस को मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें । अब इस मिश्रण को बालों की जड़ों में मालिश करंे और लगभग आधे घंटे के लिए छोड़ दें । एक हल्के शैम्पू का उपयोग कर अपने बालों को धो लें । फायदा होगा ।
  • नाशपाती के समान दिखने वाले रूचिरा या एवोकाडो को पहले सब्जी की प्रजाति का मानते थे पर यह एवोकाडो फल की श्रेणी में आता है और स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी फायदेमंद है । 
  • इस फल में प्रोटीन, रेशे, नियासिन, थाइमिन, राइबोफलेविन, फोलिक एसिड और जिंक जैसे तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं । ऐवोकाडो में कोलेस्टोल की मात्रा बिलकुल नहीं पाई जाती है इसलिए कहावत ‘‘ एवोकाडो ए डे ’’ कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी । 
  • एवोकाडो को लम्बाई में काट कर बीच का गूदा चम्मच से निकाल कर उसे टमाटर, प्याज और लहसुन के साथ मिलाकर सेंडविच बनाकर खा सकते हैं । एवोकाडो में ऐसी वसा होती है जो शरीर के लिए आवश्यक होता है । 
  • इसका जूस पीने से आपका पेट पूरे दिन भरा रहेगा और आप ओवर ईटिंग नहीं करेंगें । एवोकाडो में काफी मात्रा में कैलोरी पाई जाती है, जो हृदय के रोगों से हमें बचाती है । इसमें कोलेस्टोल की मात्रा बिल्कुल नहीं पाई जाती । एवोकाडो इसमें अच्छी मात्रा में फैट पाया जाता है दिमाग तक ब्लड फ्लो को तेज करता है ।

साईटिका का उपचार-Home Remedies for Sciatica in Hindi


How to Cure Sciatica


साईटिका में होने वाला दर्द, स्याटिक नर्व के कारण होता है। यह दर्द सामान्यत: पैर के निचले हिस्से की तरफ फैलता है। ऐसा दर्द स्याटिक नर्व में किसी प्रकार के दबाव, सूजन या क्षति के कारण उत्पन्न होता है। इसमें चलने-उठने-बैठने तक में बहुत तकलीफ होती है। यह दर्द अकसर लोगों में 30 से 50 वर्ष की उम्र में होता है

साईटिका रोग होने का कारण:-

  • जब किसी व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी में चोट लग जाती है तो उसे यह रोग हो जाता है।
  • यदि साईटिका नाड़ी के पास विजातीय द्रव (दूषित द्रव) जमा हो जाता है तो नाड़ी दब जाती है जिसके कारण साईटिका रोग हो जाता है। 
  • रीढ़ की हड्डी के निचले भाग में आर्थराइटिस रोग हो जाने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
  • असंतुलित भोजन का सेवन करने तथा गलत तरीके के खान-पान से भी यह रोग हो जाता है।
  • रात के समय में अधिक जागने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
  • अधिक समय तक एक ही अवस्था में बैठने या खड़े रहने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
  • अपनी कार्य करने की क्षमता से अधिक परिश्रम करने के कारण या अधिक सहवास करने के कारण भी यह रोग हो सकता है। 

साईटिका का लक्षण

कमर के निचले हिस्से मेँ दर्द के साथ जाँघ व टांग के पिछले हिस्से मेँ दर्द। पैरोँ मेँ सुन्नपन के साथ मांसपेशियोँ मेँ कमजोरी का अनुभव। पंजोँ मेँ सुन्नपन व झनझनाहट। पैदल चलने में परेशानी।
सर्जरी या वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति से हो सकती है। साईटिका नर्व (नाड़ी) शरीर की सबसे लंबी नर्व होती है। यह नर्व कमर की हड्डी से गुजरकर जांघ के पिछले भाग से होती हुई पैरोँ के पिछले हिस्से मेँ जाती है। जब दर्द इसके रास्ते से होकर गुजरता है, तब ही यह साईटिका का दर्द कहलाता है।

साईटिका का उपचार-Best Treatment for Sciatica at home,How to Cure Sciatica

  • आलू का रस 300 ग्राम नित्य २ माह तक पीने से साईटिका रोग नियंत्रित होता है। इस उपचार का प्रभाव बढाने के लिये आलू के रस मे गाजर का रस भी मिश्रित करना चाहिये।
  • लहसुन की खीर इस रोग के निवारण में महत्वपूर्ण है। 100 ग्राम दूध में 4-5 लहसुन की कली चाकू से बारीक काटकर डालें। इसे उबालकर ठंडी करके पीलें। यह विधान 2-3 माह तक जारी रखने से साईटिका रोग को उखाड फ़ैंकने में भरपूर मदद मिलती है। 
  • लहसुन में एन्टी ओक्सीडेन्ट तत्व होते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखने हेतु मददगार होते है । हरे पत्तेदार सब्जियों का भरपूर उपयोग करना चाहिये। कच्चे लहसुन का उपयोग साईटिका रोग में अत्यंत गुणकारी है। सुबह शाम 2-3 लहसुन की कली पानी के साथ निगलने से भी फायदा होता है। हरी मटर, पालक, कलौंजी, केला, सूखे मेवे ज्यादा इस्तेमाल करें। 
  • साईटिका रोग को ठीक करने में नींबू का अपना महत्व है। रोजाना नींबू के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर पीने से आशातीत लाभ होता है। 
  • सरसों के तेल में लहसुन पकालें। दर्द की जगह इस तेल की मालिश करने से तुरंत आराम लग जाता है।
  • लौह भस्म 20 ग्राम+विष्तिंदुक वटी 10 ग्राम+रस सिंदूर 20 ग्राम+त्रिकटु चूर्ण 20 ग्राम इन सबको अदरक के रस के साथ घोंटकर 250 गोलियां बनालें। दो-दो गोली पानी के साथ दिन में तीन बार लेते रहने से साईटिका रोग जड़ से समाप्त हो जाता है। 
  • प्रतिदिन सामान्य व्यायाम करेँ। वजन नियंत्रण मेँ रखेँ। पौष्टिक आहार ग्रहण करेँ। रीढ़ की हड्डी को चलने-फिरने और उठते-बैठते समय सीधा रखेँ। भारी वजन न उठाएं।
  •  रोगी को प्रतिदिन अपने पैरों पर सरसों के तेल से नीचे से ऊपर की ओर मालिश करनी चाहिए। इससे यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। 
  • 5 कालीमिर्चों को तवे पर सेंककर कर सुबह के समय में खाली पेट मक्खन के साथ सेवन करना चाहिए। इस प्रयोग को प्रतिदिन करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
  • करेला, लौकी, टिण्डे, पालक, बथुआ तथा हरी मेथी का अधिक सेवन करने से साईटिका रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है। 
  • इस रोग से पीड़ित रोगी को पपीते तथा अंगूर का अधिक सेवन करना चाहिए। इससे यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
  • सूखे मेवों में किशमिश, अखरोट, अंजीर, मुनक्का का सेवन करने से भी यह रोग कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। 
  • फलों का रस दिन में 3 बार तथा आंवला का रस शहद के साथ मिलाकर पीने से साईटिका रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। 
  • इस रोग को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को सबसे पहले एनिमा क्रिया करके अपने पेट को साफ करना चाहिए। इसके बाद रोगी को अपने पैरों पर मिट्टी की पट्टी का लेप करना चाहिए। इसके बाद रोगी को कटिस्नान करना चाहिए और फिर इसके बाद मेहनस्नान करना चाहिए। इसके बाद कुछ समय के लिए पैरों पर गर्म सिंकाई करनी चाहिए और गर्म पाद स्नान करना चाहिए। इस प्रकार से उपचार करने से साईटिका रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। 
  • सुबह के समय में सूर्यस्नान करने तथा इसके बाद पैरों पर तेल से मालिश करने और कुछ समय के बाद रीढ़ स्नान करने तथा शरीर पर गीली चादर लपेटने से साईटिका रोग ठीक हो जाता है।
    सूर्यतप्त लाल रंग की बोतल के तेल की मालिश करने से तथा नारंगी रंग की बोतल का पानी कुछ दिनों तक पीने से साईटिका रोग ठीक हो जाता है। 
  • तुलसी के पत्तों को पीसकर पानी में मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से यह रोग ठीक हो जाता है।
    हार-सिंगार के पत्तों का काढ़ा सुबह के समय में प्रतिदिन खाली पेट पीने से साईटिका रोग ठीक हो जाता है 

Monday, August 05, 2019

गर्भवती महिला को क्या नहीं खाना चाहिए,What to not eat in Pregnancy in Hindi

गर्भवती महिला को क्या नहीं खाना चाहिए।,WHAT TO NOT EAT IN PREGNANCY IN HINDI !

किसी महिला को मां के दर्जे तक पहुंचाने वाले नौ महीने बेशकीमती होते हैं। इन नौ महीनों में वह क्या सोचती है, क्या खाती है, क्या करती है, क्या पढ़ती है, ये तमाम चीजें मिलकर आनेवाले बच्चे की सेहत और पर्सनैलिटी तय करती हैं। इन नौ महीनों को अच्छी तरह प्लान करके कैसे मां एक सेहतमंद जिंदगी को जीवन दे सकती है

