Monday, July 15, 2019

हाई बीपी को काबू करने के प्रभावशाली घरेलू उपाय,Blood Pressure Treatment in Hindi

ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए घरेलू उपाय,Monitoring Blood,best blood pressure re monitor, Blood Pressure Treatment

वर्तमान समय में ब्लड प्रेशर के पेशेन्ट्स पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहे हैं। दौड़ती - भागती जिंदगी, फॉस्ट फूड और अनियमित दिनचर्या के कारण यह बीमारी भारत में भी फैल रही है। ब्लड प्रेशर से दिल की बीमारी, स्ट्रोक और गुर्दे की बीमारी होने का भी खतरा रहता है। इस बीमारी के रोगी को रोज दवा खानी पड़ती है। यदि आपके साथ भी ये समस्या है तो पारंपरिक चीजों का उपयोग करें। आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसी ही सामान्य चीजों के बारे में जिनके नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर हमेशा कंट्रोल में रहता है। Blood Pressure Treatment
  • लहसुन एक ऐसी औषधि है, जो ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए अमृत के समान है। लहसुन में एलिसीन होता है, जो नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को बढ़ाता है और मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है। ब्लड प्रेशर के डायलोस्टिक और सिस्टोलिक सिस्टम में भी राहत देता है। यही कारण है कि ब्लड प्रेशर के मरीजों को रोजाना खाली पेट एक लहसुन की कली निगलने की सलाह दी जाती है। 
  • आंवला -रोजाना आंवला खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। आंवला में विटामिन सी होता है। यह ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करता है और कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल में रखता है। 
  • मूली-यह एक साधारण सब्जी है। इसे खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। इसे पकाकर या कच्चा खाने से बॉडी को मिनरल्स व सही मात्रा में पोटैशियम मिलता है। यह हाइ-सोडियम डाइट के कारण बढ़ने वाले ब्लड प्रेशर पर भी असर डालता है।
  • तिल का तेल और चावल की भूसी को एक साथ खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। यह हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए भी लाभदायक होता है। माना जाता है कि यह ब्लड प्रेशर कम करने वाली अन्य औषधियों से ज्यादा बेहतर होता है। Blood Pressure Treatment
  • अलसी में एल्फा लिनोनेलिक एसिड काफी मात्रा में पाया जाता है। यह एक प्रकार का महत्वपूर्ण ओमेगा - 3 फैटी एसिड है। कई अध्ययनों में भी पता चला है कि जिन लोगों को हाइपरटेंशन की शिकायत होती है, उन्हें अपने भोजन में अलसी का इस्तेमाल शुरू करना चाहिए। इसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है और इसके सेवन से ब्लड प्रेशर भी कम हो जाता है।
  • इलायची-एक रिसर्च के अनुसार इलायची के नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर प्रभावी ढंग से कम होता है। इसे खाने से शरीर को एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं। साथ ही, ब्लड सर्कुलेशन भी सही रहता है।
  • प्याज के नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है। इसमें क्योरसेटिन होता है। यह एक ऐसा ऑक्सीडेंट फ्लेवेनॉल है, जो दिल को बीमारियों से बचाता है।
  • दालचीनी के सेवन से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। ओहाई के अप्लाइड हेल्थ सेंटर में 22 लोगों पर अध्ययन किया गया। इनमें से आधे लोगों को 250 ग्राम पानी में दालचीनी दी गई, जबकि आधे लोगों को कुछ और दिया गया। बाद में यह पता चला कि जिन लोगों ने दालचीनी का घोल पिया था, उनके शरीर में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा ज्यादा थी और ब्लड सर्कुलेशन भी सही था।
  • नमक ब्लड प्रेशर बढाने वाला प्रमुख कारक है। इसलिए यह बात सबसे महत्‍वपूर्ण है कि हाई बी पी वालों को नमक का प्रयोग कम कर देना चाहिए। 
  • उच्च रक्तचाप का एक प्रमुख कारण होता है रक्त का गाढा होना। रक्त गाढा होने से उसका प्रवाह धीमा हो जाता है। इससे धमनियों और शिराओं में दवाब बढ जाता है। लहसुन ब्लड प्रेशर ठीक करने में बहुत मददगार घरेलू उपाय है। यह रक्त का थक्का नहीं जमने देती है। धमनी की कठोरता में लाभदायक है। रक्त में ज्यादा कोलेस्ट्ररोल होने की स्थिति का समाधान करती है।
  • एक बडा चम्मच आंवले का रस और इतना ही शहद मिलाकर सुबह-शाम लेने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है। 
  • जब ब्लड प्रेशर बढा हुआ हो तो आधा गिलास मामूली गर्म पानी में काली मिर्च पाउडर एक चम्मच घोलकर 2-2 घंटे के फ़ासले से पीते रहें। ब्लड प्रेशर सही करने का बढिया उपचार है।
  • तरबूज के बीज की गिरि तथा खसखस अलग-अलग पीसकर बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें। एक चम्मच मात्रा में प्रतिदिन खाली पेट पानी के साथ लें। Blood Pressure Treatment
  • बढे हुए ब्लड प्रेशर को जल्दी कंट्रोल करने के लिये आधा गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़कर 2-2 घंटे के अंतर से पीते रहें। हितकारी उपचार है।
  • पांच तुलसी के पत्ते तथा दो नीम की पत्तियों को पीसकर 20 ग्राम पानी में घोलकर खाली पेट सुबह पिएं। 15 दिन में लाभ नजर आने लगेगा। हाई ब्लडप्रेशर के मरीजों के लिए पपीता भी बहुत लाभ करता है, इसे प्रतिदिन खाली पेट चबा-चबाकर खाएं।
  • नंगे पैर हरी घास पर 10-15 मिनट चलें। रोजाना चलने से ब्लड प्रेशर नार्मल हो जाता है।
  • सौंफ़, जीरा, शक्‍कर तीनों बराबर मात्रा में लेकर पाउडर बना लें। एक गिलास पानी में एक चम्मच मिश्रण घोलकर सुबह-शाम पीते रहें। पालक और गाजर का रस मिलाकर एक गिलास रस सुबह-शाम पीयें, लाभ होगा।
  • करेला और सहजन की फ़ली उच्च रक्त चाप-रोगी के लिये परम हितकारी हैं।
  • गेहूं व चने के आटे को बराबर मात्रा में लेकर बनाई गई रोटी खूब चबा-चबाकर खाएं, आटे से चोकर न निकालें। Blood Pressure Treatment
  • ब्राउन चावल उपयोग में लाए। इसमें नमक, कोलेस्टरोल और चर्बी नाम मात्र की होती है। यह उच्च रक्त चाप रोगी के लिये बहुत ही लाभदायक भोजन है।
  • प्याज और लहसुन की तरह अदरक भी काफी फायदेमंद होता है। बुरा कोलेस्ट्रोल धमनियों की दीवारों पर प्लेक यानी कि कैल्‍शियम युक्त मैल पैदा करता है जिससे रक्त के प्रवाह में अवरोध खड़ा हो जाता है और नतीजा उच्च रक्तचाप के रूप में सामने आता है। अदरक में बहुत हीं ताकतवर एंटीओक्सीडेट्स होते हैं जो कि बुरे कोलेस्ट्रोल को नीचे लाने में काफी असरदार होते हैं। अदरक से आपके रक्तसंचार में भी सुधार होता है, धमनियों के आसपास की मांसपेशियों को भी आराम मिलता है जिससे कि उच्च रक्तचाप नीचे आ जाता है।
  • तीन ग्राम मेथीदाना पावडर सुबह-शाम पानी के साथ लें। इसे पंद्रह दिनों तक लेने से लाभ मालूम होता है। 

फाइलेरिया के कारण लक्षण और उसके घरेलू उपाय,What is Filaria in Hindi,

फाईलेरिया रोग का इलाज संभव है। अगर इसका इलाज प्रारंम्भिक अवस्था में हो जाय तो संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। फाइलेरिया रोग में अकसर हाथ या पैर बहुत ही ज़्यादा सूज जाते हैं। इसलिए इस रोग को हाथी पांव भी कहते हैं। पर फाइलेरिया रोग से पीड़ित हर व्यक्ति के हाथ या पैर नहीं सूजते। यह बीमारी पूर्वी भारत, मालाबार और महाराष्ट्र के पूर्वी इलाकों में बहुत अधिक फैली हुई है।
  • यह कृमिवाली बीमारी है। यह कृमि लसिका तंत्र की नलियों में होते हैं और उन्हें बंद कर देते हैं। क्यूलैक्स मच्छर के काटने से बहुत छोटे आकार के कृमि शरीर में प्रवेश करते हैं। मलेरिया के कीड़ों की तरह यह कीड़े मनुष्यों और मच्छरों दोनों में छूत पैदा करते हैं फाइलेरिया (Lymphatic Filariasis) एक परजीवीजन्य संक्रामक बीमारी है जो धागे जैसे कृमियों से होती है। वैश्विक स्तर पर इसे एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी (Neglected Tropical Disease) माना जाता है। 
  • फाइलेरिया दुनिया भर के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय देशों में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। जिसमें भारत भी शामिल है। विश्व में लगभग 1.3 अरब लोगों को इस बीमारी के संक्रमण का खतरा है और लगभग 12 करोड़ लोग इससे वर्तमान में संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से लगभग 4 करोड़ लोग इस बीमारी की वजह से किसी विकृति का शिकार हो गए हैं या अक्षम हो चुके हैं।
  • फाइलेरिया 2.5 करोड़ से ज्यादा पुरुषों को जननांग के विकार और 1.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को सूजन से प्रभावित कर चुका है। हाथीपांव (Elephantiasis) फाइलेरिया का सबसे सामान्य लक्षण है जिसमें शोफ (Oedema) के साथ चमड़ी तथा उसके नीचे के ऊतक मोटे हो जाते हैं।

क्या हैं फाइलेरिया के लक्षण,filaria symptoms

इस तथ्य का अभी तक सटीक आकलन नहीं किया जा सका है कि संक्रमण के बाद फाइलेरिया के लक्षण प्रकट होने में कितना समय लगता है। हालांकि मच्छर के काटने के 16-18 महीनों के पश्चात बीमारी के लक्षण प्रकट होते हैं। फाइलेरिया के ज्यादातार लक्षण और संकेत वयस्क कृमि के लसीका तंत्र में प्रवेश के कारण पैदा होते हैं
  • कृमि द्वारा ऊतकों को नुकसान पहुंचाने से लसीका द्रव का बहाव बाधित होता है जिससे सूजन, घाव और संक्रमण पैदा होते हैं। पैर और पेड़ू सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले अंग हैं। फाइलेरिया का संक्रमण सामान्य शारीरिक कमजोरी, सिरदर्द, मिचली, हल्के बुखार और बार-बार खुजली के रूप में प्रकट होता है।
  • फाइलेरिया कभी-कभार ही जानलेवा साबित होता है, हालांकि इससे बार-बार संक्रमण, बुखार, लसीका तंत्र में गंभीर सूजन और फेफड़ों की बीमारी ‘ट्रॉपिकल पल्मोनरी इओसिनोफीलिया (Tropical Pulmonary Eosinophilia) हो जाती है। ट्रॉपिकल पल्मोनरी इओसिनोफीलिया के लक्षणों में खांसी, सांस लेने में परेशानी और सांस लेने में घरघराहट की आवाज होती है। लगभग 5 प्रतिशत मामलों में पैरों में सूजन आ जाती है जिसे फ़ीलपांव अथवा हाथीपांव कहते हैं। फाइलेरिया से गंभीर विकृति, चलने-फिरने में परेशानी और लंबी अवधि की विकलांगता हो सकती है।
  • फाइलेरिया के कारण हाइड्रोसील (Hydrocoele) भी हो सकता है। मरीज के वृषणकोष (Scrotum) में सूजन भी आ सकती है जिसे ‘फाइलेरियल स्क्रोटम’ (Filarial scrotum) कहा जाता है। कुछ मरीजों में मूत्र का रंग दूधिया हो जाता है। महिलाओं में वक्ष या बाह्य जननांग भी प्रभावित होते हैं। कुछ मामलों में पेरिकार्डियल स्पेस (हृदय और उसके झिल्लीदार आवरण के बीच की जगह) में भी द्रव जमा हो जाता है।

फाइलेरिया के कौन से कारक जीव

फाइलेरिया, फाइलेरियोडिडिया (Filariodidea) कुल के नेमैटोडों (गोलकृमि) के संक्रमण से होता है। तीन प्रकार के कृमि इस बीमारी को जन्म देते हैं। ये हैं वुचिरेरिया बैंक्राफ्टाई (Wuchereria bancrofti), ब्रुजिया मलाई (Brugia malayi) औरब्रुजिया टिमोरीई (Brugia timori)। वुचिरेरिया बैंक्राफ्टाई इस बीमारी का सबसे सामान्य कारक है जो पूरे विश्व में पाया जाता है।
  • ब्रुजिया मलाई दक्षिण-पश्चिम भारत, चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, फिलिपींस और वियतनाम में पाया जाता है जबकि ब्रुजिया टिमोराई सिर्फ इंडोनेशिया तक ही सीमित है। 
  • वुचिरेरिया बैंक्राफ्टाई में नर कृमि 40 मिलीमीटर लंबा होता है जबकि मादा की लंबाई लगभग 50-100 मिलीमीटर होती है।
  • फाइलेरिया भारत में एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है। यह संक्रामक बीमारी देश के राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, गुजरात, केरल एवं केन्द्र शासित प्रदेशों लक्षद्वीप और अंडमान निकोबार में स्थाई रूप से उभरती रहती है। 
  • भारत में मुख्य तौर पर फाइलेरिया के दो प्रकार के संक्रमण होते हैं, एक वुचिरेरिया बैंक्राफ्टाई से और दूसरा ब्रुजिया मलाई से। वुचिरेरिया बैंक्राफ्टाई के संक्रमण से होने वाला बैंक्रोफ्टियन फाइलेरिया (Bancroftian filaria) भारत में फाइलेरिया के कुल मामलों का लगभग 98 प्रतिशत होता है

कैसे फैलता है फाइलेरिया

  • फाइलेरिया मच्छरों से फैलता है जो परजीवी कृमियों के लिए रोगवाहक का काम करते हैं। 
  • इस परजीवी के लिए मनुष्य मुख्य पोषक है जबकि मच्छर इसके वाहक और मध्यस्थ पोषक हैं। 
  • कृमि प्रभावित क्षेत्रों से लोगों का रोजगार की तलाश में बाहर जाना, शहरीकरण, औद्योगिकीकरण, अज्ञानता, आवासीय सुविधाओं की कमी और स्वच्छता की अपर्याप्त स्थिति से यह संक्रमण फैलता है। 
  • संक्रमण के बाद कृमि के लार्वा संक्रमित व्यक्ति की रक्तधारा में बहते रहते हैं जबकि वयस्क कृमि मानव लसीका तंत्र में जगह बना लेता है। एक वयस्क कृमि की आयु सात वर्ष तक हो सकती है।
  •  संक्रमित मच्‍छर के काटने से इसके कीड़े फैलते है। जब मनुष्‍य बच्‍चा होता है तो आम तौर पर संक्रमण आरंभ हो जाता है। तीन प्रकार के कीड़े होते है जिनके कारण बीमारी फैलती है: Wuchereria bancrofti, Brugia malayi, और Brugia timori. Wuchereria bancrofti यह सबसे सामान्‍य है। यह कीड़ा lymphatic system को नुकसान पहुंचाता है।
  •  रात के समय एकत्रित किए गए खून को, एक प्रकार के सूक्ष्‍मदर्शी के द्वारा देखने पर इस बीमारी का पता चलता है। खून को thick smear के रूप में और Giemsa के साथ दाग के रूप में होना चाहिए।. बीमारी के विरूद्ध एंटीबाडियों हेतु खून की जांच भी की जा सकती है।
  • यह शोथ न्यूनाधिक होता रहता है, परंतु जब ये कृमि अंदर ही अंदर मर जाते हैं, तब लसीकावाहिनियों का मार्ग सदा के लिए बंद हो जाता है और उस स्थान की त्वचा मोटी तथा कड़ी हो जाती है। लसीका वाहिनियों के मार्ग बंद हो जाने से यदि अंग फूल जाएँ, तो कोई भी औषध ऐसी नहीं है जो अवरुद्ध लसीकामार्ग को खोल सके। 
  • कभी कभी किसी किसी रोगी में शल्यकर्म द्वारा लसीकावाहिनी का नया मार्ग बनाया जा सकता है। इस रोग के समस्त लक्षण फाइलेरिया के उग्र प्रकोप के समान होते हैं।

फाइलेरिया का घरेलू इलाज

इलाज बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही शुरु हो जाना चाहिए। याद रखना चाहिए कि हाथों या पैरों की सूजन ठीक करने के लिए हमारे पास कोई भी दवाई नहीं है। डाईइथाइल – कार्बामाज़ीन (DEC) फाइलेरिया की एक दवा है। इसे दो हफ्तों दिया जाना चाहिए। इस दवा से सिर में दर्द, मितली, उल्टी जैसी प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। कभी कभी इससे एलर्जी भी हो जाती है। आप इसके बारे में और अधिक दवाइयों वाले अध्याय में पढ़ सकते हैं।

फाइलेरिया पर नियंत्रण या रोकथाम phayaleriya-check फायलेरिया जॉंच के लिये खून का नमूना रात में लेना पडता है इस बीमारी कृमि के कई एक वाहक इलाज के लिए नहीं पहुँचते। इसलिए संक्रमणग्रस्त इलाकों में सभी की जांच ज़रूरी है। ऐसा न होने पर बीमारी फैलती जाती है। जिन क्षेत्रों में फाइलेरिया की समस्या हो वहॉं खास सर्वे किए जाने ज़रूरी होते हैं। फाइलेरिया के नियंत्रण के लिए रात को खून के आलेप के नमूने इकट्ठे करना, रोकथाम के लिये दवा प्रयोग और बीएचसी छिडकाकर मच्छरों पर नियंत्रण करना जैसे कदम उठाना ज़रूरी है। जिन क्षेत्रों में फाइलेरिया की बीमारी ज़्यादा होती है वहॉं नमक में DEC दवा मिलाना ठीक रहता है। इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि हर व्यक्ति को यह दवा मिल जाए (कम मात्रा में) और इससे सूक्ष्म फाइलेरिया कृमि को मारा जा सकता है।

ये सूक्ष्म फाइलेरिया कृमि खून में घूमते रहते हैं। ऐसा खासकर रात को होता है। क्यूलैक्स मच्छर जब खून चूसता है तो वो इन सूक्ष्म फाइलेरिया को अपने अंदर ले लेता है। और संक्रमण पैदा करने वाले लार्वा के रुप में इनका विकास 10 से 15 दिनों के अंदर होता है। इस अवस्था में मच्छर बीमारी पैदा करने वाला होता है। इस तरह यह चक्र चलता रहता है।

Saturday, July 13, 2019

लीवर की परेशानी का आयुर्वेदिक इलाज Liver Problems In Hindi,



आज कल चारो और लीवर के मरीज हैं, किसी को पीलिया हैं, किसी का लीवर सूजा हुआ हैं, किसी का फैटी हैं, और डॉक्टर बस नियमित दवाओ पर चला देते हैं मरीज को, मगर आराम किसी को मुश्किल से ही आते देखा हैं लीवर हमारे शरीर का सबसे मुख्‍य अंग है, यदि आपका लीवर ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पा रहा है तो समझिये कि खतरे की घंटी बज चुकी है। लीवर की खराबी के लक्षणों को अनदेखा करना बड़ा ही मुश्‍किल है और फिर भी हम उसे जाने अंजाने अनदेखा कर ही देते हैं।

लीवर खराब होने के मुख्य कारण,The main reason for liver failure

लीवर की खराबी होने का कारण ज्‍यादा तेल खाना, ज्‍यादा शराब पीना और कई अन्‍य कारणों के बारे में तो हम जानते ही हैं। हालाकि लीवर की खराबी का कारण कई लोग जानते हैं पर लीवर जब खराब होना शुरु होता है

तब हमारे शरीर में क्‍या क्‍या बदलाव पैदा होते हैं यानी की लक्षण क्‍या हैं, इसके बारे में कोई नहीं जानता। वे लोग जो सोचते हैं कि वे शराब नहीं पीते तो उनका लीवर कभी खराब नहीं हो सकता तो वे बिल्‍कुल गलत हैं।

आप जानते हैं कि मुंह से गंदी बदबू आना भी लीवर की खराबी हो सकती है। हम आपको कुछ परीक्षण बताएंगे जिससे आप पता लगा सकते हैं कि क्‍या आपका लीवर वाकई में खराब है। कोई भी बीमारी कभी भी चेतावनी का संकेत दिये बगैर नहीं आती, इसलिये आप सावधान रहें।

मुंह से बदबू यदि लीवर सही से कार्य नही कर रहा है तो आपके मुंह से गंदी बदबू आएगी। ऐसा इसलिये होता है क्‍योकि मुंह में अमोनिया ज्‍याद रिसता है। लीवर खराब होने का एक और संकेत है कि स्‍किन क्षतिग्रस्‍त होने लगेगी और उस पर थकान दिखाई पडने लगेगी। आंखों के नीचे की स्‍किन बहुत ही नाजुक होती है जिस पर आपकी हेल्‍थ का असर साफ दिखाई पड़ता है।

पाचन तंत्र में खराबी यदि आपके लीवर पर वसा जमा हुआ है और या फिर वह बड़ा हो गया है, तो फिर आपको पानी भी नहीं हजम होगा। त्‍वचा पर सफेद धब्‍बे यदि आपकी त्‍वचा का रंग उड गया है और उस पर सफेद रंग के धब्‍बे पड़ने लगे हैं तो इसे हम लीवर स्‍पॉट के नाम से बुलाएंगे।

यदि आपकी पेशाब या मल हर रोज़ गहरे रंग का आने लगे तो लीवर गड़बड़ है। यदि ऐसा केवल एक बार होता है तो यह केवल पानी की कमी की वजह से हो सकता है। यदि आपके आंखों का सफेद भाग पीला नजर आने लगे और नाखून पीले दिखने लगे तो आपको जौन्‍डिस हो सकता है। इसका यह मतलब होता है कि आपका लीवर संक्रमित है।

लीवर एक एंजाइम पैदा करता है जिसका नाम होता है बाइल जो कि स्‍वाद में बहुत खराब लगता है। यदि आपके मुंह में कडुआहर लगे तो इसका मतलब है कि आपके मुंह तब बाइल पहुंच रहा है। जब लीवर बड़ा हो जाता है तो पेट में सूजन आ जाती है, जिसको हम अक्‍सर मोटापा समझने की भूल कर बैठते हैं।

मानव पाचन तंत्र में लीवर एक म‍हत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। विभिन्‍न अंगों के कार्यों जिसमें भोजन चयापचय, ऊर्जा भंडारण, विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलना, डिटॉक्सीफिकेशन, प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन और रसायनों का उत्‍पादन शामिल हैं। लेकिन कई चीजें जैसे वायरस, दवाएं, आनुवांशिक रोग और शराब लिवर को नुकसान पहुंचाने लगती है। लेकिन यहां दिये उपायों को अपनाकर आप अपने लीवर को मजबूत और बीमारियों से दूर रख सकते हैं।

लीवर की परेशानी ये घरेलू कुछ उपाय ,Home Remedies for liver problems

► हल्‍दी लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार करने के लिए अत्‍यंत उपयोगी होती है। इसमें एंटीसेप्टिक गुण मौजूद होते है और एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करती है। हल्दी की रोगनिरोधन क्षमता हैपेटाइटिस बी व सी का कारण बनने वाले वायरस को बढ़ने से रोकती है। इसलिए हल्‍दी को अपने खाने में शामिल करें या रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर पिएं► सेब का सिरका लीवर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। भोजन से पहले सेब के सिरके को पीने से शरीर की चर्बी घटती है। सेब के सिरके को आप कई तरीके से इस्‍तेमाल कर सकते हैं- एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाएं, या इस मिश्रण में एक चम्मच शहद मिलाएं। इस म‍िश्रण को दिन में दो से तीन बार लें।

►आंवला विटामिन सी के सबसे संपन्न स्रोतों में से एक है और इसका सेवन लीवर की कार्यशीलता को बनाये रखने में मदद करता है। अध्ययनों ने साबित किया है कि आंवला में लीवर को सुरक्षित रखने वाले सभी तत्व मौजूद हैं। लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए आपको दिन में 4-5 कच्चे आंवले खाने चाहिए.

► पपीता लीवर की बीमारियों के लिए सबसे सुरक्षित प्राकृतिक उपचार में से एक है, विशेष रूप से लीवर सिरोसिस के लिए। हर रोज दो चम्मच पपीता के रस में आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर पिएं। इस बीमारी से पूरी तरह निजात पाने के लिए इस मिश्रण का सेवन तीन से चार सप्ताहों के लिए करें.


►सिंहपर्णी जड़ की चाय लीवर
Choudhary: सिंहपर्णी जड़ की चाय लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने वाले उपचारों में से एक है। अधिक लाभ पाने के लिए इस चाय को दिन में दो बार पिएं। आप चाहें तो जड़ को पानी में उबाल कर, पानी को छान कर पी सकते हैं। सिंहपर्णी की जड़ का पाउडर बड़ी आसानी से मिल जाएगा।


►लीवर की बीमारियों के इलाज के लिए मुलेठी का इस्‍तेमाल कई आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है। इसके इस्‍तेमाल के लिए मुलेठी की जड़ का पाउडर बनाकर इसे उबलते पानी में डालें। फिर ठंड़ा होने पर छान लें। इस चाय रुपी पानी को दिन में एक या दो बार पिएं।

►फीटकोंस्टीटूएंट्स की उपस्थिति के कारण, अलसी के बीज हार्मोंन को ब्‍लड में घूमने से रोकता है और लीवर के तनाव को कम करता है। टोस्‍ट पर, सलाद में या अनाज के साथ अलसी के बीज को पीसकर इस्‍तेमाल करने से लिवर के रोगों को दूर रखने में मदद करता है

►एवोकैडो और अखरोट को अपने आहार में शामिल कर आप लीवर की बीमारियों के आक्रमण से बच सकते हैं। एवोकैडो और अखरोट में मौजूद ग्लुटथायन, लिवर में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर इसकी सफाई करता है।

► पालक और गाजर का रस का मिश्रण लीवर सिरोसिस के लिए काफी लाभदायक घरेलू उपाय है। पालक का रस और गाजर के रस को बराबर भाग में मिलाकर पिएं। लीवर की मरम्मत के लिए इस प्राकृतिक रस को रोजाना कम से कम एक बार जरूर पिएं

►सेब और पत्तेदार सब्जियों में मौजूद पेक्टिन पाचन तंत्र में उपस्थित विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल कर लीवर की रक्षा करता है। इसके अलावा, हरी सब्जियां पित्त के प्रवाह को बढ़ाती हैं।

►एक पौधा और है जो अपने आप उग आता है , जिसकी पत्तियां आंवले जैसी होती है. इन्ही पत्तियों के नीचे की ओर छोटे छोटे फुल आते है जो बाद में छोटे छोटे आंवलों में बदल जाते है . इसे भुई आंवला कहते है. इस पौधे को भूमि आंवला या भू- धात्री भी कहा जाता है .