गर्भावस्‍था में क्‍या खाए जाए से जरूरी यह जानना है कि क्‍या न खाया जाए। घर-परिवार की बुजुर्ग महिलाएं अपने अनुभव के आधार पर यह राय देती रहती हैं। चलिए जानते हैं कि गर्भावस्‍था में कौन सी सब्‍जियों और फलों से परहेज करना चाहिए। आइये जानें, गर्भवस्‍था के दौरान कौन-कौन से फल और सब्जियां ना खाएं।
  • गर्भावस्था के दौरान इन चीजों के सेवन बचें :-बिना धुले हुए फल और सब्जियां ना खाये :- गर्भावस्था के दौरान पके हुए खाद्य पदार्थ खाएं। कच्चे और बिना पके खाद्य पदार्थ न खाएं। फल और सब्जियां तथा ऐसे खाद्य पदार्थ जिन्हें खाने से पहले धोने की आवश्यकता होती है, उन्हें बिना धोएं न खाएं।
  • कॉफ़ी, चाय और शराब से दूर रहे :- प्रसव के दौरान जटिलताओं से तथा भ्रूण में जन्म दोष से बचने के लिए गर्भावस्था के दौरान चाय, कॉफ़ी और शराब के सेवन से बचें। इन तीन पेय पदार्थों के अत्याधिक सेवन से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।
  • पपीता ना खाये :- कोशिश करें कि गर्भावस्था के दौरान पपीता ना खाए। पपीता खाने से प्रसव जल्दी होने की संभावना बनती है। पपीता, विशेष रूप से अपरिपक्व और अर्द्ध परिपक्व लेटेक्स जो गर्भाशय के संकुचन को ट्रिगर करने के लिए जाना जाता है को बढ़ावा देता है। गर्भावस्था के तीसरे और अंतिम तिमाही के दौरान पका हुआ पपीता खाना अच्छा होता हैं। पके हुए पपीते में विटामिन सी और अन्य पौष्टिक तत्वों की प्रचुरता होती है, जो गर्भावस्था के शुरूआती लक्षणों जैसे कब्ज को रोकने में मदद करता है। शहद और दूध के साथ मिश्रित पपीता गर्भवती महिलाओं के लिए और विशेष रूप से स्तनपान करा रही महिलाओं के लिए एक उत्कृष्ट टॉनिक होता है।
  • अनानास ना खाये :- गर्भावस्था के दौरान अनानस खाना गर्भवती महिला के स्‍वास्‍थ्‍ा के लिए हानिकारक हो सकता है। अनानास में प्रचुर मात्रा में ब्रोमेलिन पाया जाता है, जो गर्भाशय ग्रीवा की नरमी का कारण बन सकती हैं, जिसके कारण जल्‍दी प्रसव होने की सभांवना बढ़ जाती है। हालांकि, एक गर्भवती महिला अगर दस्त होने पर थोड़ी मात्रा में अनानास का रस पीती है तो इससे उसे किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। वैसे पहली तिमाही के दौरान इसका सेवन ना करना ही सही रहेगा, इससे किसी भी प्रकार के गर्भाशय के अप्रत्याशित घटना से बचा जा सकता है।
  • अंगूर का सेवन ना करे :- डॉक्‍टर गर्भवती महिलाओं को उसके गर्भवस्‍था के अंतिम तिमाही में अंगूर खाने से मना करते है। क्‍योंकि इसकी तासिर गरम होती है। इसलिए बहुत ज्‍यादा अंगूर खाने से असमय प्रसव हो सकता हैं। कोशिश करें कि गर्भावस्था के दौरान अंगूर ना खाए।
  • पारा यानी कि मरक्युरी बच्चे के मस्तिष्क के विकास में विलंब पैदा करता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान पारा युक्त मछली के सेवन से बचना चाहिए।
  • गर्भावस्था के दौरान भारतीय महिलाओं को पपीता का सेवन करने से मना किया जाता है, खासकर के अगर पपीता कच्चा या अधपका हो।
  • बैंगन, मिर्ची, प्याज, लहसुन, हिंग, बाजरा, गुड़ का सेवन कम से कम मात्रा में करना चाहिए, खासकर के उनको जिनका किसी न किसी कारण से पहले गर्भपात हो चुका है।
  • पिसे हुए मसालेदार मांस का सेवन करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि उसमे हानिकारक जीवाणुओं का समावेश हो सकमीट
  • कच्‍चा या अधपका मीट खाने से गर्भावस्‍था के शुरूआती दिनों में बचना चाहिये। बेहतर होगा कि गर्भावस्‍था के दिनों में आप मीट को अच्‍छी तरह पकाकर खाएं। गर्भावस्‍था में प्रॉन मीट खाने से बचना चाहिये।
  • डिब्बा बंद भोजन और अचार के रूप में, लंबी अवधि के भंडारण के लिए करना है कि खाना नहीं खाते।डिब्बाबंद।स्टू, मछली और सब्जी के विभिन्न प्रकार इसकी संरचना में बरकरार रखता सिरका या अन्य परिरक्षकों है।भ्रूण के विकास पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है गर्भवस्था के समय हर महिला को अपने खानपान से लेकर हर छोटी सी बड़ी चीजों का बड़ा ध्यान रखना होता है इसके लिए जरूरी होता है कि क्या खाएं और क्या न खाएं इसका भी बहुत ही खास ध्यान रखना होता है।
  • जी हां एक शोध के अनुसार पता चला है कि जो महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान आलू का सेवन ज्यादा करती है उनको मधुमेह होने की संभावना बढ़ जाती है। तो ऐसे समय आप आलू की जगह और दूसरी सब्जियों का सेवन करना शुरू कर दें।

Monday, July 15, 2019

हाई बीपी को काबू करने के प्रभावशाली घरेलू उपाय,Blood Pressure Treatment in Hindi

ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए घरेलू उपाय,Monitoring Blood,best blood pressure re monitor, Blood Pressure Treatment

वर्तमान समय में ब्लड प्रेशर के पेशेन्ट्स पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहे हैं। दौड़ती - भागती जिंदगी, फॉस्ट फूड और अनियमित दिनचर्या के कारण यह बीमारी भारत में भी फैल रही है। ब्लड प्रेशर से दिल की बीमारी, स्ट्रोक और गुर्दे की बीमारी होने का भी खतरा रहता है। इस बीमारी के रोगी को रोज दवा खानी पड़ती है। यदि आपके साथ भी ये समस्या है तो पारंपरिक चीजों का उपयोग करें। आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसी ही सामान्य चीजों के बारे में जिनके नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर हमेशा कंट्रोल में रहता है। Blood Pressure Treatment
  • लहसुन एक ऐसी औषधि है, जो ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए अमृत के समान है। लहसुन में एलिसीन होता है, जो नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को बढ़ाता है और मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है। ब्लड प्रेशर के डायलोस्टिक और सिस्टोलिक सिस्टम में भी राहत देता है। यही कारण है कि ब्लड प्रेशर के मरीजों को रोजाना खाली पेट एक लहसुन की कली निगलने की सलाह दी जाती है। 
  • आंवला -रोजाना आंवला खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। आंवला में विटामिन सी होता है। यह ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करता है और कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल में रखता है। 
  • मूली-यह एक साधारण सब्जी है। इसे खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। इसे पकाकर या कच्चा खाने से बॉडी को मिनरल्स व सही मात्रा में पोटैशियम मिलता है। यह हाइ-सोडियम डाइट के कारण बढ़ने वाले ब्लड प्रेशर पर भी असर डालता है।
  • तिल का तेल और चावल की भूसी को एक साथ खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। यह हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए भी लाभदायक होता है। माना जाता है कि यह ब्लड प्रेशर कम करने वाली अन्य औषधियों से ज्यादा बेहतर होता है। Blood Pressure Treatment
  • अलसी में एल्फा लिनोनेलिक एसिड काफी मात्रा में पाया जाता है। यह एक प्रकार का महत्वपूर्ण ओमेगा - 3 फैटी एसिड है। कई अध्ययनों में भी पता चला है कि जिन लोगों को हाइपरटेंशन की शिकायत होती है, उन्हें अपने भोजन में अलसी का इस्तेमाल शुरू करना चाहिए। इसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है और इसके सेवन से ब्लड प्रेशर भी कम हो जाता है।
  • इलायची-एक रिसर्च के अनुसार इलायची के नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर प्रभावी ढंग से कम होता है। इसे खाने से शरीर को एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं। साथ ही, ब्लड सर्कुलेशन भी सही रहता है।
  • प्याज के नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है। इसमें क्योरसेटिन होता है। यह एक ऐसा ऑक्सीडेंट फ्लेवेनॉल है, जो दिल को बीमारियों से बचाता है।
  • दालचीनी के सेवन से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। ओहाई के अप्लाइड हेल्थ सेंटर में 22 लोगों पर अध्ययन किया गया। इनमें से आधे लोगों को 250 ग्राम पानी में दालचीनी दी गई, जबकि आधे लोगों को कुछ और दिया गया। बाद में यह पता चला कि जिन लोगों ने दालचीनी का घोल पिया था, उनके शरीर में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा ज्यादा थी और ब्लड सर्कुलेशन भी सही था।
  • नमक ब्लड प्रेशर बढाने वाला प्रमुख कारक है। इसलिए यह बात सबसे महत्‍वपूर्ण है कि हाई बी पी वालों को नमक का प्रयोग कम कर देना चाहिए। 
  • उच्च रक्तचाप का एक प्रमुख कारण होता है रक्त का गाढा होना। रक्त गाढा होने से उसका प्रवाह धीमा हो जाता है। इससे धमनियों और शिराओं में दवाब बढ जाता है। लहसुन ब्लड प्रेशर ठीक करने में बहुत मददगार घरेलू उपाय है। यह रक्त का थक्का नहीं जमने देती है। धमनी की कठोरता में लाभदायक है। रक्त में ज्यादा कोलेस्ट्ररोल होने की स्थिति का समाधान करती है।
  • एक बडा चम्मच आंवले का रस और इतना ही शहद मिलाकर सुबह-शाम लेने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है। 
  • जब ब्लड प्रेशर बढा हुआ हो तो आधा गिलास मामूली गर्म पानी में काली मिर्च पाउडर एक चम्मच घोलकर 2-2 घंटे के फ़ासले से पीते रहें। ब्लड प्रेशर सही करने का बढिया उपचार है।
  • तरबूज के बीज की गिरि तथा खसखस अलग-अलग पीसकर बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें। एक चम्मच मात्रा में प्रतिदिन खाली पेट पानी के साथ लें। Blood Pressure Treatment
  • बढे हुए ब्लड प्रेशर को जल्दी कंट्रोल करने के लिये आधा गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़कर 2-2 घंटे के अंतर से पीते रहें। हितकारी उपचार है।
  • पांच तुलसी के पत्ते तथा दो नीम की पत्तियों को पीसकर 20 ग्राम पानी में घोलकर खाली पेट सुबह पिएं। 15 दिन में लाभ नजर आने लगेगा। हाई ब्लडप्रेशर के मरीजों के लिए पपीता भी बहुत लाभ करता है, इसे प्रतिदिन खाली पेट चबा-चबाकर खाएं।
  • नंगे पैर हरी घास पर 10-15 मिनट चलें। रोजाना चलने से ब्लड प्रेशर नार्मल हो जाता है।
  • सौंफ़, जीरा, शक्‍कर तीनों बराबर मात्रा में लेकर पाउडर बना लें। एक गिलास पानी में एक चम्मच मिश्रण घोलकर सुबह-शाम पीते रहें। पालक और गाजर का रस मिलाकर एक गिलास रस सुबह-शाम पीयें, लाभ होगा।
  • करेला और सहजन की फ़ली उच्च रक्त चाप-रोगी के लिये परम हितकारी हैं।
  • गेहूं व चने के आटे को बराबर मात्रा में लेकर बनाई गई रोटी खूब चबा-चबाकर खाएं, आटे से चोकर न निकालें। Blood Pressure Treatment
  • ब्राउन चावल उपयोग में लाए। इसमें नमक, कोलेस्टरोल और चर्बी नाम मात्र की होती है। यह उच्च रक्त चाप रोगी के लिये बहुत ही लाभदायक भोजन है।
  • प्याज और लहसुन की तरह अदरक भी काफी फायदेमंद होता है। बुरा कोलेस्ट्रोल धमनियों की दीवारों पर प्लेक यानी कि कैल्‍शियम युक्त मैल पैदा करता है जिससे रक्त के प्रवाह में अवरोध खड़ा हो जाता है और नतीजा उच्च रक्तचाप के रूप में सामने आता है। अदरक में बहुत हीं ताकतवर एंटीओक्सीडेट्स होते हैं जो कि बुरे कोलेस्ट्रोल को नीचे लाने में काफी असरदार होते हैं। अदरक से आपके रक्तसंचार में भी सुधार होता है, धमनियों के आसपास की मांसपेशियों को भी आराम मिलता है जिससे कि उच्च रक्तचाप नीचे आ जाता है।
  • तीन ग्राम मेथीदाना पावडर सुबह-शाम पानी के साथ लें। इसे पंद्रह दिनों तक लेने से लाभ मालूम होता है। 