►यह पौधा लीवर के लिए बहुत उपयोगी है.इसका सम्पूर्ण भाग , जड़ समेत इस्तेमाल किया जा सकता है.तथा कई बाज़ीगर भुई आंवला के पत्ते चबाकर लोहे के ब्लेड तक को चबा जाते हैं . ये यकृत ( लीवर ) की यह सबसे अधिक प्रमाणिक औषधि है

तम्बाकू खाने के नुकसान,Side Effects of Tobacco in Hindi,Quit Smoking,

दोस्तों एक बार जरूर पढ़े 
शायद आप यह पढकरअपने परिवार और बच्चों की खातिर खाना छोड़ देंगे 
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यदि आप लोग मेरी बात से सहमत है तो इसे जरूर शेयर करे शायद किसी का परिवार बिखरने से बच जाय धन्यवाद मित्रों

देश के लिए कुछ कर गुजरने वाले 18 से 35 वर्ष के युवा इन पार्टियों को स्टेटस सिंबल नहीं मानते , कारन चिलम तम्बाकू सिगार के नलिकाओं से गुजरता नशा अब नशों तक जा चूका है रेव पार्टियों में एल एस डी ड्रग्स हशीन कोकीन से भी बढकर नशा कोबरा डंक तक गहरा चूका है ! आज हमारे समाज में युवा पीढ़ी को नशे के ओर अग्रसर होते देख किसे दुःख नहीं होता | दुर्भाग्य से पिछले पांच से दस सालों में यह बुराई बुरी तरह बढती जा रही है

कुछ लोग अपनी मर्जी से नशा करते हैं कुछ शोकिया होते हैं जो बाद में अपने आप को नशे की आग में झोंक देते हैं परन्तु कुछ कुसंगति के कारण इस लत का शिकार हो जाते हैं | अकेले भारत में 15 करोड़ से अधिक व्यक्ति धूम्रपान करते हैं। 15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग के 30 प्रतिशत लोग तम्बाकु का सेवन करते हैं। 13 से 15 वर्ष की कच्ची उम्र के प्रत्येक 100 में 4 बच्चे धूम्रपान की गिरफ्त में है। तम्बाकू के प्रयोग में 48 प्रतिशत हिस्सा बीड़ी का है। गुटखे का हिस्सा 38 प्रतिशत तथा सिगरेट का हिस्सा 14 प्रतिशत है।

अकेले तम्बाकू से पूरे विश्व में 50 से 60 लाख तथा भारत में 10 से 12 लाख व्यक्ति प्रतिवर्ष अपने प्राण गंवाते हैं। धूम्रपान करने वालों की आयु 10-12 वर्ष औसतन कम हो जाती है। देश में अगर हम एक वर्ष का आंकड़ा उठाये तो वर्ष 2004 में 7700 करोड़ रुपये तम्बाकू उत्पादों पर खर्च किये गये तथा इसी वर्ष 5400 करोड़ रुपये तम्बाकू से जुड़ी बीमारियों पर खर्च किये गये जो कि सरकार को तम्बाकू से होने वाली करों की आय से कहीं अधिक है। सिगरेट के धुऐं में 4000 से अधिक जहरीले पदार्थ पाये जाते हैं जिनमें से 60 से अधिक पदार्थ कैंसरकारक है। 4 से 5 सिगरेटों में इतना निकोटिन होता है जिसको अगर किसी वयस्क व्यक्ति के शरीर में इंजेक्ट कर दिया जाये तो उसकी मृत्यु हो सकती है।

तम्बाकू के प्रकार-ध्रूमपान वाला तम्बाकू

  • बीड़ी
  • सिगरेट
  • सिगार
  • चैरट (एक प्रकार का सिगार)
  • चुट्टा
  • चुट्टे को उल्टा पीना
  • धुमटी
  • धुमटी को उल्टा पीना
  • पाइप
  • हुकली
  • चिलम
  • हुक़्क़ा

Side Effects of Tobacco in Hindi,smoking,

तम्बाकू के प्रकार-धुंआरहित तम्बाकू

  • तम्बाकू वाला पान
  • पान मसाला
  • तम्बाकू, सुपारी और बुझे हुए चूने का मिश्रण
  • मैनपुरी तम्बाकू
  • मावा
  • तम्बाकू और बुझा हुआ चूना (खैनी)
  • चबाने योग्य तम्बाकू
  • सनस
  • मिश्री
  • गुल
  • बज्जर
  • गुढ़ाकू
  • क्रीमदार तम्बाकू पाउडर
  • तम्बाकू युक्त पानी

तम्बाकू का शरीर पर दुष्प्रभाव,Side effects of tobacco on the body

  • कैंसर सभी प्रकार का तम्बाकू कैंसर पैदा करता है जैसे फैफड़ों, मुंह, गले, गर्दन, पेट, गुर्दो, मुत्राशय, अग्न्याशय, यकृत इत्यादि।
  • हार्ट डिजीज- हार्ट अटैक, कारोनरी हृदय रोग, छाती में जकड़न, दर्द, स्ट्रोक, एन्जाईना या हार्ट अटैक।
  • अन्य रोग – पैरों में गैगरीन, ब्रेन अटैक, क्रोनिक ब्रोकाईटिल, निमोनिया, मसूड़ों-दांतों की बीमारी, उच्च रक्त चाप, अवसाद, नपुंसकता, मुंह से दुर्गन्ध्, लकवा, जबड़ों में जकड़न, ऊर्जा में कमी इत्यादि रोग तम्बाकु का सेवन करने वालों में सामन्यतः पाये जाते हैं।
  • तम्बाकू सेवन से होने वाले प्रमुख रोगों में मुख व शरीर के अन्य भागों का कैंसर, हृदय रोग, अल्सर और दमा आदि रोग शामिल हैं। महिलाओं में तम्बाकू का सेवन गर्भपात और असामान्य बच्चों के जन्म का कारण बन सकता है।
  • कैंसर के कारणों मे तबाकू को 'ए' श्रेणी का दर्जा प्राप्त है।
  • धूम्रपान करने वाला व्यक्ति अपने वातावरण में जो धुआ छोड़ता है, उसमें 4000 रसायन मौजूद होते है।
  • सरकार को पान मसाला व सिगरेट आदि की बिक्री से जो राजस्व प्राप्त होता है, उससे कहीं अधिक राशि उसे तम्बाकू जनित रोगों से निपटने में खर्च करनी पड़ती है। धूम्रपान के कारण कार्यकुशल व्यक्तियों की कार्यकुशलता में कमी सरकार को परोक्ष रूप से हानि पहुचाती है।
  • तम्बाकू में निकोटिन, नाइट्रोसामाइन्स, बेन्जोपाइरीन्स, आर्सेनिक और क्रोमियम आदि कैंसर पैदा करने वाले प्रमुख तत्व पाये जाते हैं।
  • इसमें मौजूद निकोटिन, कैडमियम और कार्बन मोनेाआक्साइड तत्व सेहत के लिए अत्यत हानिप्रद है।
  • धूम्रपान न करने वाले लोग भी जब इन वस्तुओं के लती व्यक्तियों के धुएं के सपर्क में आते हैं, तो यह स्थिति उनकी सेहत के लिए भी अत्यत नुकसानदेह होती है।
  • 15 से 20 वर्षो तक तबाकू का सेवन करने से कैंसर पनपने की सभावनाएं बढ़ जाती है।
  • स्कूलों के पाठ्यक्रमों में 'कैंसर शिक्षा' को शामिल कर तम्बाकू से होने वाले नुकसान का प्रचार किया जा सकता है।
  • कैंसर रोगियों को अपने आहार में आवश्यक सुधार करना चाहिए। उन्हें भोजन में एंटीऑक्सीडेंट्स युक्त फलों व सब्जियों को वरीयता देनी चाहिए
  • फाइबर युक्त यानी रेशेदार आहार का भी पर्याप्त मात्रा में सेवन करना लाभप्रद है ताकि आतों की क्रिया का सचालन बेहतर ढंग से हो सके। आतों के सुचारु सचालन के कारण ही शरीर से नुकसानदेह पदार्थ मल के जरिए बाहर निकलते हैं।
  • तम्बाकू छोड़ने के लिये-पूरी दूनियां में तम्बाकू छोड़ने की कोई जादुई या चमत्कारिक दवाई नहीं है तम्बाकू छोड़ने के लिये दृढ़ इच्छाशक्ति का होना आवश्यक है। धूम्रपान/तम्बाकु छोड़ने से होने वाले लाभों के बारे में विचार कर स्वयं को शक्ति देवें। तम्बाकु छोड़ने के लिये निकोटीन की तलब को पूरी करने के लिये निकोटिन की च्यूगंगम या निकोटिन टेबलेट आती है इनका प्रयोग भी डाॅक्टर की सलाह से किया जा सकता है।
  • धूम्रपान करने वाली अपनी मित्र-मण्डली को छोड़ देवें ।
  • जब भी तलब लगें अपना ध्यान किसी और वस्तु पर लगाये कभी भी खाली न रहे।
  • अप्रतिदिन योग-प्राणायाम करें, जिससे इच्छाशक्ति मजबूत हो व तम्बाकु से पहले हो चुकी हानि की क्षतिपूर्ति हो।

तम्बाकू छोड़ने के लिए

  • दृढ़ सकल्प: 'मैं कल से सिगरेट छोड़ दूंगा।' का कल कभी नहीं आता। यह सकल्प आपको आज और अभी करना होगा। यदि तम्बाकू से होने वाले खतरों के बारे में आप सोचें तो यह प्रक्रिया दृढ़ सकल्प लेने में आपकी मदद कर सकती है।
  • पेय पदार्थो का अधिक सेवन करें। शराब, कॉफी, मीठी चीजों व अधिक कैलोरी वाली चीजों का सेवन कम करें।
  • कम कैलोरी वाली चीजों का सेवन अधिक करें।
  • चबाने वाली कुछ अन्य चीजों से तम्बाकू की लत को छोड़ा जा सकता है। इस बारे में आप नाक, कान, गला विशेषज्ञ से जानकारी हासिल कर सकते हैं।
  • व्यायाम व प्राणायाम करें।
  • परिजनों व मित्रों का सहयोग भी इस लत को छोड़ने में बहुत जरूरी है।
  • घर में सिगरेट अथवा गुटखा का एक भी पैकेट न रखें।
  • एक कापी में प्रतिदिन 8 से 10 बार लिखें कि मैं तम्बाकू, गुटखे या सिगरेट का सेवन नहीं करूंगा।
  • सिर्फ एक सिगरेट आज पी लेता हूं, इसके बाद फिर कभी नहीं पियूंगा'- यह सोच आपकी दुश्मन है। यह सोच आपको कभी भी सिगरेट नहीं छोड़ने देगी। इसलिए दोबारा एक भी सिगरेट न पिएं

धूम्रपान एवं तम्बाकू छोड़ने के लिए आयुर्वेदिक उपचार-substance abuse treatment,

    • बराबर मात्रा में 100 ग्राम सौंफ, 100 ग्राम अजवायन तथा 75 ग्राम काला नमक तथा दो नींबू का रस लेकर सबसे पहले काला नमक पीसकर उसमें नींबू मिला लेवें, आवश्यकतानुसार थोड़ा पानी भी मिला सकते हैं।
    • तदोपरान्त सौंफ व अजवायन को एक बर्तन में डालकर काला नमक मिला नींबू रस मिलाकर भून लेवें।यह औषधि बनाकर रख लेवें तथा जब भी तम्बाकू की तलब लगे थोड़ी सी मात्रा लेकर मुंह में रखकर चूसे इससे बीड़ी, सिगरेट की तलब धीरे-धीरे कम हो जायेगी तथा तम्बाकू की आदत को छोड़ा जा सकता है

      कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षण-What is The Colon Cancer in Hindi

       
      कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षण-What is the colon cancer,

      कोलोरेक्टल कैंसर-Colorectal Cancer in Hindi,

      आइये जानते है कैंसर के बारे में,लक्षण-What is Colorectal cancer,

      कोलोरेक्टल कैंसर जिसे आमतौर पर बड़ी आंत का कैंसर भी कहते है। ये कैंसर बडी आंत (कोलन) में या फिर रेक्टम में होता है।  कोलोरेक्टल कैंसर (कोलो से आशय बड़ी आंत और रेक्टल से आशय मलाशय रेक्टम से है) को पेट का कैंसर या बड़ी आंत का कैंसर भी कहा जाता है।

      कोलो और रेक्टल, हमारे पाचन तंत्र के सबसे से निचले हिस्से में पाया जाता है। आमतौर पर 50 साल से ज्यादा उम्र के लोग इस कैंसर का शिकार होते हैं। समय रहते अगर इस कैंसर के लक्षणों को पहचान लिया जाएं तो रोगी की जान को बचाया जा सकता है

      शुरूआत में इसके लक्षणों में कमजोरी, थकान, सांस लेने में तकलीफ, आंतों में परेशानी, दस्त या कब्ज की समस्या, मल में लाल या गहरा रक्त आना, वजन सामान्य से कम होना, पेट दर्द, ऐंठन या सूजन शामिल है। वैसे तो कोलोरेक्टल कैंसर होने के कई कारण है लेकिन आज की अनियमित जीवनशैली और खाने की आदतें इसके होने की मुख्य वजह है।
      ज्यादा रेड मीट (5 आउसं से ज्यादा प्रतिदिन ), धूम्रपान, खानपान में फल और सब्जियों को कम शामिल करना, फाइबर युक्त आहार न लेने जैसे कई कारक कोलोरेक्टल कैंसर को बढ़ा रहे है।

      कोलोरक्टेल कैंसर के लक्षण चरण

      कोलोरक्टेल कैंसर का टयूमर 4 चरणों से गुजरता है। जिसमें ये बाउल की अदंरूनी लाइनिगं में शुरू होता है और अगर समय पर इलाज न किया जाये तो ये कोलन के मसल वॉल से होते हुये लिम्फ नोडस तक चला जाता है। और आखिरी स्टेज में यें रक्त में मिलकर दूसरे अंगो जैसे कि फेफेड़ो, लीवर में फैल जाता है और इस स्टेज को मटेास्टेटक कोलोरेक्टल कैंसर (एम सीआरसी) कहते है। जितनी जल्दी कैंसर की पहचान हो जायें उतना ही उपचार आसान हो जाता है।

      अगर कैंसर का पहले ही स्टोज में पता चल जाये तो 90 प्रतिशत तक इसका उपचार संभव है और दूसरे स्टेज में 70-80 प्रतिशत तक, तीसरे स्टेज में 50-60 प्रतिशत आरै चौथे स्टजे में 30-50 प्रतिशत तक सभंवना होती है। लेकिन भारत में लोगों को इस कैंसर के बारें में जानकारी बहुत कम है जिसके कारण कैंसर के शुरूआत में ही इसका पता चलना काफी मुश्किल हो जाता है।

      हालंकि दवाइयों के नये प्रयागों के साथ मरीज की जरूरत आरै बीमारी को देखाते हुए कैंसर के नये इलाज ढुंढे जा रहे है। जिसमें व्यक्तिगत रूप से मरीज के कैंसर के जैविक लक्षणों की पहचान की जाती है और फिर उसी के अनुसार इलाज की थेरेपी इस्तेमाल की जाती है और इस तरह की व्यक्तिगत पद्वति कोलेकर विशेषज्ञ भी एकमत है कि इससे भविष्य में कैंसर के इलाज को नई दिशा मिलेगी।

      नई दिल्ली स्थित सर गगंराम अस्पताल के सीनियर कंस्लटेंट और मेडिकल कॉलेज के चेयरपर्सन डा. श्याम अग्रवाल के मुताबिक, टार्गेट थेरेपी में बॉयामेककर टेस्टिंग जैसे कि ओरएएस का भविष्य बहुत अच्छा है क्योकि इसमें केवल कैसंर प्रभावित कोशिकाओं का इलाज किया जाता है जो बहुत बहे तरीन तरीका है जबकि पारपं रिक थेरेपियों में उन सभी की शंकाओं को नष्ट कर दिया जाता है जो तेजी से बढ़ती है। पारम्परिक कैं सर इलाज में कीमोथेरेपी दवाइयों के जरिये शरीर से उन सभी शंकाओं को खत्म किया जाता है जो तेजी से विभाजित हो रही होती है।

      कीमोथेरेपी दवाइयां सामान्य कोशिकाओं और कैंसर की शंकाओं में अतंर नहीं कर पाती इसलिए इसके कई साइड इफैक्टस देखने को मिलते है। इसके विपरीत टार्गेट थेरेपी में टयूमर कोशिकाओं को टार्गेट करके उन्हें खत्म किया जाता है। 8 टार्गेट थेरेपी में व्यक्तिगत रूप से बॉयामे वर्कर के जरिये मरीज की पहचान कर उसे दवाइयां दी जाती है।

      इससे दवाइयां काफी प्रभावकारी काम करती है। ब्रेस्ट कैंसर, कोलोरक्ेटल कैसंर, फेफेडों के कैंसर जैसी बीमारियों में टार्गेट थेरेपी काफी कारगर साबित हुई है।

      कोलोरेक्टल कैंसर का निदान

      डा.अग्रवाल के मुताबिक, जिन मरीजों को कोलोरक्टल कैंसर के साथ के आर ए एस जीन युटटिड होते है उनमें टार्गेट थेरेपी काम नहीं करती। इसलिये इी जी एफ आर पॉजिटव मरीजों की के आर ए एस जीन का भी टेस्ट किया जाना चाहिये ताकि ये पता चल सकें कि इ जी एफ आर ब्लॉकर काम करेंगे या नही। काले न कैंसर में के आर ए एस जीन के टेस्ट सेे कंसै र का इलाज जीन पर आधारित हो जायेगा जिससे मरीज का उसी के अनुकलू इलाज करने में मदद मिलगी और इससेे मरीज का व्यक्तिगत रूप से कैंसर का इलाज सभंव हो पायगा।

      टार्गेट थेरपी

      टार्गेट थेरपी में मरीज को चुनना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। 50 से 70 प्रतिशत कालोरक्टल कैंसर में के आर ए एस जीन की म्यटू श्न नही होता है। ऐसे मरीजों में ई जी एफ आर ब्लाकॅर इलाज अच्छी प्रतिक्रिया दिखाते है। 

      अगर इलाज से पहले के आर ए एस की जाचं कर ली जाय तो यें पता चल जायेगा कि टार्गेट थेरेपी कितनी सफल रहेगी। टार्गेट थेरपी अकेले या पारंपरिक थेरेपियों का मिश्रण कैंसर के इलाज में उभरकर आ रहा है। इस तरह की टार्गेट थेरेपी ज्यादा प्रभावी होने के साथ कम साइड इफैक्स और मरीज का जीवन सुनिश्चित करती है।

      जीन टेस्ट करने से कैसंर का इलाज सही मायनें में व्यक्तिगत रूप से होता है। डा. अग्रवाल का कहना है, ऐसा समय जल्द ही आने वाला है जब हम टार्गेट थेरेपी को मौलिक इलाज के तौर तरीकों में शामिल करेंगे अनुवांशिक टेस्ट करने से कैंसर जैसे रागे का इलाज करने में टार्गेट थेरपी मे और अधिक मदद मिलेगी।

      मन्मथ रस के फायदे,Health Benefits of Manmath Ras in Hindi,

      यौन दौर्बल्य और यौन व्याधियों दूर करने के लिए पौष्टिक पदार्थों का सेवन करने के साथ किसी भी उत्तम आयुर्वेदिक योग का सेवन अवश्य करना चाहिये एसे बहुत से नवविवाहित युवकों कीसंख्या बहुत अधिक है जो इसके लिए इलाज पूछते हैं  यह योग उन्हीं रोगियों के लिए है 
      मन्मथ रस के सेवन से नपुंसकता, नामर्दी, शीघ्रपतन आदि नष्ट होकर काम-शक्ति की वृद्धि होती है। विलासी परूषों के लिए हमेशा स्तम्भक (बाजीकरण) संबंधी औषधीयों की तलाश में घूमते रहते हैं, उनके लिए यह बहुत काम की चीज है। बलवर्द्धक और रसायन भी है। शीघ्रपतन में यह रस उत्तम लाभ करता है। यह शुक्र विकार (वीय्र का पतलापन) दूर कर वीर्य को गाढ़ा कर देता है तथा बीजवाहिनी नाड़ियों में खून का संचार कर उसमे दृढ़ता उत्पन्न करता है। स्नायु दुर्बलता के कारण मानसिक अवसाद के कारण हुए ध्वजभंग दोष को मिटाने में भी यह अत्यन्त गुणकारी है।

      मन्मथ रस के घटक द्रव्य :-
      • शुद्ध पारद व् शुद्ध गन्धक , चालीस -चालीस ग्राम , अभ्रक भस्म बीस ग्राम l शुद्ध कपूर , 
      • बंग भस्म और लौह भस्म -दस दस ग्राम l ताम्र भस्म पांच ग्राम l विधारा की जड़ , जीरा , विदारी कंद , 
      • शतावरी , ताल मखाना , बला की जड़ , कौंच के बीज शुद्ध किये हुए छिलका रहित बीज , 
      • अतीस , जावित्री , जायफल , लोंग , भांग के बीज , अजवायन , और 
      • सफ़ेद राल --ये सब तीन - तीन ग्राम
      मन्मथ रस के निर्माण विधि :
      भस्मों के साथ पारद व् गन्धक को खरल में डालकर इतनी देर तक घुटाई करें कि सब मिल कर एक जान हो जाएँ  विधारा की जड़ आदि सभी द्रव्यों को अलग - अलग कूट पीस छान कर खूब महीन चूर्ण कर लें और घुटी हुई भस्मों वाले मिश्रण में मिलाकर थोड़ी देर तक घुटाई करके सब द्रव्यों को एक जान कर लें और अंत में जल का छींटा मार कर फिर घुटाई करें और फिर दो - रत्ती वजन की गोलियां बना कर खूब अच्छी तरह सुखा कर शीशी में भर कर रख लें

      मन्मथ रस के मात्रा और सेवन विधि :
      एक गिलास दूध उबाल कर ,उतार कर हल्का ठण्डा करके इस मन्मथ रस की एक गोली सुबह खाली पेट लें इसी प्रकार एक गोली दूध के साथ रात को भोजन करने के दो घंटे बाद सोते समय लें
      यदि रोगी मधुमेह का रोगी है तो वह इसे फीके दूध के साथ लें

      मन्मथ रस का उपयोग
      इस योग के सेवन से नपुंसकता ( नामर्दी ) यौनांग की शिथिलता , शीघ्रपतन , आदि व्याधियाँ दूर होती हैं पर्याप्त यौन शक्ति , वीर्य स्तम्भन शक्ति और यौनांग की कठोरता वाली स्थिति पुन: प्राप्त हो जाती है जो विलासी लोग अविवाहित जीवन में यौन क्रीडा करके और विवाहित जीवन में अति सहवास कर अपनी यौन शक्ति नष्ट कर चुके है उन्हें इस मन्मथ रस का सेवन तीन या चार महीने तक लगातार करना चाहिए 
      विलासी पुरूष इस रस का सेवन नियमपूर्वक रात को सोने से एक घण्टा पहले दूध के साथ करके, स्त्री-प्रसंग करने से अपूर्व आन्नद मालूम होता है और किसी प्रकार का नुकसान भी नही होता। इसका नियमित लगातार कुछ अधिक समय तक सेवन करने से इन्द्रियों की शक्ति बढ़ती है।
      •  यौन ताकत की कमी
      • वीर्यवाहिनी नाड़ियों की कमजोरी
      • नपुंसकता (Impotence)
      • नामर्दी (Erectile Dysfunction)
      • शीघ्र पतन (Premature ejaculation/Early Discharge)
      • वीर्य का पतला होना
      • शरीर को पुष्ट बनाने तथा शक्ति बढ़ाने के लिए इस रसायन का प्रयोग किया जाता है। इसके सेवन से शुक्र बहुत जल्दी बनता है
      • शरीर में रक्त की वृद्धि हो, शरीर कान्तिवान और पुष्ट हो जाता है। 
      • स्त्रियों के श्वेत प्रदर, गर्भाशय की कमजोरी, बीज कोषों की स्थिलता आदि नष्ट होकर उन्हे स्वस्थ एवं गर्भ धारण योग्य बना देता है।

      सेवन विधि और मात्रा Dosage of Manmath Ras

      • 1 गोली, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें। इसे गाढ़े किये हुए दूध के साथ लें। इसे भोजन करने के बाद लें।

      मन्मथ रस का महिलाओं को लाभ

      महिलाओं के लिए भी यह समान उपयोगी है  इसके सेवन से श्वेत प्रदर रोग , गर्भाशय की कमजोरी , बीज कोशों ( ओवरीज ) की शिथिलता आदि नारी रोग दूर होते हैं और वें स्वस्थ बनी रहती है

      यह दवा किसी आयुर्वेदिक स्टोर से भी खरीद सकते है 

      NOTE-किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें

      कामदेव घृत,Kamdev Ghrita in Hindi,

      कामदेव घृत एक आयुर्वेदिक घृत या घी है। यह घी पुरुषों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। इसके सेवन से शरीर में ताकत आती है। यह वाजीकारक है और यौन इच्छा को बढ़ाता है। इसका नियमित सेवन नाड़ियों की कमजोरी के कारण होने वाली नपुंसकता को दूर करता है। यह घी, स्पर्म संख्या की बढ़ोतरी में भी

      सहयोग करता है। इसी प्रकार महिलाओं द्वारा इसका सेवन फर्टिलिटी को बढ़ाता है। यह घी पौष्टिक होने के साथ-साथ शरीर के भीतर की रूक्षता को दूर करता है और कब्ज़ से राहत देता है। यह पाचक और बस्ती को शुद्ध करता है। यह धातुक्षीणता को दूर करता है और शरीर को सबल बनता है। यह वज़न को बढ़ाता है और शरीर में शक्ति और कांति देता है।