फाइलेरिया के कारण लक्षण और उसके घरेलू उपाय,What is Filaria in Hindi,

फाईलेरिया रोग का इलाज संभव है। अगर इसका इलाज प्रारंम्भिक अवस्था में हो जाय तो संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। फाइलेरिया रोग में अकसर हाथ या पैर बहुत ही ज़्यादा सूज जाते हैं। इसलिए इस रोग को हाथी पांव भी कहते हैं। पर फाइलेरिया रोग से पीड़ित हर व्यक्ति के हाथ या पैर नहीं सूजते। यह बीमारी पूर्वी भारत, मालाबार और महाराष्ट्र के पूर्वी इलाकों में बहुत अधिक फैली हुई है।
  • यह कृमिवाली बीमारी है। यह कृमि लसिका तंत्र की नलियों में होते हैं और उन्हें बंद कर देते हैं। क्यूलैक्स मच्छर के काटने से बहुत छोटे आकार के कृमि शरीर में प्रवेश करते हैं। मलेरिया के कीड़ों की तरह यह कीड़े मनुष्यों और मच्छरों दोनों में छूत पैदा करते हैं फाइलेरिया (Lymphatic Filariasis) एक परजीवीजन्य संक्रामक बीमारी है जो धागे जैसे कृमियों से होती है। वैश्विक स्तर पर इसे एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी (Neglected Tropical Disease) माना जाता है। 
  • फाइलेरिया दुनिया भर के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय देशों में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। जिसमें भारत भी शामिल है। विश्व में लगभग 1.3 अरब लोगों को इस बीमारी के संक्रमण का खतरा है और लगभग 12 करोड़ लोग इससे वर्तमान में संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से लगभग 4 करोड़ लोग इस बीमारी की वजह से किसी विकृति का शिकार हो गए हैं या अक्षम हो चुके हैं।
  • फाइलेरिया 2.5 करोड़ से ज्यादा पुरुषों को जननांग के विकार और 1.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को सूजन से प्रभावित कर चुका है। हाथीपांव (Elephantiasis) फाइलेरिया का सबसे सामान्य लक्षण है जिसमें शोफ (Oedema) के साथ चमड़ी तथा उसके नीचे के ऊतक मोटे हो जाते हैं।

क्या हैं फाइलेरिया के लक्षण,filaria symptoms

इस तथ्य का अभी तक सटीक आकलन नहीं किया जा सका है कि संक्रमण के बाद फाइलेरिया के लक्षण प्रकट होने में कितना समय लगता है। हालांकि मच्छर के काटने के 16-18 महीनों के पश्चात बीमारी के लक्षण प्रकट होते हैं। फाइलेरिया के ज्यादातार लक्षण और संकेत वयस्क कृमि के लसीका तंत्र में प्रवेश के कारण पैदा होते हैं
  • कृमि द्वारा ऊतकों को नुकसान पहुंचाने से लसीका द्रव का बहाव बाधित होता है जिससे सूजन, घाव और संक्रमण पैदा होते हैं। पैर और पेड़ू सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले अंग हैं। फाइलेरिया का संक्रमण सामान्य शारीरिक कमजोरी, सिरदर्द, मिचली, हल्के बुखार और बार-बार खुजली के रूप में प्रकट होता है।
  • फाइलेरिया कभी-कभार ही जानलेवा साबित होता है, हालांकि इससे बार-बार संक्रमण, बुखार, लसीका तंत्र में गंभीर सूजन और फेफड़ों की बीमारी ‘ट्रॉपिकल पल्मोनरी इओसिनोफीलिया (Tropical Pulmonary Eosinophilia) हो जाती है। ट्रॉपिकल पल्मोनरी इओसिनोफीलिया के लक्षणों में खांसी, सांस लेने में परेशानी और सांस लेने में घरघराहट की आवाज होती है। लगभग 5 प्रतिशत मामलों में पैरों में सूजन आ जाती है जिसे फ़ीलपांव अथवा हाथीपांव कहते हैं। फाइलेरिया से गंभीर विकृति, चलने-फिरने में परेशानी और लंबी अवधि की विकलांगता हो सकती है।
  • फाइलेरिया के कारण हाइड्रोसील (Hydrocoele) भी हो सकता है। मरीज के वृषणकोष (Scrotum) में सूजन भी आ सकती है जिसे ‘फाइलेरियल स्क्रोटम’ (Filarial scrotum) कहा जाता है। कुछ मरीजों में मूत्र का रंग दूधिया हो जाता है। महिलाओं में वक्ष या बाह्य जननांग भी प्रभावित होते हैं। कुछ मामलों में पेरिकार्डियल स्पेस (हृदय और उसके झिल्लीदार आवरण के बीच की जगह) में भी द्रव जमा हो जाता है।

फाइलेरिया के कौन से कारक जीव

फाइलेरिया, फाइलेरियोडिडिया (Filariodidea) कुल के नेमैटोडों (गोलकृमि) के संक्रमण से होता है। तीन प्रकार के कृमि इस बीमारी को जन्म देते हैं। ये हैं वुचिरेरिया बैंक्राफ्टाई (Wuchereria bancrofti), ब्रुजिया मलाई (Brugia malayi) औरब्रुजिया टिमोरीई (Brugia timori)। वुचिरेरिया बैंक्राफ्टाई इस बीमारी का सबसे सामान्य कारक है जो पूरे विश्व में पाया जाता है।
  • ब्रुजिया मलाई दक्षिण-पश्चिम भारत, चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, फिलिपींस और वियतनाम में पाया जाता है जबकि ब्रुजिया टिमोराई सिर्फ इंडोनेशिया तक ही सीमित है। 
  • वुचिरेरिया बैंक्राफ्टाई में नर कृमि 40 मिलीमीटर लंबा होता है जबकि मादा की लंबाई लगभग 50-100 मिलीमीटर होती है।
  • फाइलेरिया भारत में एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है। यह संक्रामक बीमारी देश के राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, गुजरात, केरल एवं केन्द्र शासित प्रदेशों लक्षद्वीप और अंडमान निकोबार में स्थाई रूप से उभरती रहती है। 
  • भारत में मुख्य तौर पर फाइलेरिया के दो प्रकार के संक्रमण होते हैं, एक वुचिरेरिया बैंक्राफ्टाई से और दूसरा ब्रुजिया मलाई से। वुचिरेरिया बैंक्राफ्टाई के संक्रमण से होने वाला बैंक्रोफ्टियन फाइलेरिया (Bancroftian filaria) भारत में फाइलेरिया के कुल मामलों का लगभग 98 प्रतिशत होता है

कैसे फैलता है फाइलेरिया

  • फाइलेरिया मच्छरों से फैलता है जो परजीवी कृमियों के लिए रोगवाहक का काम करते हैं। 
  • इस परजीवी के लिए मनुष्य मुख्य पोषक है जबकि मच्छर इसके वाहक और मध्यस्थ पोषक हैं। 
  • कृमि प्रभावित क्षेत्रों से लोगों का रोजगार की तलाश में बाहर जाना, शहरीकरण, औद्योगिकीकरण, अज्ञानता, आवासीय सुविधाओं की कमी और स्वच्छता की अपर्याप्त स्थिति से यह संक्रमण फैलता है। 
  • संक्रमण के बाद कृमि के लार्वा संक्रमित व्यक्ति की रक्तधारा में बहते रहते हैं जबकि वयस्क कृमि मानव लसीका तंत्र में जगह बना लेता है। एक वयस्क कृमि की आयु सात वर्ष तक हो सकती है।
  •  संक्रमित मच्‍छर के काटने से इसके कीड़े फैलते है। जब मनुष्‍य बच्‍चा होता है तो आम तौर पर संक्रमण आरंभ हो जाता है। तीन प्रकार के कीड़े होते है जिनके कारण बीमारी फैलती है: Wuchereria bancrofti, Brugia malayi, और Brugia timori. Wuchereria bancrofti यह सबसे सामान्‍य है। यह कीड़ा lymphatic system को नुकसान पहुंचाता है।
  •  रात के समय एकत्रित किए गए खून को, एक प्रकार के सूक्ष्‍मदर्शी के द्वारा देखने पर इस बीमारी का पता चलता है। खून को thick smear के रूप में और Giemsa के साथ दाग के रूप में होना चाहिए।. बीमारी के विरूद्ध एंटीबाडियों हेतु खून की जांच भी की जा सकती है।
  • यह शोथ न्यूनाधिक होता रहता है, परंतु जब ये कृमि अंदर ही अंदर मर जाते हैं, तब लसीकावाहिनियों का मार्ग सदा के लिए बंद हो जाता है और उस स्थान की त्वचा मोटी तथा कड़ी हो जाती है। लसीका वाहिनियों के मार्ग बंद हो जाने से यदि अंग फूल जाएँ, तो कोई भी औषध ऐसी नहीं है जो अवरुद्ध लसीकामार्ग को खोल सके। 
  • कभी कभी किसी किसी रोगी में शल्यकर्म द्वारा लसीकावाहिनी का नया मार्ग बनाया जा सकता है। इस रोग के समस्त लक्षण फाइलेरिया के उग्र प्रकोप के समान होते हैं।

फाइलेरिया का घरेलू इलाज

इलाज बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही शुरु हो जाना चाहिए। याद रखना चाहिए कि हाथों या पैरों की सूजन ठीक करने के लिए हमारे पास कोई भी दवाई नहीं है। डाईइथाइल – कार्बामाज़ीन (DEC) फाइलेरिया की एक दवा है। इसे दो हफ्तों दिया जाना चाहिए। इस दवा से सिर में दर्द, मितली, उल्टी जैसी प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। कभी कभी इससे एलर्जी भी हो जाती है। आप इसके बारे में और अधिक दवाइयों वाले अध्याय में पढ़ सकते हैं।

फाइलेरिया पर नियंत्रण या रोकथाम phayaleriya-check फायलेरिया जॉंच के लिये खून का नमूना रात में लेना पडता है इस बीमारी कृमि के कई एक वाहक इलाज के लिए नहीं पहुँचते। इसलिए संक्रमणग्रस्त इलाकों में सभी की जांच ज़रूरी है। ऐसा न होने पर बीमारी फैलती जाती है। जिन क्षेत्रों में फाइलेरिया की समस्या हो वहॉं खास सर्वे किए जाने ज़रूरी होते हैं। फाइलेरिया के नियंत्रण के लिए रात को खून के आलेप के नमूने इकट्ठे करना, रोकथाम के लिये दवा प्रयोग और बीएचसी छिडकाकर मच्छरों पर नियंत्रण करना जैसे कदम उठाना ज़रूरी है। जिन क्षेत्रों में फाइलेरिया की बीमारी ज़्यादा होती है वहॉं नमक में DEC दवा मिलाना ठीक रहता है। इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि हर व्यक्ति को यह दवा मिल जाए (कम मात्रा में) और इससे सूक्ष्म फाइलेरिया कृमि को मारा जा सकता है।

ये सूक्ष्म फाइलेरिया कृमि खून में घूमते रहते हैं। ऐसा खासकर रात को होता है। क्यूलैक्स मच्छर जब खून चूसता है तो वो इन सूक्ष्म फाइलेरिया को अपने अंदर ले लेता है। और संक्रमण पैदा करने वाले लार्वा के रुप में इनका विकास 10 से 15 दिनों के अंदर होता है। इस अवस्था में मच्छर बीमारी पैदा करने वाला होता है। इस तरह यह चक्र चलता रहता है।