      कामदेव घृत के घटक 
      • अश्वगंधा, गोखरू, बरियार, गिलोय, सरिबन, विदारीकन्द, शतावर, सोंठ, गदहपूर्ण, पीपल की कोपल, गंभारी के फूल, कमलगट्टा, उडद, गाय का घी, गन्ने का रस, मेदा, महामेदा, जीवक, ऋषभक, काकोली, क्षीरकाकोली, ऋद्धि, वृद्धि कूठ, पद्माख, लाल चन्दन, तेजपात, छोटी पीपल, मुनक्का, केवांच बीज, नील कमल, नागकेशर, अनन्तमूल, बरियार, मिश्री

      कामदेव घृत के लाभ

      • इसके सेवन से नसों की कमजोरी के कारण होने वाली नपुंसकता दूर होती है।
      • यह कम वज़न या दुबलेपन की समस्या को दूर करता है।  यह अत्यंत पौष्टिक है।
      • यह स्निग्ध है और आन्तरिक रूक्षता दूर करता है।
      • यह वज़न, कान्ति, और पाचन को बढ़ाता है।
      • यह कब्ज़ से राहत देता है।
      • यह दिमाग, नसों, मांस, आँखों, मलाशय आदि को शक्ति प्रदान करता है।
      • यह धातुओं को पुष्ट करता है।
      • यह पित्त विकार को दूर करता है।

      कामदेव घृत के चिकित्सीय उपयोग 

      कामदेव घी, पौष्टिक, बलवर्धक, रसायन है। यह उत्तम वाजीकारक है और यौन क्षमता में सुधार लाता है। यह शरीर में बढ़े पित्त को भी कम करता है। कमजोरी, कम वज़न, यौन इच्छा की कमी नसों की कमजोरी, नपुंसकता रक्त पित्त, वातरक्त वीर्य क्षय खून की कमी मूत्रकृच्छ पसली में दर्द

      सेवन विधि और मात्रा

      • 6-12 gram दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
      • घी को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर लें।
      • इसे दूध अथवा गर्म पानी के साथ लें। या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।


      कृपया ध्यान दें, आयुर्वेदिक दवाओं की सटीक खुराक आयु, ताकत, पाचन शक्ति का रोगी, बीमारी और व्यक्तिगत दवाओं के गुणों की प्रकृति पर निर्भर करता है।

      मोटापा, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल में एहतियात के साथ इस दवा का उपयोग करना चाहिए।

      यह दवा किसी आयुर्वेदिक स्टोर से भी खरीद सकते है 

      NOTE-किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें

      नशा छुड़ाने के उपाय,Alcohol Treatment,drug Addiction Treatment



      आज हमारे समाज में युवा पीढ़ी को नशे के ओर अग्रसर होते देख किसे दुःख नहीं होता | दुर्भाग्य से पिछले पांच सालों में यह बुराई बुरी तरह बढती जा रही है कुछ लोग अपनी मर्जी से नशा करते हैं कुछ शोकिया होते हैं जो बाद में अपने आप को नशे की आग में झोंक देते हैं परन्तु कुछ कुसंगति के कारण इस लत का शिकार हो जाते हैं

      हमारे और आपके बच्चे भी इसके शिकार हो सकते हैं | हर कोई इस बुरी लत से अपने बच्चों और अन्य सदस्यों को बचाना चाहेगा | खुद नशे की लत के शिकार कुछ लोग यही चाहते हैं की किसी तरह से इस लत से छुटकारा मिल जाए परन्तु उनका इस पर कोई वश नहीं | नशा व्यक्ति की रगों में पहुँच कर व्यक्ति को अपना गुलाम बना लेता है व्यक्ति मानसिक रूप से पंगु हो जाता है

      Alcohol Rehab help,Drug Rehabilitation,Alcohol Treatment,Alcohol Rehab,

      यदि हर माँ बाप को यह भान हो जाये जिनका बच्चा नशा कर रह है | तो शायद कुछ जिंदगियां बचा सकें मेरा अभिप्राय केवल इंतना है | कि घरवालों को इसकी खबर ही नही लग पाती कि कब और कैसे उनके परिवार का सदस्य नशा करने लग गया है | नशे की लत्त को छुड़ाने के लिय सरकार ने नशा मुक्ति केन्द्र खोल रखे हैं | पता चलते ही वहां से मदद लेनी चाहिए |

      यथासंभव यह प्रयास करना चाहिये जो कि नशा मुक्ति के लिए सीधा और सरल रास्ता है | मेरा यह लेख उन लोगो के लिए है जो नशा छोड़ना चाहते है लेकिन छोड़ नही पाते नशे का संबंध मन मस्तिष्क से है |

      शराब पीना और विशेषरूप से धूम्रपान के साथ शराब पीना बहुत ही खतरनाक है | इससे अनेकों रोग जैसे कैंसर (मुह का ), महिलाओं में स्तन कैंसर, आदि रोग होते है | ऐसे बुरे व्यसन (आदत) एक मानसिक बीमारी है और इसे को छुडाने के लिए मानसिक बीमारी जैसे इलाज की आवश्यकता होती है | वात होने पर लोग चिंता और घबराहट को दबाने के लिए धूम्रपान का सहारा लेते है | पित्त बढने से शरीर के अन्दर गर्मी लेने की इच्छा होती है और धूम्रपान की इच्छा होती है | कफ बढने से शरीर के अन्दर डाली गयी तम्बाकू की शक्ति बढती है |

      नशीली दवाओं के नुकसान,Loss drug

      ऐसे लोगों का प्रतिशत काफी अधिक है, जो मानसिक तनाव से मुक्ति के लिए नशीली दवाएं लेते हैं। उनके सेवन से प्रारम्‍भ में तो राहत सी महसूस होती है, लेकिन अंत बेहद बुरा होता है। एक ओर जहां ऐसे लोग अनेक शारीरिक व्‍याधियों के शिकार हो जाते हैं, वही हिंसा और गुनाह की प्रवृत्ति के चपेट में आने से स्‍वयं को तथा परिवार को संकट में डाल देते हैं।

      • नशीली दवा के रूप में बेहद मशहूर हशीश के धुंए में सिगरेट की तुलना में पांच गुना ज़्यादा कार्बन मोनो ऑक्साइड और तीन गुना ज्यादा टार होता है। कार्बन मोनोऑक्साइड बगैर रंग और गंध वाली गैस होती है, जो रोगी की जान भी ले सकती है।
      • कोकेन या क्रेक की आदत डालने के लिए इसका एक बार सेवन भी काफी होता है। इसका जरूरत से ज़्यादा डोज लेने पर हार्ट अटैक की आशंका होती है, जिससे व्‍यक्ति की मौत भी हो सकती है।
      • नशीली दवाओं के सेवन से रोगी को बहुत ही गंभीर किस्म का डीहायड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) हो सकता है। इनके अलावा इसके सेवन से किडनी की बीमारी या अवसाद (Depression) भी होता है।
      • नशीली दवाएं रोगी के निर्णय लेने की क्षमता पर असर डालती हैं। इसकी वजह से रोगी असुरक्षित सेक्स संबंध बनाने का ज़ोखिम उठा लेते हैं, जिससे एड्स की संभावनाएं भी बलवती हो जाती हैं।
      • तंबाकू – तंबाकू में निकोटिन,कोलतार,आर्सेनिक और कार्बन मोनो आक्साइड जैसी अत्यंत खतरनाक गैसें होती हैं इसके सेवन से तपेदिक, निमोनिया और सांस की बीमारियों सहित मुख, फेफड़े और गुर्दे में कैंसर होने की संभावनाएं रहती हैं। इससे उच्च रक्तचाप की शिकायत भी रहती है। 
      • अफीम, चरस, हेरोइन तथा स्मैक आदि से व्यक्ति पागल तथा सुप्तावस्था में आ जाता है। 
      • शराब – शराब के सेवन से लिवर खराब हो जाता है| 
      • कोकीन, चरस, अफीम से ऐसे उत्तेजना लाने वाले पदार्थ है जिसके प्रभाव में व्यक्ति अपराध कर बैठता है। 
      • धूम्रपान- करता है तो उसका बुरा प्रभाव भी हमारे शरीर पर पड़ता है। इसलिए न खुद धूम्रपान करें और न ही किसी को करने दे

      लत के लक्षण,Symptoms of addiction

      अगर नीचे दिए गए लक्षण नजर आने लगें तो समझ लेना चाहिए कि इंसान को निकोटिन की लत लग
      चुकी है
      • भूख कम महसूस होना।
      • अधिक लार और कफ बनना।
      • प्रति मिनट दिल की धड़कन 10 से 20 बार बढ़ जाती है तो यह लत का लक्षण है।
      • छोटी बात पर भी बेचैनी महसूस होना।
      • ज्यादा पसीना आना और उल्टी-दस्त होना।
      • हर काम करने के लिए तंबाकू की जरूरत महसूस होना।
      • निकोटीन लेने की इच्छा बढ़ जाना।
      • चिंता बढ़ना, अवसाद, निराशा आदि महसूस होना।
      • सिर दर्द होना और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होने लगे तो भी इसे निकोटिन की लत का लक्षण माना जाता है।

      लत लगने का कारण,The cause of addiction

      जब कोई सिगरेट या बीड़ी पीता है तो ब्रेन में लगभग 10 सेकंड और उसके बाद सेंट्रल नर्वस सिस्टम में 5
      मिनट तक निकोटिन का असर रहता है। हालांकि स्मोकिंग करने से थोड़ी देर के लिए काम करने की क्षमता बढ़ती है, लेकिन बाद में शरीर सुस्त होने लगता है। धीरे- धीरे काम करने की क्षमता कम होती जाती है और फिर धूम्रपान की जरूरत महसूस होती है। बार-बार इस तलब को मिटाने की कोशिश में इंसान चेन स्मोकर
      हो जाता है

      लत छुड़ाने के उपाय,Drug Addiction Treatment Programs,Alcohol Rehabilitation

      तंबाकू से संबंधित नशे से मुक्ति पाने के लिए नीचे लिखी आयुर्वेदिक दवाओं का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इन दवाओं का इस्तेमाल करने से धूम्रपान करने वालों को काफी फायदा मिलता है।

      • 2 ग्राम फिटकरी का फूला, 3 ग्राम गोदंती भस्म और 15 पत्ते सत्व सत्यानाशी का मिश्रण बनाकर पाने के पत्ते में डालकर चबाएं।
      • अदरक के टुकड़े कर लो छोटे छोटे और उस मे नींबू निचोड़ दो थोड़ा सा काला नमक मिला लो और इसको धूप मे सूखा लो सुखाने के बाद जब इसका पूरा पानी खतम हो जाए तो इन अदरक के टुकड़ो को अपनी जेब मे रख लो जब भी दिल करे गुटका खाना है तंबाकू खाना है बीड़ी सिगरेट पीनी है तो आप एक अदरक का टुकड़ा निकालो मुंह मे रखो और चूसना शुरू कर दो और यह अदरक ऐसे भी अदभुत चीज है आप इसे दाँत से काटो मत और सवेरे से शाम तक मुंह मे रखो तो शाम तक आपके मुंह मे सुरक्षित रहता है इसको चूसते रहो आपको गुटका खाने की तलब ही नहीं उठेगी तंबाकू सिगरेट लेने की इच्छा ही नहीं होगी शराब पीने का मन ही नहीं करेगा जैसे ही इसका रस लार मे घुलना शुरू हो जाएगा आप देखना इसका चमत्कारी असर होगा आपको फिर गुटका तंबाकू शराब –बीड़ी सिगरेट आदि की इच्छा ही नहीं होगी सुबह से शाम तक चूसते रहो और आप ने ये 10 -15 -20 दिन लगातार कर लिया तो हमेशा के लिए नशा आपका छूट जाएगा .
      • मुलहठी और शरपुंखा सत्व का मिश्रण कत्थे की तरह पान पर लगाकर 15 दिन तक रोज सुबह नाश्ते के बाद लें।
      • 4 ग्राम आमली चूर्ण, 10 ग्राम भुनी हुई सौंफ, 4 ग्राम इलायची के बीज, 4 ग्राम लौंग, 2 ग्राम मधुयष्ठी, 1ग्राम सोनामाखी भस्म, 10 ग्राम सूखा आंवला, 7-8 खजूर और 20 मुनक्का मिलाकर पीस लें। एक पैकेट में अपने साथ रखें। जब नशे की तलब महसूस हो तो एक चुटकी मुंह में डाल लें। धीरे- धीरे नशे से मन हट जाएगा।
      • बड़ी सौफ को घी में भुनकर चबाने से सिगरेट से नफरत होने लगती है। ऐरोबिक से भी सिगरेट की तलब कम होती है।
      • मुंह में गाजर, लौंग, इलायची, चिंगम जैसी वस्तु मुंह में रखें। इससे सिगरेट की तलब कम होती है 
      • मुद्रा, ध्यान और योगाभ्यास

      किसी प्रकार की लत होने से व्यक्ति का आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है। सिगरेट, तंबाकू,गुटखा, पान मसाला जैसे नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले भी अगर मुद्रा, ध्यान और योगाभ्यास करते हैं तो उनका आत्मबल बढ़ता है।ऐसे में इन लतों को त्याग पाने की इच्छा शक्ति उनके अंदर पैदा होती है।

      ज्ञान मुद्रा ,Knowledge exchange,

      दाहिने हाथ के अंगूठे को तर्जनी के टिप पर लगाएं और बायीं हथेली को छाती के ऊपर रखें। सांस सामान्य रहेगा। सुखासन या पद्मासन में बैठकर भी इस क्रिया को किया जा सकता है। लगातार 45 मिनट तक करने से काफी फायदा मिलता है।