Saturday, July 13, 2019

लीवर की परेशानी का आयुर्वेदिक इलाज Liver Problems In Hindi,



आज कल चारो और लीवर के मरीज हैं, किसी को पीलिया हैं, किसी का लीवर सूजा हुआ हैं, किसी का फैटी हैं, और डॉक्टर बस नियमित दवाओ पर चला देते हैं मरीज को, मगर आराम किसी को मुश्किल से ही आते देखा हैं लीवर हमारे शरीर का सबसे मुख्‍य अंग है, यदि आपका लीवर ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पा रहा है तो समझिये कि खतरे की घंटी बज चुकी है। लीवर की खराबी के लक्षणों को अनदेखा करना बड़ा ही मुश्‍किल है और फिर भी हम उसे जाने अंजाने अनदेखा कर ही देते हैं।

लीवर खराब होने के मुख्य कारण,The main reason for liver failure

लीवर की खराबी होने का कारण ज्‍यादा तेल खाना, ज्‍यादा शराब पीना और कई अन्‍य कारणों के बारे में तो हम जानते ही हैं। हालाकि लीवर की खराबी का कारण कई लोग जानते हैं पर लीवर जब खराब होना शुरु होता है

तब हमारे शरीर में क्‍या क्‍या बदलाव पैदा होते हैं यानी की लक्षण क्‍या हैं, इसके बारे में कोई नहीं जानता। वे लोग जो सोचते हैं कि वे शराब नहीं पीते तो उनका लीवर कभी खराब नहीं हो सकता तो वे बिल्‍कुल गलत हैं।

आप जानते हैं कि मुंह से गंदी बदबू आना भी लीवर की खराबी हो सकती है। हम आपको कुछ परीक्षण बताएंगे जिससे आप पता लगा सकते हैं कि क्‍या आपका लीवर वाकई में खराब है। कोई भी बीमारी कभी भी चेतावनी का संकेत दिये बगैर नहीं आती, इसलिये आप सावधान रहें।

मुंह से बदबू यदि लीवर सही से कार्य नही कर रहा है तो आपके मुंह से गंदी बदबू आएगी। ऐसा इसलिये होता है क्‍योकि मुंह में अमोनिया ज्‍याद रिसता है। लीवर खराब होने का एक और संकेत है कि स्‍किन क्षतिग्रस्‍त होने लगेगी और उस पर थकान दिखाई पडने लगेगी। आंखों के नीचे की स्‍किन बहुत ही नाजुक होती है जिस पर आपकी हेल्‍थ का असर साफ दिखाई पड़ता है।

पाचन तंत्र में खराबी यदि आपके लीवर पर वसा जमा हुआ है और या फिर वह बड़ा हो गया है, तो फिर आपको पानी भी नहीं हजम होगा। त्‍वचा पर सफेद धब्‍बे यदि आपकी त्‍वचा का रंग उड गया है और उस पर सफेद रंग के धब्‍बे पड़ने लगे हैं तो इसे हम लीवर स्‍पॉट के नाम से बुलाएंगे।

यदि आपकी पेशाब या मल हर रोज़ गहरे रंग का आने लगे तो लीवर गड़बड़ है। यदि ऐसा केवल एक बार होता है तो यह केवल पानी की कमी की वजह से हो सकता है। यदि आपके आंखों का सफेद भाग पीला नजर आने लगे और नाखून पीले दिखने लगे तो आपको जौन्‍डिस हो सकता है। इसका यह मतलब होता है कि आपका लीवर संक्रमित है।

लीवर एक एंजाइम पैदा करता है जिसका नाम होता है बाइल जो कि स्‍वाद में बहुत खराब लगता है। यदि आपके मुंह में कडुआहर लगे तो इसका मतलब है कि आपके मुंह तब बाइल पहुंच रहा है। जब लीवर बड़ा हो जाता है तो पेट में सूजन आ जाती है, जिसको हम अक्‍सर मोटापा समझने की भूल कर बैठते हैं।

मानव पाचन तंत्र में लीवर एक म‍हत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। विभिन्‍न अंगों के कार्यों जिसमें भोजन चयापचय, ऊर्जा भंडारण, विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलना, डिटॉक्सीफिकेशन, प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन और रसायनों का उत्‍पादन शामिल हैं। लेकिन कई चीजें जैसे वायरस, दवाएं, आनुवांशिक रोग और शराब लिवर को नुकसान पहुंचाने लगती है। लेकिन यहां दिये उपायों को अपनाकर आप अपने लीवर को मजबूत और बीमारियों से दूर रख सकते हैं।

लीवर की परेशानी ये घरेलू कुछ उपाय ,Home Remedies for liver problems

► हल्‍दी लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार करने के लिए अत्‍यंत उपयोगी होती है। इसमें एंटीसेप्टिक गुण मौजूद होते है और एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करती है। हल्दी की रोगनिरोधन क्षमता हैपेटाइटिस बी व सी का कारण बनने वाले वायरस को बढ़ने से रोकती है। इसलिए हल्‍दी को अपने खाने में शामिल करें या रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर पिएं► सेब का सिरका लीवर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। भोजन से पहले सेब के सिरके को पीने से शरीर की चर्बी घटती है। सेब के सिरके को आप कई तरीके से इस्‍तेमाल कर सकते हैं- एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाएं, या इस मिश्रण में एक चम्मच शहद मिलाएं। इस म‍िश्रण को दिन में दो से तीन बार लें।

►आंवला विटामिन सी के सबसे संपन्न स्रोतों में से एक है और इसका सेवन लीवर की कार्यशीलता को बनाये रखने में मदद करता है। अध्ययनों ने साबित किया है कि आंवला में लीवर को सुरक्षित रखने वाले सभी तत्व मौजूद हैं। लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए आपको दिन में 4-5 कच्चे आंवले खाने चाहिए.

► पपीता लीवर की बीमारियों के लिए सबसे सुरक्षित प्राकृतिक उपचार में से एक है, विशेष रूप से लीवर सिरोसिस के लिए। हर रोज दो चम्मच पपीता के रस में आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर पिएं। इस बीमारी से पूरी तरह निजात पाने के लिए इस मिश्रण का सेवन तीन से चार सप्ताहों के लिए करें.


►सिंहपर्णी जड़ की चाय लीवर
Choudhary: सिंहपर्णी जड़ की चाय लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने वाले उपचारों में से एक है। अधिक लाभ पाने के लिए इस चाय को दिन में दो बार पिएं। आप चाहें तो जड़ को पानी में उबाल कर, पानी को छान कर पी सकते हैं। सिंहपर्णी की जड़ का पाउडर बड़ी आसानी से मिल जाएगा।


►लीवर की बीमारियों के इलाज के लिए मुलेठी का इस्‍तेमाल कई आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है। इसके इस्‍तेमाल के लिए मुलेठी की जड़ का पाउडर बनाकर इसे उबलते पानी में डालें। फिर ठंड़ा होने पर छान लें। इस चाय रुपी पानी को दिन में एक या दो बार पिएं।

►फीटकोंस्टीटूएंट्स की उपस्थिति के कारण, अलसी के बीज हार्मोंन को ब्‍लड में घूमने से रोकता है और लीवर के तनाव को कम करता है। टोस्‍ट पर, सलाद में या अनाज के साथ अलसी के बीज को पीसकर इस्‍तेमाल करने से लिवर के रोगों को दूर रखने में मदद करता है

►एवोकैडो और अखरोट को अपने आहार में शामिल कर आप लीवर की बीमारियों के आक्रमण से बच सकते हैं। एवोकैडो और अखरोट में मौजूद ग्लुटथायन, लिवर में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर इसकी सफाई करता है।

► पालक और गाजर का रस का मिश्रण लीवर सिरोसिस के लिए काफी लाभदायक घरेलू उपाय है। पालक का रस और गाजर के रस को बराबर भाग में मिलाकर पिएं। लीवर की मरम्मत के लिए इस प्राकृतिक रस को रोजाना कम से कम एक बार जरूर पिएं

►सेब और पत्तेदार सब्जियों में मौजूद पेक्टिन पाचन तंत्र में उपस्थित विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल कर लीवर की रक्षा करता है। इसके अलावा, हरी सब्जियां पित्त के प्रवाह को बढ़ाती हैं।

►एक पौधा और है जो अपने आप उग आता है , जिसकी पत्तियां आंवले जैसी होती है. इन्ही पत्तियों के नीचे की ओर छोटे छोटे फुल आते है जो बाद में छोटे छोटे आंवलों में बदल जाते है . इसे भुई आंवला कहते है. इस पौधे को भूमि आंवला या भू- धात्री भी कहा जाता है .

►यह पौधा लीवर के लिए बहुत उपयोगी है.इसका सम्पूर्ण भाग , जड़ समेत इस्तेमाल किया जा सकता है.तथा कई बाज़ीगर भुई आंवला के पत्ते चबाकर लोहे के ब्लेड तक को चबा जाते हैं . ये यकृत ( लीवर ) की यह सबसे अधिक प्रमाणिक औषधि है

तम्बाकू खाने के नुकसान,Side Effects of Tobacco in Hindi,Quit Smoking,

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शायद आप यह पढकरअपने परिवार और बच्चों की खातिर खाना छोड़ देंगे 
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देश के लिए कुछ कर गुजरने वाले 18 से 35 वर्ष के युवा इन पार्टियों को स्टेटस सिंबल नहीं मानते , कारन चिलम तम्बाकू सिगार के नलिकाओं से गुजरता नशा अब नशों तक जा चूका है रेव पार्टियों में एल एस डी ड्रग्स हशीन कोकीन से भी बढकर नशा कोबरा डंक तक गहरा चूका है ! आज हमारे समाज में युवा पीढ़ी को नशे के ओर अग्रसर होते देख किसे दुःख नहीं होता | दुर्भाग्य से पिछले पांच से दस सालों में यह बुराई बुरी तरह बढती जा रही है

कुछ लोग अपनी मर्जी से नशा करते हैं कुछ शोकिया होते हैं जो बाद में अपने आप को नशे की आग में झोंक देते हैं परन्तु कुछ कुसंगति के कारण इस लत का शिकार हो जाते हैं | अकेले भारत में 15 करोड़ से अधिक व्यक्ति धूम्रपान करते हैं। 15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग के 30 प्रतिशत लोग तम्बाकु का सेवन करते हैं। 13 से 15 वर्ष की कच्ची उम्र के प्रत्येक 100 में 4 बच्चे धूम्रपान की गिरफ्त में है। तम्बाकू के प्रयोग में 48 प्रतिशत हिस्सा बीड़ी का है। गुटखे का हिस्सा 38 प्रतिशत तथा सिगरेट का हिस्सा 14 प्रतिशत है।

अकेले तम्बाकू से पूरे विश्व में 50 से 60 लाख तथा भारत में 10 से 12 लाख व्यक्ति प्रतिवर्ष अपने प्राण गंवाते हैं। धूम्रपान करने वालों की आयु 10-12 वर्ष औसतन कम हो जाती है। देश में अगर हम एक वर्ष का आंकड़ा उठाये तो वर्ष 2004 में 7700 करोड़ रुपये तम्बाकू उत्पादों पर खर्च किये गये तथा इसी वर्ष 5400 करोड़ रुपये तम्बाकू से जुड़ी बीमारियों पर खर्च किये गये जो कि सरकार को तम्बाकू से होने वाली करों की आय से कहीं अधिक है। सिगरेट के धुऐं में 4000 से अधिक जहरीले पदार्थ पाये जाते हैं जिनमें से 60 से अधिक पदार्थ कैंसरकारक है। 4 से 5 सिगरेटों में इतना निकोटिन होता है जिसको अगर किसी वयस्क व्यक्ति के शरीर में इंजेक्ट कर दिया जाये तो उसकी मृत्यु हो सकती है।

तम्बाकू के प्रकार-ध्रूमपान वाला तम्बाकू

  • बीड़ी
  • सिगरेट
  • सिगार
  • चैरट (एक प्रकार का सिगार)
  • चुट्टा
  • चुट्टे को उल्टा पीना
  • धुमटी
  • धुमटी को उल्टा पीना
  • पाइप
  • हुकली
  • चिलम
  • हुक़्क़ा

Side Effects of Tobacco in Hindi,smoking,

तम्बाकू के प्रकार-धुंआरहित तम्बाकू

  • तम्बाकू वाला पान
  • पान मसाला
  • तम्बाकू, सुपारी और बुझे हुए चूने का मिश्रण
  • मैनपुरी तम्बाकू
  • मावा
  • तम्बाकू और बुझा हुआ चूना (खैनी)
  • चबाने योग्य तम्बाकू
  • सनस
  • मिश्री
  • गुल
  • बज्जर
  • गुढ़ाकू
  • क्रीमदार तम्बाकू पाउडर
  • तम्बाकू युक्त पानी

तम्बाकू का शरीर पर दुष्प्रभाव,Side effects of tobacco on the body

  • कैंसर सभी प्रकार का तम्बाकू कैंसर पैदा करता है जैसे फैफड़ों, मुंह, गले, गर्दन, पेट, गुर्दो, मुत्राशय, अग्न्याशय, यकृत इत्यादि।
  • हार्ट डिजीज- हार्ट अटैक, कारोनरी हृदय रोग, छाती में जकड़न, दर्द, स्ट्रोक, एन्जाईना या हार्ट अटैक।
  • अन्य रोग – पैरों में गैगरीन, ब्रेन अटैक, क्रोनिक ब्रोकाईटिल, निमोनिया, मसूड़ों-दांतों की बीमारी, उच्च रक्त चाप, अवसाद, नपुंसकता, मुंह से दुर्गन्ध्, लकवा, जबड़ों में जकड़न, ऊर्जा में कमी इत्यादि रोग तम्बाकु का सेवन करने वालों में सामन्यतः पाये जाते हैं।
  • तम्बाकू सेवन से होने वाले प्रमुख रोगों में मुख व शरीर के अन्य भागों का कैंसर, हृदय रोग, अल्सर और दमा आदि रोग शामिल हैं। महिलाओं में तम्बाकू का सेवन गर्भपात और असामान्य बच्चों के जन्म का कारण बन सकता है।
  • कैंसर के कारणों मे तबाकू को 'ए' श्रेणी का दर्जा प्राप्त है।
  • धूम्रपान करने वाला व्यक्ति अपने वातावरण में जो धुआ छोड़ता है, उसमें 4000 रसायन मौजूद होते है।
  • सरकार को पान मसाला व सिगरेट आदि की बिक्री से जो राजस्व प्राप्त होता है, उससे कहीं अधिक राशि उसे तम्बाकू जनित रोगों से निपटने में खर्च करनी पड़ती है। धूम्रपान के कारण कार्यकुशल व्यक्तियों की कार्यकुशलता में कमी सरकार को परोक्ष रूप से हानि पहुचाती है।
  • तम्बाकू में निकोटिन, नाइट्रोसामाइन्स, बेन्जोपाइरीन्स, आर्सेनिक और क्रोमियम आदि कैंसर पैदा करने वाले प्रमुख तत्व पाये जाते हैं।
  • इसमें मौजूद निकोटिन, कैडमियम और कार्बन मोनेाआक्साइड तत्व सेहत के लिए अत्यत हानिप्रद है।
  • धूम्रपान न करने वाले लोग भी जब इन वस्तुओं के लती व्यक्तियों के धुएं के सपर्क में आते हैं, तो यह स्थिति उनकी सेहत के लिए भी अत्यत नुकसानदेह होती है।
  • 15 से 20 वर्षो तक तबाकू का सेवन करने से कैंसर पनपने की सभावनाएं बढ़ जाती है।
  • स्कूलों के पाठ्यक्रमों में 'कैंसर शिक्षा' को शामिल कर तम्बाकू से होने वाले नुकसान का प्रचार किया जा सकता है।
  • कैंसर रोगियों को अपने आहार में आवश्यक सुधार करना चाहिए। उन्हें भोजन में एंटीऑक्सीडेंट्स युक्त फलों व सब्जियों को वरीयता देनी चाहिए
  • फाइबर युक्त यानी रेशेदार आहार का भी पर्याप्त मात्रा में सेवन करना लाभप्रद है ताकि आतों की क्रिया का सचालन बेहतर ढंग से हो सके। आतों के सुचारु सचालन के कारण ही शरीर से नुकसानदेह पदार्थ मल के जरिए बाहर निकलते हैं।
  • तम्बाकू छोड़ने के लिये-पूरी दूनियां में तम्बाकू छोड़ने की कोई जादुई या चमत्कारिक दवाई नहीं है तम्बाकू छोड़ने के लिये दृढ़ इच्छाशक्ति का होना आवश्यक है। धूम्रपान/तम्बाकु छोड़ने से होने वाले लाभों के बारे में विचार कर स्वयं को शक्ति देवें। तम्बाकु छोड़ने के लिये निकोटीन की तलब को पूरी करने के लिये निकोटिन की च्यूगंगम या निकोटिन टेबलेट आती है इनका प्रयोग भी डाॅक्टर की सलाह से किया जा सकता है।
  • धूम्रपान करने वाली अपनी मित्र-मण्डली को छोड़ देवें ।
  • जब भी तलब लगें अपना ध्यान किसी और वस्तु पर लगाये कभी भी खाली न रहे।
  • अप्रतिदिन योग-प्राणायाम करें, जिससे इच्छाशक्ति मजबूत हो व तम्बाकु से पहले हो चुकी हानि की क्षतिपूर्ति हो।

तम्बाकू छोड़ने के लिए

  • दृढ़ सकल्प: 'मैं कल से सिगरेट छोड़ दूंगा।' का कल कभी नहीं आता। यह सकल्प आपको आज और अभी करना होगा। यदि तम्बाकू से होने वाले खतरों के बारे में आप सोचें तो यह प्रक्रिया दृढ़ सकल्प लेने में आपकी मदद कर सकती है।
  • पेय पदार्थो का अधिक सेवन करें। शराब, कॉफी, मीठी चीजों व अधिक कैलोरी वाली चीजों का सेवन कम करें।
  • कम कैलोरी वाली चीजों का सेवन अधिक करें।
  • चबाने वाली कुछ अन्य चीजों से तम्बाकू की लत को छोड़ा जा सकता है। इस बारे में आप नाक, कान, गला विशेषज्ञ से जानकारी हासिल कर सकते हैं।
  • व्यायाम व प्राणायाम करें।
  • परिजनों व मित्रों का सहयोग भी इस लत को छोड़ने में बहुत जरूरी है।
  • घर में सिगरेट अथवा गुटखा का एक भी पैकेट न रखें।
  • एक कापी में प्रतिदिन 8 से 10 बार लिखें कि मैं तम्बाकू, गुटखे या सिगरेट का सेवन नहीं करूंगा।
  • सिर्फ एक सिगरेट आज पी लेता हूं, इसके बाद फिर कभी नहीं पियूंगा'- यह सोच आपकी दुश्मन है। यह सोच आपको कभी भी सिगरेट नहीं छोड़ने देगी। इसलिए दोबारा एक भी सिगरेट न पिएं

धूम्रपान एवं तम्बाकू छोड़ने के लिए आयुर्वेदिक उपचार-substance abuse treatment,

    • बराबर मात्रा में 100 ग्राम सौंफ, 100 ग्राम अजवायन तथा 75 ग्राम काला नमक तथा दो नींबू का रस लेकर सबसे पहले काला नमक पीसकर उसमें नींबू मिला लेवें, आवश्यकतानुसार थोड़ा पानी भी मिला सकते हैं।
    • तदोपरान्त सौंफ व अजवायन को एक बर्तन में डालकर काला नमक मिला नींबू रस मिलाकर भून लेवें।यह औषधि बनाकर रख लेवें तथा जब भी तम्बाकू की तलब लगे थोड़ी सी मात्रा लेकर मुंह में रखकर चूसे इससे बीड़ी, सिगरेट की तलब धीरे-धीरे कम हो जायेगी तथा तम्बाकू की आदत को छोड़ा जा सकता है

      कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षण-What is The Colon Cancer in Hindi

       
      कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षण-What is the colon cancer,

      कोलोरेक्टल कैंसर-Colorectal Cancer in Hindi,

      आइये जानते है कैंसर के बारे में,लक्षण-What is Colorectal cancer,

      कोलोरेक्टल कैंसर जिसे आमतौर पर बड़ी आंत का कैंसर भी कहते है। ये कैंसर बडी आंत (कोलन) में या फिर रेक्टम में होता है।  कोलोरेक्टल कैंसर (कोलो से आशय बड़ी आंत और रेक्टल से आशय मलाशय रेक्टम से है) को पेट का कैंसर या बड़ी आंत का कैंसर भी कहा जाता है।

      कोलो और रेक्टल, हमारे पाचन तंत्र के सबसे से निचले हिस्से में पाया जाता है। आमतौर पर 50 साल से ज्यादा उम्र के लोग इस कैंसर का शिकार होते हैं। समय रहते अगर इस कैंसर के लक्षणों को पहचान लिया जाएं तो रोगी की जान को बचाया जा सकता है

      शुरूआत में इसके लक्षणों में कमजोरी, थकान, सांस लेने में तकलीफ, आंतों में परेशानी, दस्त या कब्ज की समस्या, मल में लाल या गहरा रक्त आना, वजन सामान्य से कम होना, पेट दर्द, ऐंठन या सूजन शामिल है। वैसे तो कोलोरेक्टल कैंसर होने के कई कारण है लेकिन आज की अनियमित जीवनशैली और खाने की आदतें इसके होने की मुख्य वजह है।
      ज्यादा रेड मीट (5 आउसं से ज्यादा प्रतिदिन ), धूम्रपान, खानपान में फल और सब्जियों को कम शामिल करना, फाइबर युक्त आहार न लेने जैसे कई कारक कोलोरेक्टल कैंसर को बढ़ा रहे है।

      कोलोरक्टेल कैंसर के लक्षण चरण

      कोलोरक्टेल कैंसर का टयूमर 4 चरणों से गुजरता है। जिसमें ये बाउल की अदंरूनी लाइनिगं में शुरू होता है और अगर समय पर इलाज न किया जाये तो ये कोलन के मसल वॉल से होते हुये लिम्फ नोडस तक चला जाता है। और आखिरी स्टेज में यें रक्त में मिलकर दूसरे अंगो जैसे कि फेफेड़ो, लीवर में फैल जाता है और इस स्टेज को मटेास्टेटक कोलोरेक्टल कैंसर (एम सीआरसी) कहते है। जितनी जल्दी कैंसर की पहचान हो जायें उतना ही उपचार आसान हो जाता है।

      अगर कैंसर का पहले ही स्टोज में पता चल जाये तो 90 प्रतिशत तक इसका उपचार संभव है और दूसरे स्टेज में 70-80 प्रतिशत तक, तीसरे स्टेज में 50-60 प्रतिशत आरै चौथे स्टजे में 30-50 प्रतिशत तक सभंवना होती है। लेकिन भारत में लोगों को इस कैंसर के बारें में जानकारी बहुत कम है जिसके कारण कैंसर के शुरूआत में ही इसका पता चलना काफी मुश्किल हो जाता है।