      ध्यान,attention

      ध्यान करने से शरीर के अंदर से खराब तत्व बाहर निकल जाते हैं। एकाग्रता लाने के लिए त्राटक किया जाता है। इसमें बिना पलक झपकाए प्रकाश की लौ को लगातार देखने का अभ्यास किया जाता है। एक समय ऐसा आता है जब बस बिंदु दिखाई देता है। ऐसी स्थिति में कुछ समय तक रहने की कोशिश करनी चाहिए।

      कुंजल क्रिया,Kunjl action

      नमक मिला गुनगुना पानी भरपेट पीकर इसकी उल्टी कर दें। इससे पेट के ऊपरी हिस्से का शुद्धिकरण
      हो जाता है। बस्ती: इस क्रिया के माध्यम से शरीर के निचले हिस्से की सफाई की जाती है। इसे एनीमा भी कहते हैं।

      अर्द्ध शंख प्रक्षालन

      यह बड़ी आंत की सफाई और कब्ज मिटाने के लिए किया जाता है। इसमें चार लीटर गुनगुने पानी में स्वाद के मुताबिक नमक मिला लें। पानी को पांच भागों में बांटकर बारी-बारी से पीएं और क्रमश

      दोस्तों एक बार जरूर पढ़े शराब पीने की हानि।
      शायद आप यह पढकरअपने परिवार और बच्चों की खातिर पीना छोड़ देंगे 
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      यदि आप लोग मेरी बात से सहमत है तो इसे जरूर शेयर करे शायद किसी का परिवार बिखरने से बच जाय धन्यवाद मित्रों

      Saturday, February 09, 2019

      चुकंदर के औषधीय गुण-Health Benefits of Beetroot in Hindi,Beet juice Benefits

      चुकंदर के औषधीय गुण-Health Benefits of Beetroot in Hindi,beetroot juice,beet juice benefits
      गुणों से भरपूर- सोडियम पोटेशियम, फॉस्फोरस, क्लोरीन, आयोडीन, आयरन और अन्य महत्वपूर्ण विटामिन पाए जाते है इसे खाने से हिमोग्लोबिन बढ़ता है। हर्बल जानकार चुंकदर को कैंसर जैसे भयावह रोग से ग्रसित रोगी को खिलाने की सलाह देते हैं। इनका मानना है कि चुकंदर कैंसर नियंत्रण में काफी मददगार होता है, चुकंदर का सेवन अधिक उम्र वालों में भी ऊर्जा का संचार करता है। इसमें एंटीआक्सीडेंट पाए जाते हैं। जो हमेशा जवान बनाएं रखते हैं। 
      Health Benefits of Beetroot आदिवासी हर्बल जानकार चुकंदर सेवन की सलाह गर्भवती महिलाओं को देते हैं। इनके अनुसार चुकंदर का सेवन महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान भी करना चाहिए। यह महिलाओं को ताकत प्रदान करता है और शरीर में रक्त की मात्रा तैयार करने में मददगार साबित होता है। चुकंदर में भरपूर मात्रा में लौह तत्व और फ़ोलिक एसिड पाए जाते हैं जो रक्त निर्माण के लिए मददगार होते हैं।

      चुकंदर के औषधीय गुण

      • एनीमिया में चुकंदर का जूस मानव शरीर में खून बनाने की प्रक्रिया में उपयोगी होता है। आयरन की प्रचुरता के कारण यह लाल रक्त कोशिकाओं को सक्रिय और उनकी पुर्नरचना करता है। यह एनीमिया के उपचार में विशेष रूप से उपयोगी होता है। इसके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
      • त्वचा के लिए फायदेमंद- यदि आपको आलस महसूस हो रही हो या फिर थकान लगे तो चुकंदर का खा लीजिये। इसमें कार्बोहाइड्रेट होता है जो शरीर की एनर्जी बढाता है।सफेद चुकंदर को पानी में उबाल कर छान लें। यह पानी फोड़े, जलन और मुहांसों के लिए काफी उपयोगी होता है। खसरा और बुखार में भी त्वचा को साफ करने में इसका उपयोग किया जा सकता है। 
      • चुकन्दर में ’बिटिन‘ नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में कैंसर तथा ट्यूमर बनने की संभावनाओं को नष्ट कर देता है तथा यह शरीर में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है।
      • चुकन्दर के नियमित सेवन से दूध पिलानेवाली स्त्रियों के दूध में वृद्धि होती है। चुकन्दर का
      • नियमित सलाद खाते रहने से पेशाब की जलन में फायदा होता है। पेशाब के साथ कैल्शियम का शरीर से निकलना बन्द हो जाता है।
      • कब्ज तथा बवासीर में चुकन्दर गुणकारी है। रोज इसके सेवन से कब्ज तथा बवासीर की तकलीफ नहीं रहती। एनीमिया (रक्ताल्पता) में एक कप चुकन्दर का रस दिन में ३ बार लें। सुबह शाम रोज १ कप चुकन्दर का रस सेवन करने से स्मरणशक्ति बढ़ती है। इससे दिमाग की गर्मी तथा मानसिक कमजोरी दूर होती है।
      • एक कप चुकन्दर के रस में एक चम्मच नीबू का रस मिलाकर पीने से पाचन क्रिया की अनियमितताएँ दूर होती हैं तथा उल्टी, दस्त, पेचिश, पीलिया में लाभ होता है। रोजाना सोने से पहले एक कप चुकन्दर का रस पीने से बवासीर में लाभ होता है। चुकन्दर के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट पीने से गेस्ट्रिक अल्सर में फायदा होता है।
      • चुकन्दर के रस में गाजर तथा खीरे का रस मिलाकर सेवन करने से गुर्दे तथा गाल ब्लेडर की सफाई होती है। चुकन्दर का रस एक कप दिन में दो बार पीने से या १०० ग्राम चुकन्दर का नियमित सेवन करने से गुर्दे सम्बन्धी रोगों में फायदा होता है। Health Benefits of Beetroot
      • चुकन्दर के रस में गाजर का रस तथा पपीता या संतरे का रस मिलाकर दिन में २ बार सेवन करने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है। स्त्रियों के गर्भाशय सम्बन्धी रोगों में चुकन्दर विशेष लाभकारी है। बार-बार गर्भपात होता है या कम मासिक आने में बी यह लाभदायक होता है। इसके लिये एक प्याला चुकन्दर का रस सुबह खाली पेट पीना चाहिए।
      • गर्भवती स्त्रियों को चुकन्दर, गाजर, टमाटर तथा सेव का रस मिलाकर पिलाने से उनके शरीर में विटामिन ए.सी.डी तथा लोहे की कमी नहीं हो पाती। यह रक्तशोधन करके शरीर को लाल सुर्ख बनाने में सहायता करता है।
      • दिल की बीमारियां- चुकंदर में नाइट्रेट नामक रसायन होता है जो रक्त के दबाव को काफी कम कर देता है और दिल की बीमारी के जोखिम को भी कम करता है। चुकंदर एनीमिया के उपचार में बहुत उपयोगी माना जाता है। 
      • यह शरीर में रक्त बनाने की प्रक्रिया में सहायक होता है। आयरन की प्रचुरता के कारण यह लाल रक्त कोशिकाओं को सक्रिय रखने की क्षमता को बढ़ा देता है। इसके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और घाव भरने की क्षमता भी बढ़ जाती है।
      • हाई ब्लड प्रेशर में- लंदन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने रोज चुकंदर का जूस पीने वाले मरीजों को अध्ययन में शामिल किया। उन्होंने रोज चुकंदर का मिक्स जूस [गाजर या सेब के साथ] पीने वाले मरीजों के हाई ब्लड प्रेशर में कमी पाई। अध्ययन के मुताबिक रोजाना केवल दो कप चुकंदर का मिक्स जूस पीने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। हालांकि इसका ज्यादा सेवन घातक साबित हो सकता है।
      • कब्ज और बवासीर-चुकंदर का नियमित सेवन करेंगे, तो कब्ज की शिकायत नहीं होगी। बवासीर के रोगियों के लिए भी यह काफी फायदेमंद होता है। रात में सोने से पहले एक गिलास या आधा गिलास जूस दवा का काम करता है।
      • लोग जिम में जी तोड़ कर वर्कआउट करते हैं उन्हें खाने के साथ चुकंदर खाना चाहिए। इससे शरीर में एनर्जी बढती है और थकान दूर होती है। साथ ही अगर हाई बीपी हो गया हो तो इसे पीने से केवल 1 घंटे में शरीर नार्मल हो जाता है Health Benefits of Beetroot
      • आदिवासी एसिडिटी होने पर चुकंदर के जूस के सेवन की सलाह देते हैं। चुकंदर न सिर्फ किडनी की सफाई में मदद करता है बल्कि यकृत को स्वस्थ बनाने में भी मदद करता है।
      • चुकंदर को एंटी एजिंग के लिए एक महत्वपूर्ण और कारगर फार्मुला माना गया है। यह शारीरिक कोशिकाओं को तरोताजा रखने में सहायक तो होता ही है इसके अलावा रक्त संचार को सुचार रखने में बेहतर साबित होता है।

      डायबिटीज/शुगर/मधुमेह के कारण लक्षण,शुगर का घरेलू इलाज,Sugar Treatment in Hindi‎,

      डायबिटीज अब उम्र, देश व परिस्थिति की सीमाओं को लाँघ चुका है। इसके मरीजों का तेजी से बढ़ता आँकड़ा दुनियाभर में चिंता का विषय बन चुका है। ड़ायबीटिज एक बहुत हीं खतरनाक बीमारी है लेकिन अगर आप प्राकृतिक उपायों से इस पर नियंत्रण कर सके तो मधुमेह से आपको घबराने की जरुरत नहीं है। डायबीटिज को समझें और उसका उपचार करें। निम्न कुछ प्राकृतिक उपचार से आप ड़ायबीटिज पर नियंत्रण पा सकते हैं।

      मधुमेह के मुख्य लक्षण

      • थकान, कमजोरी, पैरों में दर्द, क्योंकि ग्लूकोज ऊर्जा में परिवर्तित नहीं हो पाता।
      • पैर का घाव ठीक न होना और गैंग्रीन का रूप ले लेना। 
      • अधिक पेशाब और भूख लगना। 
      • तेजी से वजन गिरना। 
      • बार-बार चश्मे का नंबर बदलना। 
      • जननांगों में खुजली और संक्रमण होना। 
      • हृदय आघात, मस्तिष्क आघात का होना।

      कैसे करें डायबिटीज कंट्रोल, डायबीटिज के उपचार के लिए.Sugar Treatment

      • दालचीनी,-अध्ययन से पता चलता है कि दालचीनी मधुमेह को नियंत्रित करने में बहुत हीं महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दालचीनी लगभग हर घर में पाया जाता है। यह हानिकारक कोलेस्ट्रोल को कम करता है और आपके शरीर में रक्त शर्करा कि मात्रा को भी घटाता है जिससे मधुमेह के रोगियों को बहुत हीं लाभ पहुँचता है। दालचीनी भले हीं मधुमेह का प्राकृतिक उपचार करने में सहायक सिद्ध होता है लेकिन इसका अत्यधिक सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे लाभ कि बजाये नुकसान हो सकता है। आप दालचीनी पीस लें और चुटकी भर चाए में उबालकर दिन में एक दो बार पिया करें। जो लोग मधुमेह के शिकार हो चुके हैं और उसके लिए दवाइयां ले रहे हैं वे दालचीनी का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर कि सलाह अवश्य लें। लेकिन जिन्हें मधुमेह नहीं हुआ है या जो अब तक मधुमेह कि दवाइयां नहीं ले रहे हैं वे अगर दालचीनी का नियमित रूप से सेवन करें तो वे ड़ायबिटिज के शिकार होने से बच सकते हैं।
      • अंजीर के पत्ते-अंजीर के पत्ते कई प्रकार के रोगों के उपचार में लाभ पहुंचाते हैं जैसे ब्रोंकाइटिस, जननांग मौसा, लीवर सिरोसिस, उच्च रक्तचाप इत्यादि। लेकिन मधुमेह के इलाज के लिए अंजीर के पत्ते सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। अंजीर के पत्तों से न सिर्फ मधुमेह का उपचार किया जाता है बल्कि ये पत्ते और भी कई बीमारियों में लाभ पहुंचाते है। इसके पत्ते को उबालकर, छानकर, पानी को ठंढा करके पीया करें।
      • आम के पत्ते-यूँ तो पका हुआ आम मधुमेह के मरीजों के लिए पूरी तरह से वर्जित होता है लेकिन इसके विपरीत आम के पत्ते मधुमेह के मरीजों को काफी लाभ पहुंचाते हैं। आप आम के कुछ ताजे पत्तों को एक ग्लास पानी में उबाल लें और रात भर उसे वैसे हीं छोड़ दें। सुबह होने पर पानी को स्वच्छ कपडे से छान लें और खाली पेट में पी लिया करें। ऐसा नियमित रूप से कई दिनों तक करने से ड़ायबीटीज के मरीजों को काफी फायदा पहुंचता है। यह मधुमेह के लिए एक बहुत हीं प्रभावी प्राकृतिक एवं घेरेलू उपाय है।
      • जामुन की चार-पांच पत्तियां सुबह एवं शाम को खाकर चार-पांच रोज पश्चात शुगर टेस्ट करवायें । आशा से अधिक वांछित परिणाम आयेगें ।
      • नीम की सात से आठ हरी मुलायम पत्तियां सुबह हर रोज खाली पेट चबाकर उसका रस निगल जाये ऐसा नियमित करते रहने से शुगर पर नियन्त्रण बना रहता है, एवं दस-पन्द्रह दिन तक यह प्रयोग करने के बाद आप जरूरत के मुताबिक चाय मिठी और मीठा भोजन भी ले सकते हैं । शुगर आपका कोई भी नुकसान नहीं कर सकती है ।
      • मेथी के बीज-ड़ायबीटिज को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में मेथी के बीज भी बहुत हीं कारगर सिद्ध होते हैं। मेथी के बीज में कुछ ऐसे घटक छिपे होते हैं जो आपके शरीर के भीतर मौजूद रक्त शर्करा को कम करते हैं। इसमें ४ हाईड्रोओक्सीसोल्युसीन नामक अमीनो एसिड होता है। यह अमीनो एसिड आपके अग्न्याशय से इंसुलिन का स्राव उत्तेजित करते हैं जिसकी वजह से आपके रक्त में मौजूद शर्करा इंधन के रूप में बदल जाता है। इस तरह एक ओर जहाँ इस प्रक्रिया से आपको शक्ति एवं उर्जा मिलती है वही दूसरी ओर आपके शरीर में रक्त शर्करा की मात्रा कम होती है। मेथी के बीज में जेनटियानाइन, ट्रीगोनेलीन और कारपाइन नामक घटक भी पाए जाते हैं जो आपके भोजन से कार्बोहाईडरेट का अवशोषण धीमा करते हैं और आपके रक्त प्रवाह में ग्लूकोज की मात्रा घटाते हैं।
      • करेले का रस-ताजे करेले का रस भी ड़ायबीटिज को नियंत्रित करने का एक बहुत हीं प्रभावकारी प्राकृतिक उपचार है। एक छोटे से करेले का बीज निकाल लें और करेले का रस निकलकर रोजाना सुबह सुबह खाली पेट में पीया करें। यह आपके लीवर और अग्न्याशय को स्वस्थ रखता है जिससे कि इंसुलिन का उत्पादन सुचारू रूप से होता रहता है और आपके रक्त में रक्त शर्करा की मात्रा बढ़ने नहीं पाती। 
      • अमरूद का एक या दो स्वच्छ किटाणु रहित पत्तों को थोड़ा कुटकर रात्रि को कांच के गिलास में (पात्र धातु का न हो) या चीनी मिट्टी के प्याले में भिगोकर सुबह खाली पेट पीने से एक माह में ही अनुकूल परिणाम नजर आयेगें ।