      हालंकि दवाइयों के नये प्रयागों के साथ मरीज की जरूरत आरै बीमारी को देखाते हुए कैंसर के नये इलाज ढुंढे जा रहे है। जिसमें व्यक्तिगत रूप से मरीज के कैंसर के जैविक लक्षणों की पहचान की जाती है और फिर उसी के अनुसार इलाज की थेरेपी इस्तेमाल की जाती है और इस तरह की व्यक्तिगत पद्वति कोलेकर विशेषज्ञ भी एकमत है कि इससे भविष्य में कैंसर के इलाज को नई दिशा मिलेगी।

      नई दिल्ली स्थित सर गगंराम अस्पताल के सीनियर कंस्लटेंट और मेडिकल कॉलेज के चेयरपर्सन डा. श्याम अग्रवाल के मुताबिक, टार्गेट थेरेपी में बॉयामेककर टेस्टिंग जैसे कि ओरएएस का भविष्य बहुत अच्छा है क्योकि इसमें केवल कैसंर प्रभावित कोशिकाओं का इलाज किया जाता है जो बहुत बहे तरीन तरीका है जबकि पारपं रिक थेरेपियों में उन सभी की शंकाओं को नष्ट कर दिया जाता है जो तेजी से बढ़ती है। पारम्परिक कैं सर इलाज में कीमोथेरेपी दवाइयों के जरिये शरीर से उन सभी शंकाओं को खत्म किया जाता है जो तेजी से विभाजित हो रही होती है।

      कीमोथेरेपी दवाइयां सामान्य कोशिकाओं और कैंसर की शंकाओं में अतंर नहीं कर पाती इसलिए इसके कई साइड इफैक्टस देखने को मिलते है। इसके विपरीत टार्गेट थेरेपी में टयूमर कोशिकाओं को टार्गेट करके उन्हें खत्म किया जाता है। 8 टार्गेट थेरेपी में व्यक्तिगत रूप से बॉयामे वर्कर के जरिये मरीज की पहचान कर उसे दवाइयां दी जाती है।

      इससे दवाइयां काफी प्रभावकारी काम करती है। ब्रेस्ट कैंसर, कोलोरक्ेटल कैसंर, फेफेडों के कैंसर जैसी बीमारियों में टार्गेट थेरेपी काफी कारगर साबित हुई है।

      कोलोरेक्टल कैंसर का निदान

      डा.अग्रवाल के मुताबिक, जिन मरीजों को कोलोरक्टल कैंसर के साथ के आर ए एस जीन युटटिड होते है उनमें टार्गेट थेरेपी काम नहीं करती। इसलिये इी जी एफ आर पॉजिटव मरीजों की के आर ए एस जीन का भी टेस्ट किया जाना चाहिये ताकि ये पता चल सकें कि इ जी एफ आर ब्लॉकर काम करेंगे या नही। काले न कैंसर में के आर ए एस जीन के टेस्ट सेे कंसै र का इलाज जीन पर आधारित हो जायेगा जिससे मरीज का उसी के अनुकलू इलाज करने में मदद मिलगी और इससेे मरीज का व्यक्तिगत रूप से कैंसर का इलाज सभंव हो पायगा।

      टार्गेट थेरपी

      टार्गेट थेरपी में मरीज को चुनना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। 50 से 70 प्रतिशत कालोरक्टल कैंसर में के आर ए एस जीन की म्यटू श्न नही होता है। ऐसे मरीजों में ई जी एफ आर ब्लाकॅर इलाज अच्छी प्रतिक्रिया दिखाते है। 

      अगर इलाज से पहले के आर ए एस की जाचं कर ली जाय तो यें पता चल जायेगा कि टार्गेट थेरेपी कितनी सफल रहेगी। टार्गेट थेरपी अकेले या पारंपरिक थेरेपियों का मिश्रण कैंसर के इलाज में उभरकर आ रहा है। इस तरह की टार्गेट थेरेपी ज्यादा प्रभावी होने के साथ कम साइड इफैक्स और मरीज का जीवन सुनिश्चित करती है।

      जीन टेस्ट करने से कैसंर का इलाज सही मायनें में व्यक्तिगत रूप से होता है। डा. अग्रवाल का कहना है, ऐसा समय जल्द ही आने वाला है जब हम टार्गेट थेरेपी को मौलिक इलाज के तौर तरीकों में शामिल करेंगे अनुवांशिक टेस्ट करने से कैंसर जैसे रागे का इलाज करने में टार्गेट थेरपी मे और अधिक मदद मिलेगी।

      मन्मथ रस के फायदे,Health Benefits of Manmath Ras in Hindi,

      यौन दौर्बल्य और यौन व्याधियों दूर करने के लिए पौष्टिक पदार्थों का सेवन करने के साथ किसी भी उत्तम आयुर्वेदिक योग का सेवन अवश्य करना चाहिये एसे बहुत से नवविवाहित युवकों कीसंख्या बहुत अधिक है जो इसके लिए इलाज पूछते हैं  यह योग उन्हीं रोगियों के लिए है 
      मन्मथ रस के सेवन से नपुंसकता, नामर्दी, शीघ्रपतन आदि नष्ट होकर काम-शक्ति की वृद्धि होती है। विलासी परूषों के लिए हमेशा स्तम्भक (बाजीकरण) संबंधी औषधीयों की तलाश में घूमते रहते हैं, उनके लिए यह बहुत काम की चीज है। बलवर्द्धक और रसायन भी है। शीघ्रपतन में यह रस उत्तम लाभ करता है। यह शुक्र विकार (वीय्र का पतलापन) दूर कर वीर्य को गाढ़ा कर देता है तथा बीजवाहिनी नाड़ियों में खून का संचार कर उसमे दृढ़ता उत्पन्न करता है। स्नायु दुर्बलता के कारण मानसिक अवसाद के कारण हुए ध्वजभंग दोष को मिटाने में भी यह अत्यन्त गुणकारी है।

      मन्मथ रस के घटक द्रव्य :-
      • शुद्ध पारद व् शुद्ध गन्धक , चालीस -चालीस ग्राम , अभ्रक भस्म बीस ग्राम l शुद्ध कपूर , 
      • बंग भस्म और लौह भस्म -दस दस ग्राम l ताम्र भस्म पांच ग्राम l विधारा की जड़ , जीरा , विदारी कंद , 
      • शतावरी , ताल मखाना , बला की जड़ , कौंच के बीज शुद्ध किये हुए छिलका रहित बीज , 
      • अतीस , जावित्री , जायफल , लोंग , भांग के बीज , अजवायन , और 
      • सफ़ेद राल --ये सब तीन - तीन ग्राम
      मन्मथ रस के निर्माण विधि :
      भस्मों के साथ पारद व् गन्धक को खरल में डालकर इतनी देर तक घुटाई करें कि सब मिल कर एक जान हो जाएँ  विधारा की जड़ आदि सभी द्रव्यों को अलग - अलग कूट पीस छान कर खूब महीन चूर्ण कर लें और घुटी हुई भस्मों वाले मिश्रण में मिलाकर थोड़ी देर तक घुटाई करके सब द्रव्यों को एक जान कर लें और अंत में जल का छींटा मार कर फिर घुटाई करें और फिर दो - रत्ती वजन की गोलियां बना कर खूब अच्छी तरह सुखा कर शीशी में भर कर रख लें

      मन्मथ रस के मात्रा और सेवन विधि :
      एक गिलास दूध उबाल कर ,उतार कर हल्का ठण्डा करके इस मन्मथ रस की एक गोली सुबह खाली पेट लें इसी प्रकार एक गोली दूध के साथ रात को भोजन करने के दो घंटे बाद सोते समय लें
      यदि रोगी मधुमेह का रोगी है तो वह इसे फीके दूध के साथ लें

      मन्मथ रस का उपयोग
      इस योग के सेवन से नपुंसकता ( नामर्दी ) यौनांग की शिथिलता , शीघ्रपतन , आदि व्याधियाँ दूर होती हैं पर्याप्त यौन शक्ति , वीर्य स्तम्भन शक्ति और यौनांग की कठोरता वाली स्थिति पुन: प्राप्त हो जाती है जो विलासी लोग अविवाहित जीवन में यौन क्रीडा करके और विवाहित जीवन में अति सहवास कर अपनी यौन शक्ति नष्ट कर चुके है उन्हें इस मन्मथ रस का सेवन तीन या चार महीने तक लगातार करना चाहिए 
      विलासी पुरूष इस रस का सेवन नियमपूर्वक रात को सोने से एक घण्टा पहले दूध के साथ करके, स्त्री-प्रसंग करने से अपूर्व आन्नद मालूम होता है और किसी प्रकार का नुकसान भी नही होता। इसका नियमित लगातार कुछ अधिक समय तक सेवन करने से इन्द्रियों की शक्ति बढ़ती है।
      •  यौन ताकत की कमी
      • वीर्यवाहिनी नाड़ियों की कमजोरी
      • नपुंसकता (Impotence)
      • नामर्दी (Erectile Dysfunction)
      • शीघ्र पतन (Premature ejaculation/Early Discharge)
      • वीर्य का पतला होना
      • शरीर को पुष्ट बनाने तथा शक्ति बढ़ाने के लिए इस रसायन का प्रयोग किया जाता है। इसके सेवन से शुक्र बहुत जल्दी बनता है
      • शरीर में रक्त की वृद्धि हो, शरीर कान्तिवान और पुष्ट हो जाता है। 
      • स्त्रियों के श्वेत प्रदर, गर्भाशय की कमजोरी, बीज कोषों की स्थिलता आदि नष्ट होकर उन्हे स्वस्थ एवं गर्भ धारण योग्य बना देता है।

      सेवन विधि और मात्रा Dosage of Manmath Ras

      • 1 गोली, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें। इसे गाढ़े किये हुए दूध के साथ लें। इसे भोजन करने के बाद लें।

      मन्मथ रस का महिलाओं को लाभ

      महिलाओं के लिए भी यह समान उपयोगी है  इसके सेवन से श्वेत प्रदर रोग , गर्भाशय की कमजोरी , बीज कोशों ( ओवरीज ) की शिथिलता आदि नारी रोग दूर होते हैं और वें स्वस्थ बनी रहती है

      यह दवा किसी आयुर्वेदिक स्टोर से भी खरीद सकते है 

      NOTE-किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें

      कामदेव घृत,Kamdev Ghrita in Hindi,

      कामदेव घृत एक आयुर्वेदिक घृत या घी है। यह घी पुरुषों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। इसके सेवन से शरीर में ताकत आती है। यह वाजीकारक है और यौन इच्छा को बढ़ाता है। इसका नियमित सेवन नाड़ियों की कमजोरी के कारण होने वाली नपुंसकता को दूर करता है। यह घी, स्पर्म संख्या की बढ़ोतरी में भी

      सहयोग करता है। इसी प्रकार महिलाओं द्वारा इसका सेवन फर्टिलिटी को बढ़ाता है। यह घी पौष्टिक होने के साथ-साथ शरीर के भीतर की रूक्षता को दूर करता है और कब्ज़ से राहत देता है। यह पाचक और बस्ती को शुद्ध करता है। यह धातुक्षीणता को दूर करता है और शरीर को सबल बनता है। यह वज़न को बढ़ाता है और शरीर में शक्ति और कांति देता है।

      कामदेव घृत के घटक 
      • अश्वगंधा, गोखरू, बरियार, गिलोय, सरिबन, विदारीकन्द, शतावर, सोंठ, गदहपूर्ण, पीपल की कोपल, गंभारी के फूल, कमलगट्टा, उडद, गाय का घी, गन्ने का रस, मेदा, महामेदा, जीवक, ऋषभक, काकोली, क्षीरकाकोली, ऋद्धि, वृद्धि कूठ, पद्माख, लाल चन्दन, तेजपात, छोटी पीपल, मुनक्का, केवांच बीज, नील कमल, नागकेशर, अनन्तमूल, बरियार, मिश्री

      कामदेव घृत के लाभ

      • इसके सेवन से नसों की कमजोरी के कारण होने वाली नपुंसकता दूर होती है।
      • यह कम वज़न या दुबलेपन की समस्या को दूर करता है।  यह अत्यंत पौष्टिक है।
      • यह स्निग्ध है और आन्तरिक रूक्षता दूर करता है।
      • यह वज़न, कान्ति, और पाचन को बढ़ाता है।
      • यह कब्ज़ से राहत देता है।
      • यह दिमाग, नसों, मांस, आँखों, मलाशय आदि को शक्ति प्रदान करता है।
      • यह धातुओं को पुष्ट करता है।
      • यह पित्त विकार को दूर करता है।

      कामदेव घृत के चिकित्सीय उपयोग 

      कामदेव घी, पौष्टिक, बलवर्धक, रसायन है। यह उत्तम वाजीकारक है और यौन क्षमता में सुधार लाता है। यह शरीर में बढ़े पित्त को भी कम करता है। कमजोरी, कम वज़न, यौन इच्छा की कमी नसों की कमजोरी, नपुंसकता रक्त पित्त, वातरक्त वीर्य क्षय खून की कमी मूत्रकृच्छ पसली में दर्द

      सेवन विधि और मात्रा

      • 6-12 gram दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
      • घी को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर लें।
      • इसे दूध अथवा गर्म पानी के साथ लें। या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।


      कृपया ध्यान दें, आयुर्वेदिक दवाओं की सटीक खुराक आयु, ताकत, पाचन शक्ति का रोगी, बीमारी और व्यक्तिगत दवाओं के गुणों की प्रकृति पर निर्भर करता है।

      मोटापा, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल में एहतियात के साथ इस दवा का उपयोग करना चाहिए।

      यह दवा किसी आयुर्वेदिक स्टोर से भी खरीद सकते है 

      NOTE-किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें

      नशा छुड़ाने के उपाय,Alcohol Treatment,drug Addiction Treatment



      आज हमारे समाज में युवा पीढ़ी को नशे के ओर अग्रसर होते देख किसे दुःख नहीं होता | दुर्भाग्य से पिछले पांच सालों में यह बुराई बुरी तरह बढती जा रही है कुछ लोग अपनी मर्जी से नशा करते हैं कुछ शोकिया होते हैं जो बाद में अपने आप को नशे की आग में झोंक देते हैं परन्तु कुछ कुसंगति के कारण इस लत का शिकार हो जाते हैं

      हमारे और आपके बच्चे भी इसके शिकार हो सकते हैं | हर कोई इस बुरी लत से अपने बच्चों और अन्य सदस्यों को बचाना चाहेगा | खुद नशे की लत के शिकार कुछ लोग यही चाहते हैं की किसी तरह से इस लत से छुटकारा मिल जाए परन्तु उनका इस पर कोई वश नहीं | नशा व्यक्ति की रगों में पहुँच कर व्यक्ति को अपना गुलाम बना लेता है व्यक्ति मानसिक रूप से पंगु हो जाता है

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      यदि हर माँ बाप को यह भान हो जाये जिनका बच्चा नशा कर रह है | तो शायद कुछ जिंदगियां बचा सकें मेरा अभिप्राय केवल इंतना है | कि घरवालों को इसकी खबर ही नही लग पाती कि कब और कैसे उनके परिवार का सदस्य नशा करने लग गया है | नशे की लत्त को छुड़ाने के लिय सरकार ने नशा मुक्ति केन्द्र खोल रखे हैं | पता चलते ही वहां से मदद लेनी चाहिए |

      यथासंभव यह प्रयास करना चाहिये जो कि नशा मुक्ति के लिए सीधा और सरल रास्ता है | मेरा यह लेख उन लोगो के लिए है जो नशा छोड़ना चाहते है लेकिन छोड़ नही पाते नशे का संबंध मन मस्तिष्क से है |

      शराब पीना और विशेषरूप से धूम्रपान के साथ शराब पीना बहुत ही खतरनाक है | इससे अनेकों रोग जैसे कैंसर (मुह का ), महिलाओं में स्तन कैंसर, आदि रोग होते है | ऐसे बुरे व्यसन (आदत) एक मानसिक बीमारी है और इसे को छुडाने के लिए मानसिक बीमारी जैसे इलाज की आवश्यकता होती है | वात होने पर लोग चिंता और घबराहट को दबाने के लिए धूम्रपान का सहारा लेते है | पित्त बढने से शरीर के अन्दर गर्मी लेने की इच्छा होती है और धूम्रपान की इच्छा होती है | कफ बढने से शरीर के अन्दर डाली गयी तम्बाकू की शक्ति बढती है |

      नशीली दवाओं के नुकसान,Loss drug

      ऐसे लोगों का प्रतिशत काफी अधिक है, जो मानसिक तनाव से मुक्ति के लिए नशीली दवाएं लेते हैं। उनके सेवन से प्रारम्‍भ में तो राहत सी महसूस होती है, लेकिन अंत बेहद बुरा होता है। एक ओर जहां ऐसे लोग अनेक शारीरिक व्‍याधियों के शिकार हो जाते हैं, वही हिंसा और गुनाह की प्रवृत्ति के चपेट में आने से स्‍वयं को तथा परिवार को संकट में डाल देते हैं।

      • नशीली दवा के रूप में बेहद मशहूर हशीश के धुंए में सिगरेट की तुलना में पांच गुना ज़्यादा कार्बन मोनो ऑक्साइड और तीन गुना ज्यादा टार होता है। कार्बन मोनोऑक्साइड बगैर रंग और गंध वाली गैस होती है, जो रोगी की जान भी ले सकती है।
      • कोकेन या क्रेक की आदत डालने के लिए इसका एक बार सेवन भी काफी होता है। इसका जरूरत से ज़्यादा डोज लेने पर हार्ट अटैक की आशंका होती है, जिससे व्‍यक्ति की मौत भी हो सकती है।
      • नशीली दवाओं के सेवन से रोगी को बहुत ही गंभीर किस्म का डीहायड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) हो सकता है। इनके अलावा इसके सेवन से किडनी की बीमारी या अवसाद (Depression) भी होता है।
      • नशीली दवाएं रोगी के निर्णय लेने की क्षमता पर असर डालती हैं। इसकी वजह से रोगी असुरक्षित सेक्स संबंध बनाने का ज़ोखिम उठा लेते हैं, जिससे एड्स की संभावनाएं भी बलवती हो जाती हैं।
      • तंबाकू – तंबाकू में निकोटिन,कोलतार,आर्सेनिक और कार्बन मोनो आक्साइड जैसी अत्यंत खतरनाक गैसें होती हैं इसके सेवन से तपेदिक, निमोनिया और सांस की बीमारियों सहित मुख, फेफड़े और गुर्दे में कैंसर होने की संभावनाएं रहती हैं। इससे उच्च रक्तचाप की शिकायत भी रहती है। 
      • अफीम, चरस, हेरोइन तथा स्मैक आदि से व्यक्ति पागल तथा सुप्तावस्था में आ जाता है। 
      • शराब – शराब के सेवन से लिवर खराब हो जाता है| 
      • कोकीन, चरस, अफीम से ऐसे उत्तेजना लाने वाले पदार्थ है जिसके प्रभाव में व्यक्ति अपराध कर बैठता है। 
      • धूम्रपान- करता है तो उसका बुरा प्रभाव भी हमारे शरीर पर पड़ता है। इसलिए न खुद धूम्रपान करें और न ही किसी को करने दे

      लत के लक्षण,Symptoms of addiction

      अगर नीचे दिए गए लक्षण नजर आने लगें तो समझ लेना चाहिए कि इंसान को निकोटिन की लत लग
      चुकी है
      • भूख कम महसूस होना।
      • अधिक लार और कफ बनना।
      • प्रति मिनट दिल की धड़कन 10 से 20 बार बढ़ जाती है तो यह लत का लक्षण है।
      • छोटी बात पर भी बेचैनी महसूस होना।
      • ज्यादा पसीना आना और उल्टी-दस्त होना।
      • हर काम करने के लिए तंबाकू की जरूरत महसूस होना।
      • निकोटीन लेने की इच्छा बढ़ जाना।
      • चिंता बढ़ना, अवसाद, निराशा आदि महसूस होना।
      • सिर दर्द होना और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होने लगे तो भी इसे निकोटिन की लत का लक्षण माना जाता है।

      लत लगने का कारण,The cause of addiction

      जब कोई सिगरेट या बीड़ी पीता है तो ब्रेन में लगभग 10 सेकंड और उसके बाद सेंट्रल नर्वस सिस्टम में 5
      मिनट तक निकोटिन का असर रहता है। हालांकि स्मोकिंग करने से थोड़ी देर के लिए काम करने की क्षमता बढ़ती है, लेकिन बाद में शरीर सुस्त होने लगता है। धीरे- धीरे काम करने की क्षमता कम होती जाती है और फिर धूम्रपान की जरूरत महसूस होती है। बार-बार इस तलब को मिटाने की कोशिश में इंसान चेन स्मोकर
      हो जाता है

      लत छुड़ाने के उपाय,Drug Addiction Treatment Programs,Alcohol Rehabilitation

      तंबाकू से संबंधित नशे से मुक्ति पाने के लिए नीचे लिखी आयुर्वेदिक दवाओं का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इन दवाओं का इस्तेमाल करने से धूम्रपान करने वालों को काफी फायदा मिलता है।