      • आयुर्वेद की दवा का जरूर इस्तेमाल करें
      • 100 ग्राम (मेथी का दाना )ले ले इसे धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें
      • 100 ग्राम (तेज पत्ता ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें
      • 150 ग्राम (जामुन की गुठली )लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें
      • 250 ग्राम (बेलपत्र के पत्ते ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें
      • मेथी का दना - 100 ग्राम -तेज पत्ता -100 ग्राम-जामुन की गुठली -150 ग्राम-बेलपत्र के पत्ते - 250 ग्राम तो इन सबका पाउडर बनाकर इन सबको एक दूसरे मे मिला लें ! बस दवा तैयार है इसे सुबह -शाम (खाली पेट ) 1 से डेड चम्मच से खाना खाने से एक घण्टा पहले गरम पानी के साथ लें 2 से 3 महीने लगातार इसका सेवन करें !! (सुबह उठे पेट साफ करने के बाद ले लीजिये कई बार लोगो से सीधा पाउडर लिया नहीं जाता ! तो उसके लिए क्या करें
      • आधे से आधा गिलास पानी को गर्म करे उसमे पाउडर मिलाकर अच्छे से हिलाएँ !! वो सिरप की तरह बन जाएगा ! उसे आप आसानी से एक दम पी सकते है ! उसके बाद एक आधा गिलास अकेला गर्म पानी पी लीजिये

      सावधानी एवं बचने के उपाय

      • सुव्यवस्थित तथा स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली अपनाएँ। 
      • रक्त में शक्कर के स्तर की नियमित जाँच करवाएँ। 
      •  एक आहार विशेषज्ञ द्वारा तय किए गए डाइट चार्ट से मधुमेह पर नियंत्रण रखा जा सकता है। 
      • उचित दवाइयाँ समय पर लें। 
      • कसरत करें और अपने आपको शारीरिक श्रम में व्यस्त रखें।
      • छोटे अंतराल तक पैदल घूमना 
      • 20 मिनट द्रुत गति से पैदल चलना (दिन में दो बार तथा सप्ताह में पाँच बार) 
      • ऐसी कसरत से पैरों में तथा पंजों में रक्त संचार होगा तथा रक्त शिराएँ मजबूत एवं विकसित होंगी। पैदल चलना दिल की धड़कनों के लिए अच्छा होता है।

      घर में समृद्धि लाने हेतु अचूक टोटके और उपाय,GHAR ME SUKH SHANTI KE UPAY,

      घर में समृद्धि लाने हेतु  अचूक टोटके और उपाय
      घर में समृद्धि लाने हेतु  अचूक टोटके और उपाय
      समाज की मान्यताओं के अनुसार घर को मंदिर के समान पवित्र माना जाता है. घर के वातावरण का हमारे दैनिक जीवन पर असर जरूर पड़ता है. साफ़ सुथरा तथा खुशियो से भरा घर किसे अच्छा नहीं लगता. सुख और शांति ऐसी वस्तु है जिससे हम सुख शांति प्राप्त कर सकते है
      • घर में स्थायी सुख-समृद्धि हेतु पीपल के वृक्ष की छाया में खड़े रह कर लोहे के बर्तन में जल, चीनी, घी तथा दूध मिला कर पीपल के वृक्ष की जड़ में डालने से घर में लम्बे समय तक सुख-समृद्धि रहती है और लक्ष्मी का वास होता है।
      • घर में बार-बार धन हानि हो रही हो तों वीरवार को घर के मुख्य द्वार पर गुलाल छिड़क कर गुलाल पर शुद्ध घी का दोमुखी (दो मुख वाला) दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय मन ही मन यह कामना करनी चाहिए की भविष्य में घर में धन हानि का सामना न करना पड़े´। जब दीपक शांत हो जाए तो उसे बहते हुए पानी में बहा देना चाहिए।
      • काले तिल परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर सात बार उसार कर घर के उत्तर दिशा में फेंक दें, धनहानि बंद होगी।
      • घर की आर्थिक स्थिति ठीक करने के लिए घर में सोने का चौरस सिक्का रखें। कुत्ते को दूध दें। अपने कमरे में मोर का पंख रखें।
      • अगर आप सुख-समृद्धि चाहते हैं, तो आपको पके हुए मिट्टी के घड़े को लाल रंग से रंगकर, उसके मुख पर मोली बांधकर तथा उसमें जटायुक्त नारियल रखकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।
      • अखंडित भोज पत्र पर 15 का यंत्र लाल चन्दन की स्याही से मोर के पंख की कलम से बनाएं और उसे सदा अपने पास रखें।
      • व्यक्ति जब उन्नति की ओर अग्रसर होता है, तो उसकी उन्नति से ईर्ष्याग्रस्त होकर कुछ उसके अपने ही उसके शत्रु बन जाते हैं और उसे सहयोग देने के स्थान पर वे ही उसकी उन्नति के मार्ग को अवरूद्ध करने लग जाते हैं, ऐसे शत्रुओं से निपटना अत्यधिक कठिन होता है। ऐसी ही परिस्थितियों से निपटने के लिए
      • प्रात:काल सात बार हनुमान बाण का पाठ करें तथा हनुमान जी को लड्डू का भोग लगाए¡ और पाँच लौंग पूजा स्थान में देशी कर्पूर के साथ जलाएँ। फिर भस्म से तिलक करके बाहर जाए¡। यह प्रयोग आपके जीवन में समस्त शत्रुओं को परास्त करने में सक्षम होगा, वहीं इस यंत्र के माध्यम से आप अपनी मनोकामनाओं की भी पूर्ति करने में सक्षम होंगे।
      • कच्ची धानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें। अनिष्ट दूर होगा और धन भी प्राप्त होगा।
      • अगर अचानक धन लाभ की स्थितियाँ बन रही हो, किन्तु लाभ नहीं मिल रहा हो, तो गोपी चन्दन की नौ डलियाँ लेकर केले के वृक्ष पर टाँग देनी चाहिए। स्मरण रहे यह चन्दन पीले धागे से ही बाँधना है।
      • अकस्मात् धन लाभ के लिये शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार को सफेद कपड़े के झंडे को पीपल के वृक्ष पर लगाना चाहिए। यदि व्यवसाय में आकिस्मक व्यवधान एवं पतन की सम्भावना प्रबल हो रही हो, तो यह प्रयोग बहुत लाभदायक है।
      • अगर आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हों, तो मन्दिर में केले के दो पौधे (नर-मादा) लगा दें।
      • अगर आप अमावस्या के दिन पीला त्रिकोण आकृति की पताका विष्णु मन्दिर में ऊँचाई वाले स्थान पर इस प्रकार लगाएँ कि वह लहराता हुआ रहे, तो आपका भाग्य शीघ्र ही चमक उठेगा। झंडा लगातार वहाँ लगा रहना चाहिए। यह अनिवार्य शर्त है।
      • देवी लक्ष्मी के चित्र के समक्ष नौ बत्तियों का घी का दीपक जलाए¡। उसी दिन धन लाभ होगा।
      • घर में समृद्धि लाने हेतु घर के उत्तरपश्चिम के कोण (वायव्य कोण) में सुन्दर से मिट्टी के बर्तन में कुछ सोने-चांदी के सिक्के, लाल कपड़े में बांध कर रखें। फिर बर्तन को गेहूं या चावल से भर दें। ऐसा करने से घर में धन का अभाव नहीं रहेगा।
      • घर को साफ रखें तथा हमेशा घर में झाड़ू पोछा लगाए. रोजाना झाड़ू पोछा करने से घर में सुख सम्रद्धि बढ़ती है.
      • रात को खाना खाने के बाद जूठे बर्तन ना रखें. इससे घर सुख सम्रद्धि तथा बरकत नहीं आती है. हमेशा बर्तनों को साफ करके ही रखें.
      • जब भी आप सुबह की पूजा करे तो यह पूजा 6 से 8 बजे के बीच में ही करे तथा भूमि पर आसन बिछा कर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके पूजा करे. इससे घर में सुख तथा शांति बनी रहती है.
      • घर में तुलसी का पौधा लगाए तथा जिस गमले में तुलसी का पौधा हो उसमे कोई दूर पौधा ना लगाए. तुलसो को हमेशा घर के पूर्व या उत्तर दिशा में ही लगाए.
      • रात को सोते समय हमेशा दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर सिर कर के सोएं. पूर्व की ओर सिर करने से विद्या की प्राप्ति होती है तथा दक्षिण की ओर सिर करके सोने से आयु तथा धन में बढ़ोतरी होती है.

      सफ़ेद दाग का लक्षण और उपचार -White Spot on Skin Treatment in Hindi,

      सफ़ेद दाग रोग ऐसा हैं कि जिसको एक बार हो जाए तो वो व्यक्ति हीनभावना से तो ग्रसित हो जाता हैं परंतु इलाज के नाम से बहुत ठगा जाता हैं। लोग बढ़ चढ़ कर सही करने का दावा तो करते हैं। परंतु हासिल कुछ नहीं होता। सफ़ेद दाग का उपचार कुछ सालो पहले आयुर्वेद में बहुत आसान था, जब कुछ भस्मों से इसका उपचार योग्य वैद कर दिया करते थे, आज कल भस्मो का सही मिश्रण, सही अनुपात व जानकारी ना होने के कारण इस रोग का सही उपचार नहीं हो पाता। आयुर्वेद में जो उपचार हैं वह थोड़े लम्बे हैं । इसलिए मरीज को धैर्यपूर्वक इसको लगातार जारी रखना पड़ता हैं। हम यहाँ आपको कुछ विशेष उपचार बता रहे हैं, जो बहुत से रोगियों पर सफलता से प्रयोग किया गए हैं।

      सफ़ेद दाग  का उपचार Spots On The Skin,vitiligo cure,vitiligo causes,what causes vitiligo,