      • 2 ग्राम फिटकरी का फूला, 3 ग्राम गोदंती भस्म और 15 पत्ते सत्व सत्यानाशी का मिश्रण बनाकर पाने के पत्ते में डालकर चबाएं।
      • अदरक के टुकड़े कर लो छोटे छोटे और उस मे नींबू निचोड़ दो थोड़ा सा काला नमक मिला लो और इसको धूप मे सूखा लो सुखाने के बाद जब इसका पूरा पानी खतम हो जाए तो इन अदरक के टुकड़ो को अपनी जेब मे रख लो जब भी दिल करे गुटका खाना है तंबाकू खाना है बीड़ी सिगरेट पीनी है तो आप एक अदरक का टुकड़ा निकालो मुंह मे रखो और चूसना शुरू कर दो और यह अदरक ऐसे भी अदभुत चीज है आप इसे दाँत से काटो मत और सवेरे से शाम तक मुंह मे रखो तो शाम तक आपके मुंह मे सुरक्षित रहता है इसको चूसते रहो आपको गुटका खाने की तलब ही नहीं उठेगी तंबाकू सिगरेट लेने की इच्छा ही नहीं होगी शराब पीने का मन ही नहीं करेगा जैसे ही इसका रस लार मे घुलना शुरू हो जाएगा आप देखना इसका चमत्कारी असर होगा आपको फिर गुटका तंबाकू शराब –बीड़ी सिगरेट आदि की इच्छा ही नहीं होगी सुबह से शाम तक चूसते रहो और आप ने ये 10 -15 -20 दिन लगातार कर लिया तो हमेशा के लिए नशा आपका छूट जाएगा .
      • मुलहठी और शरपुंखा सत्व का मिश्रण कत्थे की तरह पान पर लगाकर 15 दिन तक रोज सुबह नाश्ते के बाद लें।
      • 4 ग्राम आमली चूर्ण, 10 ग्राम भुनी हुई सौंफ, 4 ग्राम इलायची के बीज, 4 ग्राम लौंग, 2 ग्राम मधुयष्ठी, 1ग्राम सोनामाखी भस्म, 10 ग्राम सूखा आंवला, 7-8 खजूर और 20 मुनक्का मिलाकर पीस लें। एक पैकेट में अपने साथ रखें। जब नशे की तलब महसूस हो तो एक चुटकी मुंह में डाल लें। धीरे- धीरे नशे से मन हट जाएगा।
      • बड़ी सौफ को घी में भुनकर चबाने से सिगरेट से नफरत होने लगती है। ऐरोबिक से भी सिगरेट की तलब कम होती है।
      • मुंह में गाजर, लौंग, इलायची, चिंगम जैसी वस्तु मुंह में रखें। इससे सिगरेट की तलब कम होती है 
      • मुद्रा, ध्यान और योगाभ्यास

      किसी प्रकार की लत होने से व्यक्ति का आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है। सिगरेट, तंबाकू,गुटखा, पान मसाला जैसे नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले भी अगर मुद्रा, ध्यान और योगाभ्यास करते हैं तो उनका आत्मबल बढ़ता है।ऐसे में इन लतों को त्याग पाने की इच्छा शक्ति उनके अंदर पैदा होती है।

      ज्ञान मुद्रा ,Knowledge exchange,

      दाहिने हाथ के अंगूठे को तर्जनी के टिप पर लगाएं और बायीं हथेली को छाती के ऊपर रखें। सांस सामान्य रहेगा। सुखासन या पद्मासन में बैठकर भी इस क्रिया को किया जा सकता है। लगातार 45 मिनट तक करने से काफी फायदा मिलता है।

      ध्यान,attention

      ध्यान करने से शरीर के अंदर से खराब तत्व बाहर निकल जाते हैं। एकाग्रता लाने के लिए त्राटक किया जाता है। इसमें बिना पलक झपकाए प्रकाश की लौ को लगातार देखने का अभ्यास किया जाता है। एक समय ऐसा आता है जब बस बिंदु दिखाई देता है। ऐसी स्थिति में कुछ समय तक रहने की कोशिश करनी चाहिए।

      कुंजल क्रिया,Kunjl action

      नमक मिला गुनगुना पानी भरपेट पीकर इसकी उल्टी कर दें। इससे पेट के ऊपरी हिस्से का शुद्धिकरण
      हो जाता है। बस्ती: इस क्रिया के माध्यम से शरीर के निचले हिस्से की सफाई की जाती है। इसे एनीमा भी कहते हैं।

      अर्द्ध शंख प्रक्षालन

      यह बड़ी आंत की सफाई और कब्ज मिटाने के लिए किया जाता है। इसमें चार लीटर गुनगुने पानी में स्वाद के मुताबिक नमक मिला लें। पानी को पांच भागों में बांटकर बारी-बारी से पीएं और क्रमश

      दोस्तों एक बार जरूर पढ़े शराब पीने की हानि।
      शायद आप यह पढकरअपने परिवार और बच्चों की खातिर पीना छोड़ देंगे 
      क्लिक करे और पढ़े।
      यदि आप लोग मेरी बात से सहमत है तो इसे जरूर शेयर करे शायद किसी का परिवार बिखरने से बच जाय धन्यवाद मित्रों

      Saturday, February 09, 2019

      चुकंदर के औषधीय गुण-Health Benefits of Beetroot in Hindi,Beet juice Benefits

      चुकंदर के औषधीय गुण-Health Benefits of Beetroot in Hindi,beetroot juice,beet juice benefits
      गुणों से भरपूर- सोडियम पोटेशियम, फॉस्फोरस, क्लोरीन, आयोडीन, आयरन और अन्य महत्वपूर्ण विटामिन पाए जाते है इसे खाने से हिमोग्लोबिन बढ़ता है। हर्बल जानकार चुंकदर को कैंसर जैसे भयावह रोग से ग्रसित रोगी को खिलाने की सलाह देते हैं। इनका मानना है कि चुकंदर कैंसर नियंत्रण में काफी मददगार होता है, चुकंदर का सेवन अधिक उम्र वालों में भी ऊर्जा का संचार करता है। इसमें एंटीआक्सीडेंट पाए जाते हैं। जो हमेशा जवान बनाएं रखते हैं। 
      Health Benefits of Beetroot आदिवासी हर्बल जानकार चुकंदर सेवन की सलाह गर्भवती महिलाओं को देते हैं। इनके अनुसार चुकंदर का सेवन महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान भी करना चाहिए। यह महिलाओं को ताकत प्रदान करता है और शरीर में रक्त की मात्रा तैयार करने में मददगार साबित होता है। चुकंदर में भरपूर मात्रा में लौह तत्व और फ़ोलिक एसिड पाए जाते हैं जो रक्त निर्माण के लिए मददगार होते हैं।

      चुकंदर के औषधीय गुण

      • एनीमिया में चुकंदर का जूस मानव शरीर में खून बनाने की प्रक्रिया में उपयोगी होता है। आयरन की प्रचुरता के कारण यह लाल रक्त कोशिकाओं को सक्रिय और उनकी पुर्नरचना करता है। यह एनीमिया के उपचार में विशेष रूप से उपयोगी होता है। इसके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
      • त्वचा के लिए फायदेमंद- यदि आपको आलस महसूस हो रही हो या फिर थकान लगे तो चुकंदर का खा लीजिये। इसमें कार्बोहाइड्रेट होता है जो शरीर की एनर्जी बढाता है।सफेद चुकंदर को पानी में उबाल कर छान लें। यह पानी फोड़े, जलन और मुहांसों के लिए काफी उपयोगी होता है। खसरा और बुखार में भी त्वचा को साफ करने में इसका उपयोग किया जा सकता है। 
      • चुकन्दर में ’बिटिन‘ नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में कैंसर तथा ट्यूमर बनने की संभावनाओं को नष्ट कर देता है तथा यह शरीर में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है।
      • चुकन्दर के नियमित सेवन से दूध पिलानेवाली स्त्रियों के दूध में वृद्धि होती है। चुकन्दर का
      • नियमित सलाद खाते रहने से पेशाब की जलन में फायदा होता है। पेशाब के साथ कैल्शियम का शरीर से निकलना बन्द हो जाता है।
      • कब्ज तथा बवासीर में चुकन्दर गुणकारी है। रोज इसके सेवन से कब्ज तथा बवासीर की तकलीफ नहीं रहती। एनीमिया (रक्ताल्पता) में एक कप चुकन्दर का रस दिन में ३ बार लें। सुबह शाम रोज १ कप चुकन्दर का रस सेवन करने से स्मरणशक्ति बढ़ती है। इससे दिमाग की गर्मी तथा मानसिक कमजोरी दूर होती है।
      • एक कप चुकन्दर के रस में एक चम्मच नीबू का रस मिलाकर पीने से पाचन क्रिया की अनियमितताएँ दूर होती हैं तथा उल्टी, दस्त, पेचिश, पीलिया में लाभ होता है। रोजाना सोने से पहले एक कप चुकन्दर का रस पीने से बवासीर में लाभ होता है। चुकन्दर के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट पीने से गेस्ट्रिक अल्सर में फायदा होता है।
      • चुकन्दर के रस में गाजर तथा खीरे का रस मिलाकर सेवन करने से गुर्दे तथा गाल ब्लेडर की सफाई होती है। चुकन्दर का रस एक कप दिन में दो बार पीने से या १०० ग्राम चुकन्दर का नियमित सेवन करने से गुर्दे सम्बन्धी रोगों में फायदा होता है। Health Benefits of Beetroot
      • चुकन्दर के रस में गाजर का रस तथा पपीता या संतरे का रस मिलाकर दिन में २ बार सेवन करने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है। स्त्रियों के गर्भाशय सम्बन्धी रोगों में चुकन्दर विशेष लाभकारी है। बार-बार गर्भपात होता है या कम मासिक आने में बी यह लाभदायक होता है। इसके लिये एक प्याला चुकन्दर का रस सुबह खाली पेट पीना चाहिए।
      • गर्भवती स्त्रियों को चुकन्दर, गाजर, टमाटर तथा सेव का रस मिलाकर पिलाने से उनके शरीर में विटामिन ए.सी.डी तथा लोहे की कमी नहीं हो पाती। यह रक्तशोधन करके शरीर को लाल सुर्ख बनाने में सहायता करता है।
      • दिल की बीमारियां- चुकंदर में नाइट्रेट नामक रसायन होता है जो रक्त के दबाव को काफी कम कर देता है और दिल की बीमारी के जोखिम को भी कम करता है। चुकंदर एनीमिया के उपचार में बहुत उपयोगी माना जाता है। 
      • यह शरीर में रक्त बनाने की प्रक्रिया में सहायक होता है। आयरन की प्रचुरता के कारण यह लाल रक्त कोशिकाओं को सक्रिय रखने की क्षमता को बढ़ा देता है। इसके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और घाव भरने की क्षमता भी बढ़ जाती है।
      • हाई ब्लड प्रेशर में- लंदन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने रोज चुकंदर का जूस पीने वाले मरीजों को अध्ययन में शामिल किया। उन्होंने रोज चुकंदर का मिक्स जूस [गाजर या सेब के साथ] पीने वाले मरीजों के हाई ब्लड प्रेशर में कमी पाई। अध्ययन के मुताबिक रोजाना केवल दो कप चुकंदर का मिक्स जूस पीने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। हालांकि इसका ज्यादा सेवन घातक साबित हो सकता है।
      • कब्ज और बवासीर-चुकंदर का नियमित सेवन करेंगे, तो कब्ज की शिकायत नहीं होगी। बवासीर के रोगियों के लिए भी यह काफी फायदेमंद होता है। रात में सोने से पहले एक गिलास या आधा गिलास जूस दवा का काम करता है।
      • लोग जिम में जी तोड़ कर वर्कआउट करते हैं उन्हें खाने के साथ चुकंदर खाना चाहिए। इससे शरीर में एनर्जी बढती है और थकान दूर होती है। साथ ही अगर हाई बीपी हो गया हो तो इसे पीने से केवल 1 घंटे में शरीर नार्मल हो जाता है Health Benefits of Beetroot
      • आदिवासी एसिडिटी होने पर चुकंदर के जूस के सेवन की सलाह देते हैं। चुकंदर न सिर्फ किडनी की सफाई में मदद करता है बल्कि यकृत को स्वस्थ बनाने में भी मदद करता है।
      • चुकंदर को एंटी एजिंग के लिए एक महत्वपूर्ण और कारगर फार्मुला माना गया है। यह शारीरिक कोशिकाओं को तरोताजा रखने में सहायक तो होता ही है इसके अलावा रक्त संचार को सुचार रखने में बेहतर साबित होता है।