      • बावची का तेल और नीम का तेल सामान मात्रा में मिला कर रोग वाली जगह दिन में २ बार लगाना चाहिए और इसके साथ बावची का चूर्ण, तुलसी के पत्तों को सुखा कर बनाया गया चूर्ण और चोपचीनी का चूर्ण समान मात्रा में मिला कर हर रोज़ 3 ग्राम सुबह शाम सादा पानी के साथ ले। और ये चूर्ण लेने के दो घंटे पहले और बाद में कुछ ना खाए। साथ में रात को सोते समय एक चम्मच त्रिफला गुनगुने पाने के साथ ले।
      • सुबह खाली पेट गेंहू के जवारे का रस ज़रूर पिए। आपका ये चर्म रोग कुछ दिनों में गायब हो जायेगा। इसके साथ लौकी का जूस भी सुबह खाली पेट पिए, और इस जूस को बनाते समय इसमें 5-5 पत्ते तुलसी और पुदीने के भी डाल ले।
      • बावची एक ऐसी औषधि है, जिस से आजकल की आधुनिक सफ़ेद दाग की औषधियां भी बनायीं जाती हैं।
      • आठ लीटर पानी में आधा किलो हल्दी का पावडर मिलाकर तेज आंच पर उबालें। जब 4 लीटर के करीब रह जाय तब उतारकर ठंडा करलें । फ़िर इसमें आधा किलो सरसों का तेल मिलाकर पुन: आंच पर रखें। जब केवल तैलीय मिश्रण ही बचा रहे, इसको आंच से उतारकर बडी शीशी में भरले। यह दवा सफ़ेद दाग पर दिन में दो बार लगावें। 4-5 माह तक ईलाज चलाने पर आश्चर्यजनक अनुकूल परिणाम प्राप्त होते हैं।
      • बावची के बीज इस बीमारी की प्रभावी औषधि मानी गई है। 50 ग्राम बीज पानी में 3 दिन तक भिगोवें। पानी रोज बदलते रहें। बीजों को मसलकर छिलका उतारकर छाया में सूखा कर पीस कर पावडर बनालें। यह दवा डेढ ग्राम प्रतिदिन पाव भर दूध के साथ पियें। इसी चूर्ण को पानी में मिलकर पेस्ट बना लें। यह पेस्ट सफ़ेद दाग पर दिन में दो बार लगावें। अवश्य लाभ होगा। दो माह तक ईलाज चलावें।
      • बावची के बीज और ईमली के बीज बराबर मात्रा में लेकर चार दिन तक पानी में भिगोवें। बाद में बीजों को मसलकर छिलका उतारकर सूखा लें। पीसकर महीन पावडर बनावें। इस पावडर की थोडी सी मात्रा लेकर पानी के साथ पेस्ट बनावें। यह पेस्ट सफ़ेद दाग पर एक सप्ताह तक लगाते रहें। बहुत ही कारगर उपचार है।लेकिन यदि इस पेस्ट के इस्तेमाल करने से सफ़ेद दाग की जगह लाल हो जाय और उसमें से तरल द्रव निकलने लगे तो ईलाज कुछ रोज के लिये रोक देना उचित रहेगा।
      • लाल मिट्टी बरडे- ठरडे और पहाडियों के ढलान पर अक्सर मिल जाती है। लाल मिट्टी और अदरख का रस बराबर मात्रा में लेकर घोटकर पेस्ट बनालें। यह दवा प्रतिदिन सफ़ेद दाग के पेचेज पर लगावें। लाल मिट्टी में तांबे का अंश होता है जो चमडी के स्वाभाविक रंग को लौटाने में सहायता करता है और अदरख का रस सफ़ेद दाग की चमडी में खून का प्रवाह बढा देता है।
      • श्वेत कुष्ठ रोगी के लिये रात भर तांबे के पात्र में रखा पानी प्रात:काल पीना भी काफी फ़ायदेमंद होता है।
      • मूली के बीज करीब 30 ग्राम सिरके में घोटकर पेस्ट बनावें और दाग पर लगाते रहने से लाभ होता है।
      • एक मुट्ठी काले चने, 125 मिली पानी में डाल दे सुबह, उसमे 10 गरम त्रिफला चूर्ण डाल दे, 24 घंटे वो पड़ा रहे …ढक के रह दे … 24 घंटे बाद वो चने जितना खा सके चबाकर के खाये…. सफ़ेद दाग जल्दी मिटते है |
      • रोज बथुये की सब्जी खायें। बथुआ उबाल कर उसके पानी से सफेद दाग को धोयें। कच्चे बथुआ का रस दो कप निकाल कर आधा कप तिल का तेल मिलाकर धीमी आंच पर पकायें । जब सिर्फ तेल रह जाये तब उतार कर शीशी में भर लें। इसे लगातार लगाते रहें। ठीक होगा परंतु धैर्य की जरूरत है।
      • अखरोट खूब खायें। इसके खाने से शरीर के विषैले तत्वों का नाश होता है। अखरोट का पेड़ अपने आसपास की जमीन को काली कर देती है ये तो त्वचा है। अखरोट खाते रहिये लाभ होगा।
      • लहसुन के रस में हरड घिसकर लेप करें तथा लहसुन का सेवन भी करते रहने से दाग मिट जाता है।
      • तुलसी का तेल सफेद दाग पर लगायें।
      • नीम की पत्ती, फूल, निंबोली सबको सुखाकर पीस लें । प्रतिदिन एक चम्मच ताजा पानी के साथ लें। कोई भी कुष्ठ रोग का इलाज नीम से सर्व सुलभ है। सफेद दाग वाला व्यक्ति नीम तले जितना रहेगा उतना ही फायदा होगा नीम खायें, नीम लगायें ,नीम के नीचे सोये ,नीम को बिछाकर सोयें, पत्ते सूखने पर बदल दें।
      • पत्ते,निम्बोली, छाल किसी का भी रस लगायें व एक चम्मच पियें। इसकी पत्तियों को जलाकर पीस कर उसकी राख इसी नीम के तेल में मिलाकर घाव पर लेप करते रहें। नीम की पत्ती, निम्बोली ,फूल पीसकर चालीस दिन तक शरबत पियें तो सफेद दाग से मुक्ति मिल जायेगी। नीम की गोंद को नीम के ही रस में पीस कर मिलाकर पियें तो गलने वाला कुष्ठ रोग भी ठीक हो सकता है।
      • चेहरे के सफ़ेद दाग जल्दी ठीक हो जाते हैं। हाथ और पैरो के सफ़ेद दाग ठीक होने में ज्यादा समय लेते है। ईलाज की अवधि 6 माह से 2 वर्ष तक की हो सकती है।
      • मांस, मछ्ली अंडा, डालडा घी या वनस्पति तेल, लाल मिर्च, शराब, नशीली चीजे, अचार, खटाई, अरबी-भिन्डी, चावल आदि का परहेज करे। नमक कम खाएं।

      एलर्जी को दूर करने के आसान उपाय ,Allergies Treatment in Hindi,

      त्वचा की एलर्जी -त्वचा की एलर्जी काफी कॉमन है और बारिश का मौसम त्वचा की एलर्जी के लिए बहुत ज्यादा मुफीद है त्वचा की एलर्जी में त्वचा पर खुजली होना ,दाने निकलना ,एक्जिमा ,पित्ती उछलना आदि होता है lखान पान से एलर्जी -बहुत से लोगों को खाने पीने की चीजों जैसे दूध ,अंडे ,मछली ,चॉकलेट आदि से एलर्जी होती है

      एलर्जी से बचाव ही एलर्जी का सर्वोत्तम इलाज है जिन खाद्य पदार्थों से एलर्जी है उन्हें न खाएं lएकदम गरम से ठन्डे और ठन्डे से गरम वातावरण में ना जाएं धूल मिटटी से बचें ,यदि धूल मिटटी भरे वातावरण में काम करना ही पड़ जाये तो फेस मास्क पहन कर काम करेंl

        एलर्जी के लक्षण

        • आँख की एलर्जी - आँखों में लालिमा , पानी आना , जलन होना खुजली आदि।
        • नाक की एलर्जी - नाक में खुजली होना , छींके आना , नाक बहना , नाक बंद होना या बार - बार जुकाम होना आदि।
        • श्वसन संस्थान की एलर्जी - इसमें खांसी , सांस लेने में तकलीफ एवं अस्थमा जैसी गंभीर समस्या हो सकती हैं।
        • त्वचा की एलर्जी - त्वचा की एलर्जी काफी कॉमन है और बारिश का मौसम त्वचा की एलर्जी के लिए बहुत ज्यादा ख़राब है , त्वचा की एलर्जी में त्वचा पर खुजली होना , दाने निकलना , एक्जिमा , पित्ती उछलना आदि होते हैं।
        • खान - पान से एलर्जी - बहुत से लोगों को खाने पीने की चीजों जैसे दूध , अंडे , मछली , चॉकलेट आदि से एलर्जी होती हैं। 

         एलर्जी को दूर करने के आसान उपाय

        • जिन लोगों को नाक की एलर्जी बार बार होती है उन्हें सुबह भूखे पेट 1 चम्मच गिलोय और 2 चम्मच आंवले के रस में 1चम्मच शहद मिला कर कुछ समय तक लगातार लेना चाहिए इससे नाक की एलर्जी में आराम आता है
        • मुलेठी, सोंठ / अदरक (sonth), और काली मिर्च इन तीनो को कूट पीस ले और इस मिश्रण के एक ग्राम पाउडर को पानी में उबाले और चाय की तरह हर रोज़ पिए। ये एलर्जी का रामबाण इलाज हैं।
        • सर्दी में घर पर बनाया हुआ या किसी अच्छी कंपनी का च्यवनप्राश खाना भी नासिका एवं साँस की एलर्जी से बचने में सहायता करता है
        • आयुर्वेद की दवा सितोपलादि पाउडर एवं गिलोय पाउडर को 1-1 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम भूखे पेट शहद के साथ कुछ समय तक लगातार लेना भी नाक एवं श्वसन संस्थान की एलर्जी में बहुत आराम देता है
        • जिन्हे बार बार त्वचा की एलर्जी होती है उन्हें मार्च अप्रेल के महीने में जब नीम के पेड़ पर कच्ची कोंपलें आ रही हों उस समय 5-7 कोंपलें 2-3 कालीमिर्च के साथ अच्छी तरह चबा चबा कर 15-20 रोज तक खाना त्वचा के रोगों से बचाता है,
        • हल्दी से बनी आयुर्वेद की दवा हरिद्रा खंड भी त्वचा के एलर्जी जन्य रोगों सहित सभी प्रकार की एलर्जी में बहुत गुणकारी है इसे किसी आयुर्वेद चिकित्सक की राय से सेवन कर सकते हैं l
        • एक अंजीर और एक छुहारा रात में दूध में उबालकर खाए।
        • 100 मिली खीरे का रस , 100 मिली चुकुन्दर का रस , और 300 मिली गाजर का रस मिलाकर पीने से एलर्जी में फायदा मिलता हैं।
        • चार पत्ते तुलसी , अदरक , मिश्री , लौंग और काली मिर्च मिलाकर बनाई हुई हर्बल चाय पीने से एलर्जी में आराम मिलता हैं।
        • चार से पांच बूंदे कैस्टर आयल फलों या सब्जियों के रस में मिलाकर सुबह खाली पेट लें। जूस के अलावा आप पानी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इस नुस्खे से स्किन और नाक की एलर्जी में आराम मिलेगा।
        • एक चम्मच शहद और आधा नींबू का रस हलके गरम पानी में मिलाकर सेवन करने से एलर्जी ठीक होती हैं।
        • सर्दियों में चवण्यप्राश खाने से नाक और सांस की एलर्जी दूर होती हैं।
        • स्किन की एलर्जी से राहत पाने के लिए थोड़ा नींबू का रस नारियल के तेल में मिलाकर रात में लगाएं और अगले दिन सुबह नीम के पानी से धो लें।
        • स्किन की एलर्जी को दूर करने के लिए नीम की पत्तियों को 6 - 8 घंटे पानी में भिगोकर पीस लें। इसको 30 मिनिट त्वचा पर लगाकर धो लें।
        • कुछ पत्ते तुलसी के लेकर उन्हें पीस लें। अब इसमें एक चम्मच जैतून का तेल , लहसुन की दो कलियाँ , एक चुटकी नमक और एक चुटकी काली मिर्च मिलाकर एलर्जी वाले स्किन पर लगाएं। कुछ देर लगा रहने के बाद धो लें फायदा होगा। एलोवेरा जैल में गुलाबजल मिलाकर लगाने से एलर्जी जल्द ही दूर होती हैं। स्किन एलर्जी पर ऑलिव ऑइल लगाने से तुरंत आराम मिलता हैं।
        • स्किन एलर्जी होने पर नारियल के तेल को हल्का गरम करके रात को सोने से पहले अपनी त्वचा पर लगाएं। और रात भर ऐसा ही फायदा होगा।
        • सम्पूर्ण शरीर की एलर्जी - कभी - कभी कुछ लोगों में एलर्जी से गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है और सारे शरीर में एक साथ गंभीर लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं , ऐसी स्थिति में तुरंत हॉस्पिटल लेकर जाना चाहिए।

        बचाव,Prevention and treatment

          • इन्फेक्शन से बचने का प्रयास करें।
          • ठंडी हवा, धूल और नमी से बचें।
          • घर से बाहर निकलने पर कोशिश करें कि धूल के कण नाक में कम से कम जाएं।
          • अगर धूल वाले स्थान पर जाना पड़े तो मुंह पर मास्क या रूमाल रखकर जाएं।
          • घर में पालतू जानवरों कुत्ते, बिल्लियों आदि के बहुत अधिक नजदीक न जाएं।
          • घर या कार्यालय में जहां सीलन हो, वहां जाने से बचें।
          • धूम्रपान न करें।अगर आपके आसपास किसी को सिगरेट के धुएं से एलर्जी है तो उसके सामने स्मोकिंग भी न करें।
          • कुछ खाने से अगर नाक में एलर्जी हो तो उससे बचना चाहिए।
          • ज्यादा तकलीफ होने पर नेजल स्प्रे का प्रयोग कर सकते हैं।
          • जिस चीज से त्वचा पर एलर्जी होती है, उस चीज को नोट करें और उस चीज का इस्तेमाल करना ही बंद कर दें।त्वचा के जिस भाग पर एलर्जी हो, वहां किसी भी तरह का कास्मेटिक प्रयोग न करें।